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हांगकांग के ईडीवेंचर्स 2026 में गलगोटिया विश्वविद्यालय के भारतीय छात्रों को ग्लोबल पहचान, 10 देशों की 19 टीमों के बीच हासिल की बड़ी सफलता

ग्रेटर नोएडा : गलगोटिया विश्वविद्यालय के छात्रों ने ईडीवेंचर्स 2026 में शीर्ष स्थान प्राप्त कर ग्लोबल स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। ​​यह एक ग्लोबल इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप कॉम्पिटिशन है जिसे द एजुकेशन यूनिवर्सिटी ऑफ़ हांगकांग ने होस्ट किया था। इसमें दुनिया भर की विश्वविद्यालयों के यंग इनोवेटर्स ने यूनाइटेड नेशंस सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स के हिसाब से सॉल्यूशन पेश किए। 10 देशों की 19 टीमों के साथ मुकाबला करते हुए, गलगोटिया विश्वविद्यालय की दो छात्र टीमों ने इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर भारत को रिप्रेजेंट किया और एक्सेसिबिलिटी और इमर्सिव लर्निंग पर फोकस करने वाले अपने इनोवेशन-लेड सॉल्यूशंस के लिए पहचान हासिल की। अभी, खासकर ग्लोबल साउथ में, देखने में दिक्कत वाले छात्रों का एक छोटा सा हिस्सा ही सबको साथ लेकर चलने वाले और इंटरैक्टिव स्टेम लर्निंग टूल्स का इस्तेमाल कर पाता है, जिससे कोडिंग और टेक्नोलॉजी एजुकेशन में एक्सेसिबिलिटी में एक बड़ा गैप पैदा हो गया है। इस चुनौती का सामना करने के लिए, टीम ने एक सबको साथ लेकर चलने वाला लर्निंग सॉल्यूशन बनाया है जो बटन, सेंसर और ऑडियो फीडबैक का इस्तेमाल करके देखने में दिक्कत वाले स्टूडेंट्स को टच और सेंसरी इंटरैक्शन के ज़रिए कोडिंग के बेसिक कॉन्सेप्ट समझने में मदद करता है। इस प्रोजेक्ट का मकसद देखने में दिक्कत वाले छात्रों के लिए कोडिंग एजुकेशन को ज़्यादा आसान, दिलचस्प और एक्सपीरिएंशियल बनाना है, जो क्वालिटी और सबको साथ लेकर चलने वाली एजुकेशन पर फोकस करने वाले यूनाइटेड नेशंस सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल 4 में मदद करता है। प्रोजेक्ट टैक्टो का प्रतिनिधित्व वर्ष 2027 के तृतीय वर्ष के बीटेक कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग छात्र गौरांग पंत, वर्ष 2028 की द्वितीय वर्ष की बीटेक कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग (डेटा साइंस) छात्रा श्रृष्टि मंडोलिया, तथा वर्ष 2026 की तृतीय वर्ष की बीबीए फाइनेंशियल इन्वेस्टमेंट एनालिसिस छात्रा काव्या सिंह ने किया। प्रतियोगिता में एक अन्य छात्र स्टार्टअप टेक्यूरियस प्राइवेट लिमिटेड भी ग्लोबल फाइनलिस्ट्स में शामिल हुआ। इस स्टार्टअप ने एक वर्चुअल रियलिटी आधारित इमर्सिव लर्निंग प्लेटफॉर्म प्रस्तुत किया, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों के लिए शिक्षा को अधिक रोचक और इंटरैक्टिव बनाना है। इस कामयाबी के बारे में बात करते हुए, प्रोजेक्ट टैक्टो के फाउंडर्स ने कहा, “दुनिया भर की टीमों के साथ मुकाबला करना और अपने आइडिया को दुनिया भर में पहचान मिलते देखना एक यादगार अनुभव था। हम कुछ ऐसा बनाना चाहते थे जो देखने में दिक्कत वाले स्टूडेंट्स के लिए सीखने को ज़्यादा आसान और आसान बना सके, और इस पहचान ने हमारे इस विश्वास को और मज़बूत किया है कि टेक्नोलॉजी समाज पर अच्छा असर डालने का एक पावरफुल टूल बन सकती है।” प्रोजेक्ट टैक्टो के एंटरप्रेन्योर और मेंटर, मिस्टर रचित माथुर ने कहा, “जो मेंटरशिप के तौर पर शुरू हुआ था, वह आखिरकार को-फाउंडर्स के साथ काम करने जैसा लगा। हमारे बीच बिजनेस मॉडल, पिचिंग और स्ट्रैटेजी को लेकर बहस, असहमति और लंबी चर्चाएं हुईं, लेकिन टीम की कड़ी मेहनत और अपने आइडिया पर विश्वास पूरे सफर में सबसे अलग रहा। एक दमदार और सार्थक इनोवेशन बनाने का क्रेडिट सच में उन्हें जाता है। पिछले छह महीनों में, हमने उनकी पिच, जीटीएम स्ट्रैटेजी, फाउंडर माइंडसेट और इन्वेस्टर के सवालों की तैयारी को बेहतर बनाने पर काम किया। स्टार्टअप इकोसिस्टम में 15 साल से ज़्यादा समय बिताने के बाद, मैंने अपने अनुभव को इस प्रोसेस में लाने की कोशिश की। जब नतीजे घोषित हुए, तो यह बहुत ही पर्सनल और इमोशनल लगा। यह बात कि गलगोटियास यूनिवर्सिटी ने टीमों के पार्टिसिपेशन और हांगकांग की इंटरनेशनल यात्रा को पूरी तरह से स्पॉन्सर किया, यह भी दिखाता है कि डॉ. ध्रुव गलगोटिया के नेतृत्व में किस तरह का मजबूत सपोर्ट सिस्टम और स्टार्टअप कल्चर बन रहा है।” ईडीवेंचर्स 2026 में हिस्सा लेने वाली यूनिवर्सिटी और इंस्टीट्यूशन में द एजुकेशन यूनिवर्सिटी ऑफ़ हांगकांग, हांगकांग; नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, सिंगापुर; नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ एजुकेशन, सिंगापुर; किंग सऊद यूनिवर्सिटी, सऊदी अरब; ईस्ट चाइना नॉर्मल यूनिवर्सिटी, चीन; यूनिवर्सिटास इंडोनेशिया, इंडोनेशिया; अजमान यूनिवर्सिटी, संयुक्त अरब अमीरात; बीजिंग नॉर्मल यूनिवर्सिटी, चीन; द चाइनीज़ यूनिवर्सिटी ऑफ़ हांगकांग, हांगकांग; और माहिडोल यूनिवर्सिटी, थाईलैंड शामिल थे। गलगोटिया विश्वविद्यालय के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर, डॉ. ध्रुव गलगोटिया ने कहा, “हमारे छात्रों ने ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर देश को रिप्रेजेंट करके भारत को गर्व महसूस कराया है। उनका इनोवेशन, देखने में दिक्कत वाले छात्रों के लिए इनक्लूसिव एजुकेशन की चुनौती का सॉल्यूशन है। आज के युवा ऐसे सॉल्यूशन बना रहे हैं जिनके लिए टेक्नोलॉजी, एंपैथी और इंटरडिसिप्लिनरी सोच को एक साथ लाने की ज़रूरत है। यह देखना बहुत हिम्मत देने वाला है कि हमारे छात्र बड़ी इंटरनेशनल यूनिवर्सिटीज़ के साथ कॉन्फिडेंस से मुकाबला कर रहे हैं और ऐसे आइडियाज़ के लिए पहचान पा रहे हैं जो सोशली मीनिंगफुल और इनोवेशन से प्रेरित हैं। हम लगातार एक ऐसे इकोसिस्टम को मजबूत कर रहे हैं जो छात्रों को टेक्नोलॉजी, मेंटरशिप, ग्लोबल एक्सपोजर, स्टार्टअप सपोर्ट और आइडियाज़ को असल दुनिया में असरदार बनाने के मौके देता है।” गलगोटिया विश्वविद्यालय इंटरडिसिप्लिनरी लर्निंग, इंडस्ट्री एंगेजमेंट, स्टार्टअप इनक्यूबेशन और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन एकेडमिक इनिशिएटिव के ज़रिए इनोवेशन, रिसर्च, ग्लोबल एक्सपोज़र और प्रॉब्लम-सॉल्विंग का एक मज़बूत कल्चर बनाने पर फोकस करती है।

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Review: ‘रिटर्न ऑफ द जंगल’: संघर्ष से स्क्रीन तक

रिटर्न ऑफ द जंगल एनिमेटिड फिल्म “रिटर्न ऑफ द जंगल” – 15 साल की मेहनत से बनी लेखक, निर्माता ,  निर्देशक : वैभव कुमारेश, सेंसर: यू , अवधि : 124 मिनट रेटिंग 3 .5 स्टार देश विदेश में अपनी अलग इमेज बना चुके प्रख्यात एनीमेटर वैभव कुमारेश के निर्देशन में बनी यह फिल्म भारतीय एनीमेशन इन्डस्ट्री को नई दिशा देती है.इस फिल्म को मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में पेश किया गया, जहां इसे सभी ने खूब सराहा। फिल्म में वीएफएक्स का काम अव्वल दर्जे का है ,इस फिल्म को आप स्कूली बच्चों को एक नई दिशा , और भारतीय संस्कृति और किसी भी खेल में जीत हार के अनुभवों को किस तरह से लिया जाए यही सब बिग स्क्रीन बड़े पर दिखाने का नेक और अच्छा प्रयास है स्टोरी प्लॉट केंद्रीय विद्यालय के कुछ बच्चों के जीवन और उनके अटूट विश्वास पर राह में आने वाली चुनौतियों को खेल और प्रतियोगिता के माध्यम से पेश किया गया है । जहां इस स्कूल में राहुल मल्होत्रा खुद को स्पाइडर मैन से कम नहीं मानता और स्कूल में होने वाली सभी प्रतियोगिताओं को जीतता है वहीं दूसरी क्लास के छात्र भी इस बार छोटू के नेतृत्व में स्कूल की सभी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का फैसला करते है और इन सब के साथ थाथा का आशीर्वाद है , फैशन शो से क्रिकेट तक के मुकाबले फिल्म में है तो वहीं इस फिल्म में इन सभी की पक्की दोस्ती, चुनौतियो को दिखाया गया है. फिल्म में ‘थाथा’ का किरदार जो हर मुश्किल वक़्त में इन बच्चों का साथ और उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है पारंपरिक पंचतंत्र शैली की कहानियों से लिया गया है । ओवर ऑल 15 साल की मेहनत : आप हैरान होंगे बिना स्टार कास्ट के करीब दो घंटे की इस फिल्म को बनाने में फिल्म के निर्माता और उनकी पूरी टीम की करीब 15 साल का वक्त लग गया ।यह फिल्म टीम के लंबे संघर्ष का परिणाम है। इस फिल्म को तैयार करने में लगभग 15 साल का समय लगा है, मेरी नजर में यह फिल्म एनीमेशन जगत में युवा फिल्म मेकर्स ने बढ़ रहे आत्मविश्वास का संकेत है, जहां वैभव कुमारेश ने अपनी पहचान स्थापित करने की अच्छी कोशिश की है । यह केवल बच्चों के लिए है नहीं है बल्कि पूरे परिवार के लिए बनी है , तो इस बार अपने सोनू मीनू के साथ अपने पास के सिनेमा में यह फिल्म देखने जाये यकीनन आप सब की कसौटी पर फिल्म खरी उतरेगी ।

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खादी-ग्रामोद्योग ने रचा नया इतिहास – 1.87 लाख करोड़ का कारोबार

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और मार्गदर्शन में खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र ने बीते 12 वर्षों में विकास और परिवर्तन की अभूतपूर्व यात्रा तय की है। वित्त वर्ष 2025-26 में खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री 1,87,105 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई, जो अब तक की सर्वाधिक बिक्री है और ग्रामीण भारत की बढ़ती उद्यमशीलता, आत्मनिर्भरता तथा आर्थिक सशक्तिकरण का सशक्त प्रमाण है। ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ जैसे राष्ट्रीय अभियानों से प्रेरित होकर खादी आज केवल एक पारंपरिक उत्पाद नहीं, बल्कि ‘नये भारत’ की आत्मनिर्भरता, स्वदेशी गौरव और ग्रामीण समृद्धि का जीवंत प्रतीक बन चुकी है। उत्पादन, विपणन और रोजगार सृजन के नए कीर्तिमान स्थापित करते हुए खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र ने देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा और नई दिशा प्रदान की है। केवीआईसी ने जारी किए वित्त वर्ष 2025-26 के अनंतिम आंकड़े नई दिल्ली के गांधी दर्शन, राजघाट स्थित कार्यालय में वित्त वर्ष 2025-26 के अनंतिम आंकड़े (Provisional Data) जारी करते हुए केवीआईसी अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने कहा कि आयोग ने उत्पादन, बिक्री और रोजगार सृजन के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013-14 की तुलना में पिछले 12 वर्षों में बिक्री में 501 प्रतिशत, उत्पादन में 380 प्रतिशत और रोजगार सृजन में 56 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। पूर्व वर्षों की प्रवृत्ति को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में वर्ष 2013-14 की तुलना में बिक्री में 447 प्रतिशत और उत्पादन में 347 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी, जबकि वित्त वर्ष 2023-24 में वर्ष 2013-14 की तुलना में बिक्री में 400 प्रतिशत और उत्पादन में 315 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी थी। खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री 1.87 लाख करोड़ रुपये के पार अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने कहा कि केवीआईसी का यह सशक्त प्रदर्शन ‘विकसित भारत@2047’ के संकल्प को गति प्रदान करने के साथ-साथ भारत को विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रभावी मार्गदर्शन, महात्मा गांधी की प्रेरणा तथा देश के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत करोड़ों कारीगरों की मेहनत को दिया। अध्यक्ष केवीआईसी ने बताया कि वित्त वर्ष 2013-14 में खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों का उत्पादन जहां 26109 करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह करीब पांच गुना बढ़कर 380 प्रतिशत के उछाल के साथ 125296 करोड़ रुपये पहुंच गया। जबकि वित्त वर्ष 2013-14 में बिक्री जहां 31154 करोड़ रुपये थी, वहीं करीब छह गुना बढ़कर 501 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि के साथ यह वित्त वर्ष 2025-26 में 187105 करोड़ रुपये पहुंच गई, जो कि अब तक की सर्वाधिक बिक्री है। खादी वस्त्रों के उत्पादन और बिक्री में अभूतपूर्व वृद्धि खादी वस्त्रों के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। वर्ष 2013-14 में 811 करोड़ रुपये का उत्पादन बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 390 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 3,974 करोड़ रुपये हो गया है। वहीं बिक्री 1,081 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 628 प्रतिशत वृद्धि के साथ 7,869 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। प्रधानमंत्री द्वारा खादी के सतत प्रचार-प्रसार का सकारात्मक प्रभाव इस क्षेत्र की बढ़ती स्वीकार्यता और बाजार विस्तार में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। ग्रामोद्योग क्षेत्र में उत्पादन और बिक्री का नया रिकॉर्ड ग्रामोद्योग क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। वर्ष 2013-14 में जहां ग्रामोद्योग उत्पादों का उत्पादन 25,298 करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 380 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह बढ़कर 1,21,322 करोड़ रुपये हो गया है। इसी प्रकार बिक्री 30,073 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 496 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1,79,236 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी ग्रामोद्योग ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वर्ष 2013-14 में जहां इस क्षेत्र में 1.19 करोड़ लोगों को रोजगार प्राप्त था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 1.99 करोड़ के स्तर के करीब पहुंच गया है, जो ग्रामीण आजीविका सृजन में इस क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘घर-घर स्वदेशी’ जैसे अभियानों के प्रभाव से ग्रामोद्योग उत्पादों की मांग में निरंतर वृद्धि हुई है, जिससे यह क्षेत्र ग्रामीण उद्योगों के विस्तार, बाजार सुदृढ़ीकरण और रोजगार सृजन का एक प्रमुख आधार बनकर उभरा है। रोजगार सृजन के क्षेत्र में केवीआईसी की ऐतिहासिक उपलब्धि रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी केवीआईसी ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2013-14 में जहां खादी और ग्रामोद्योग से जुड़ी गतिविधियों में संचयी रोजगार (Cumulative Employment) 1.30 करोड़ था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह 56 प्रतिशत की वृद्धि के साथ बढ़कर 2.04 करोड़ हो गया है, जो ग्रामीण आजीविका सृजन में केवीआईसी की केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है। पीएमईजीपी से स्वरोजगार एवं उद्यमिता को नई गति प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के अंतर्गत वित्त वर्ष 2025-26 में 66,494 नई इकाइयों की स्थापना की गई, जिनके लिए 7,375 करोड़ रुपये के ऋण के विरुद्ध 2,457 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी वितरित की गई। इन इकाइयों के माध्यम से 7,31,434 लोगों को रोजगार उपलब्ध हुआ। योजना की शुरुआत से लेकर अब तक कुल 10,84,679 इकाइयों की स्थापना की जा चुकी है, जिनके लिए 80,705 करोड़ रुपये के ऋण के सापेक्ष 29,623 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी संवितरित की गई है। इसके माध्यम से अब तक लगभग 97.95 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। ग्रामोद्योग विकास योजना के तहत टूलकिट वितरण से कारीगरों को सशक्तिकरण ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत अभी तक 51,230 विद्युत चालित चाक, 2,46,099 बी-बॉक्स एवं बी–कालोनी, 2,674 ऑटोमैटिक एवं पैडल चालित अगरबत्ती निर्माण मशीन, 7,669 फुटवियर मैन्युफैक्चरिंग एवं रिपेयरिंग टूलकिट, 836 पेपर प्लेट एवं दोना निर्माण मशीन, 7,571 एसी, मोबाइल, सिलाई, इलेक्ट्रिशियन एवं प्लंबर टूलकिट, 5,138 टर्नवुड, वेस्टवुड क्रॉफ्ट एवं लकड़ी के खिलौने बनाने की मशीन तथा 1,789 पामगुड़, तेल घानी एवं इमली प्रसंस्करण मशीनों का वितरण किया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में इस योजना के अंतर्गत 37,769 मशीन, टूलकिट एवं उपकरणों का वितरण किया गया है। यदि पिछले चार वर्षों पर दृष्टि डालें तो वर्ष 2022-23 में 21,874, वित्त वर्ष 2023-24 में 29,540, वित्त वर्ष

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एल्टॉस कंप्यूटिंग (एसर ग्रुप की कंपनी) ने भारत के एआई इंफ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए लॉन्च किए ‘मेक-इन-इंडिया’ एआई सर्वर्स

नई दिल्ली, भारत, 23 मार्च 2026: एल्टॉस कंप्यूटिंग लिमिटेड, जो एसर इंक. ग्रुप की एक कंपनी और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग व एआई इंफ्रास्ट्रक्चर सॉल्यूशंस की वैश्विक प्रदाता है, ने आज अपने ‘मेक-इन-इंडिया’ एआई सर्वर पोर्टफोलियो के लॉन्च की घोषणा की। यह भारत के संप्रभु एआई और डेटा सेंटर इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह घोषणा नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष लॉन्च इवेंट में की गई। इस अवसर पर सुधीर गोयल, एसर इंडिया के चीफ बिजनेस ऑफिसर; इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त सचिव सुशील पाल;विशाल धूपर, प्रबंध निदेशक, एशिया साउथ, एनवीडिया; इंटेल इंडिया के सीनियर डायरेक्टर (ग्लोबल अकाउंट्स – ओईएम और हाइपरस्केलर्स) पी.पी. सुनील आचार्य; एल्टॉस कंप्यूटिंग इंक. के सीईओ जैकी ली और एल्टॉस इंडिया की डायरेक्टर प्रिया कृष्णमूर्ति सहित मीडिया, प्रौद्योगिकी उद्योग के वरिष्ठ प्रतिनिधि और भागीदार उपस्थित थे। इवेंट की मुख्य विशेषता एल्टॉस ब्रेनस्फीयर™ R300 एआई सीरीज सर्वर का अनावरण रहा। यह कंपनी का फ्लैगशिप ‘मेक-इन-इंडिया’ एआई सर्वर है, जिसे उद्यमों, अनुसंधान संस्थानों, सरकारी संगठनों और हाइपरस्केल डेटा सेंटरों में अगली पीढ़ी के एआई वर्कलोड को चलाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और उन्नत एआई मॉडल ट्रेनिंग व इन्फरेंस के लिए निर्मित, R300 सीरीज प्लेटफॉर्म हाई-डेंसिटी जीपीयू एक्सेलेरेशन, स्केलेबल मेमोरी आर्किटेक्चर और उन्नत थर्मल दक्षता का समर्थन करता है। इससे संगठनों को प्रदर्शन, विश्वसनीयता और स्केलेबिलिटी बरकरार रखते हुए कम्प्यूट-इंटेंसिव एआई वर्कलोड को मैनेज करने में मदद मिलती है। लॉन्च के बारे में बात करते हुए एसर इंडिया के प्रेसिडेंट और एमडी हरीश कोहली ने कहा, “भारत आज एक परिवर्तनकारी एआई युग की दहलीज पर खड़ा है, जहां शक्तिशाली कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विभिन्न उद्योगों में नवाचार की रीढ़ बनेगा। एल्टॉस के मेक-इन-इंडिया एआई सर्वर पोर्टफोलियो के लॉन्च के साथ, हम स्थानीय स्तर पर इस डिजिटल रीढ़ को तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं। उन्नत एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के विनिर्माण को भारतीय बाजार के करीब लाकर, हम उद्यमों, अनुसंधान संस्थानों और सार्वजनिक क्षेत्र के संगठनों के लिए तेज तैनाती, बेहतर पहुंच और अधिक स्केलेबिलिटी सुनिश्चित कर रहे हैं। एल्टॉस के हाई-परफॉर्मेंस एआई प्लेटफॉर्म और हमारे मजबूत पार्टनर इकोसिस्टम के माध्यम से, हम पूरे भारत में संगठनों को एआई की पूरी क्षमता का लाभ उठाने के लिए सशक्त बनाने के प्रति प्रतिबद्ध हैं।” यह लॉन्च भारत को एआई नवाचार और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का वैश्विक हब बनाने की महत्वाकांक्षा का समर्थन करने की एल्टॉस की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। स्थानीय स्तर पर एआई सर्वरों का निर्माण करके और संगठनों को देश के भीतर शक्तिशाली कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म तैनात करने में सक्षम बनाकर, कंपनी अनुसंधान, विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवा और सार्वजनिक सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में स्केलेबल एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की तेजी से बढ़ती मांग को पूरा करने का लक्ष्य रखती है। लॉन्च के दौरान एआई इकोसिस्टम के भीतर आपसी सहयोग के महत्व को भी प्रमुखता से उजागर किया गया। लॉन्च के अवसर पर बोलते हुए, सुधीर गोयल, एसर इंडिया के चीफ बिजनेस ऑफिसर ने कहा, ‘‘भारत अब डिजिटल और एआई से चलने वाले बड़े बदलाव के समय में प्रवेश कर रहा है। इस दौर में देश के अंदर ही मजबूत और तेज कंप्यूटिंग सुविधाएं (जैसे सर्वर आदि) उपलब्ध होना बहुत जरूरी है, क्योंकि ये नए आविष्कार और इनोवेशन को बढ़ावा देंगी। एल्‍टॉस के मेक इन इंडिया वाले एआई सर्वर लॉन्च करना हमारी उस प्रतिबद्धता को दिखाता है कि हम मेक इन इंडिया मुहिम के जरिए भारत में मजबूत घरेलू तकनीकी व्यवस्था बनाना चाहते हैं। अब हम उन्नत एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को भारत में ही बनाकर और यहां के बाजार के करीब लाकर उपलब्ध करा रहे हैं। हमारा मकसद है कि कंपनियां, रिसर्च सेंटर, स्टार्टअप्स और सरकारी संस्थाएं आसानी से अगली पीढ़ी के एआई सॉल्यूशन बना सकें, उन्हें प्रशिक्षित कर सकें और बड़े स्तर पर इस्तेमाल कर सकें। यह सब भारत के विकास के लिए बहुत उपयोगी होगा।’’ इस लॉन्च के रणनीतिक महत्व पर चर्चा करते हुए, एल्टॉस कंप्यूटिंग इंक. के सीईओ जैकी ली ने कहा, “एल्टॉस कंप्यूटिंग में हमारा मिशन हमेशा से संगठनों को हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और एआई की शक्ति के जरिए जटिल चुनौतियों को हल करने में मदद करना रहा है। भारत वैश्विक स्तर पर सबसे गतिशील और तेजी से बढ़ते एआई बाजारों में से एक है, जिसमें उद्यमों, सरकार और शिक्षा जगत में अपार संभावनाएं मौजूद हैं। हमारे ‘मेक-इन-इंडिया’ एआई सर्वर सॉल्यूशंस की शुरुआत देश में हमारी मौजूदगी को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। अपनी वैश्विक इंजीनियरिंग विशेषज्ञता को स्थानीय विनिर्माण क्षमताओं के साथ जोड़कर, हम शक्तिशाली और स्केलेबल एआई इंफ्रास्ट्रक्चर सॉल्यूशंस प्रदान कर रहे हैं जो भारत की दीर्घकालिक तकनीकी महत्वाकांक्षाओं के अनुरूप हैं।” कार्यक्रम के दौरान, एल्टॉस ने एक इंटरैक्टिव ‘प्रोडक्ट डिस्प्ले एरिना’ के माध्यम से अपने व्यापक एआई और कंप्यूटिंग पोर्टफोलियो को प्रदर्शित किया। नए लॉन्च किए गए R370 एआई सीरीज सर्वर के साथ-साथ, कंपनी ने एल्टॉस R680 एआई सर्वर का भी प्रदर्शन किया। यह एक हाई-डेंसिटी कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म है, जिसे बड़े पैमाने पर एआई मॉडल ट्रेनिंग और उन एंटरप्राइज वर्कलोड के लिए डिज़ाइन किया गया है जिन्हें अत्यधिक कम्प्यूटेशनल पावर की आवश्यकता होती है। इवेंट में एक विशेष ‘एआई वॉल’ लगाई गई थी, जिसमें एल्टॉस इंफ्रास्ट्रक्चर (R370, R680 और R380 प्लेटफॉर्म) द्वारा संचालित वास्तविक दुनिया के ‘एआई यूज़ केसेस’ को हाइलाइट किया गया। इन डेमोन्सट्रेशन्स ने दिखाया कि कैसे ये एआई सर्वर प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स, इंटेलिजेंट वीडियो एनालिटिक्स, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग ऑटोमेशन और उन्नत रिसर्च कंप्यूटिंग जैसे एप्लिकेशन्स को संभव बनाते हैं। डिस्प्ले एरिया में एल्टॉस के अन्य सॉल्यूशंस भी दिखाए गए, जिनमें P-सीरीज एज कंप्यूटिंग सिस्टम्स, T-सीरीज प्लेटफॉर्म्स और इंटरैक्टिव फ्लैट पैनल डिस्प्ले शामिल थे। यह कंपनी के उस व्यापक इकोसिस्टम को दर्शाता है जो एआई इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर एज कंप्यूटिंग और एंटरप्राइज सहयोग तकनीकों तक फैला हुआ है। एल्टॉस इंडिया की डायरेक्टर प्रिया कृष्णमूर्ति ने कहा, “भारत में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग तेजी से बढ़ रही है, क्योंकि संगठन अब अपने परिचालन और निर्णय लेने की प्रक्रिया को बदलने के लिए ‘डेटा-संचालित इंटेलिजेंस’ पर अधिक निर्भर हो रहे हैं। मेक-इन-इंडिया R370 एआई सीरीज सर्वर के लॉन्च के साथ हमारा पूरा ध्यान यह सुनिश्चित करने पर है कि भारत के उद्यमों और संस्थानों को आधुनिक एआई वर्कलोड के लिए विश्वसनीय और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म उपलब्ध हों। स्थानीय

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