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स्वास्थ्य: 80 का फाॅर्मूला अपनाने से हृदयरोग से दूर रहेंगें हृदयरोगी और अवसाद से ग्रस्त मरीज

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  • जीवनशैली संबंधी विकार और अवसाद दोराहे की तरह हैं।
  • बीमारियों को रोकने और स्वस्थ रहने के लिए 80 के सूत्र का पालन करें।

दिल की बीमारियों वाले मरीजों को अक्सर सोचने में कठिनाई का अनुभव होता है और अवसाद ग्रस्त होने की संभावना होती है, ऐसा एक नये अध्ययन में पता चला है। सर्कैडियन तंत्र दिल की विफलता के तंत्रिका प्रभावों पर असर डालता है। हृदय की विफलता वाले रोगियों में अक्सर संज्ञानात्मक हानि और अवसाद जैसी तंत्रिका संबंधी कंडीशन होती हैं। यद्यपि हृदय की दशा का कोई इलाज नहीं है, लेकिन मस्तिष्क में सर्कैडियन तंत्र कैसे काम करता है, यह जानकर रोगियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए नई रणनीतियां बनायी जा सकती हैं।

एक अन्य अध्ययन के अनुसार, गंभीर रूप से मानसिक तौर पर बीमार लोगों में कोरोनरी हृदय रोग और स्ट्रोक से मरने की संभावना, सामान्य लोगों की तुलना में तीन गुना अधिक होती है। मानसिक बीमारी 75 वर्ष की आयु तक के लोगों के लिए हृदय रोग से मरने के जोखिम को दोगुना कर देती है। दिल की बीमारी से मरने का जोखिम एंटीसाइकोटिक दवाएं लेने वालों में और भी अधिक पाया गया।

“अवसाद, गंभीर मानसिक बीमारी और अकेलापन हृदय रोग और मनोभ्रंश से जुड़े हैं। अवसाद और धमनियों के सख्त होने के बीच सहसंबंध है। जो लोग सबसे ज्यादा उदास होते हैं, उनकी धमनियां सामान्य लोगों की तुलना में दोगुना अधिक संकुचित होती हैंैं। धमनियों का सख्त होना दिल के दौरा या स्ट्रोक का संकेत है। डिप्रेशन शरीर की उन विभिन्न्ा ग्रंथियों के रेगुलेशन को प्रभावित कर सकता है, जो ऊर्जा स्तर तथा विकास को नियंत्रित करने वाले रसायन छोड़ती हैं और रक्त के थक्के के लिए जिम्मेदार कोशिकाओं के कामकाज में बदलाव करती हैं। धमनियों के कठोर होने से प्रतिरक्षा प्रणाली गड़बड़ा जाती है और परिणामस्वरूप सूजन के कारण ऐसे रसायन स्रवित होते हैं, जो बीमारियों का कारण बन सकते हैं ”

नकारात्मक तनाव सकारात्मक तनाव से अधिक खतरनाक है और ईष्र्या, क्रोध और निंदा का सीधा का संबंध दिल के दौरे से है। इसका उत्तर छिपा है कि आप व्यक्तिगत समस्याओं से निपटने के लिए किस तरह से प्रतिक्रिया करते हैं। बच्चों में इस प्रकार का तनाव, विशेषकर परीक्षा के दिनों में, चिंता, अनिद्रा और आत्महत्या जैसी स्थितियों को उत्पन्न्ा कर सकता हैद्ध

“दिल की समस्या न हो, ऐसी मनःस्थिति वाले लोग कम ही मिलते हैं। दिल को स्वस्थ रखने के लिए एक स्वस्थ जीवन शैली अपनाने और इसे बनाए रखने की आवश्यकता है, और ऐसा जीवन में जल्दी ही शुरू होना चाहिए। डॉक्टरों के रूप में, यह हमारी जिम्मेदारी है कि रोगियों को शिक्षित करने और उन्हें बुढ़ापे में बीमारी के बोझ से बचाने के लिए, स्वस्थ जीवन शैली जीने के तरीके बतायें और उन्हें जागरूक करें। मैं अपने मरीजों को 80 साल की उम्र तक जीने के लिए 80 का फॉर्मूला सिखाता हूं।”

  • लो ब्लड प्रेशर, लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन (एलडीएल) बैड कोलेस्ट्रॉल, फास्ट शुगर, हार्ट रेट और पेट के निचले हिस्से की चैड़ाई 80 से नीचे रखें।
  • किडनी और फेफड़े के कार्य 80 प्रतिशत रखें।
  • अनुशंसित मात्रा में शारीरिक गतिविधि (न्यूनतम 80 मिनट प्रति सप्ताह जोरदार व्यायाम) में व्यस्त रहें। प्रति दिन 80 मिनट पैदल चलें, कम से कम 80 कदम प्रति मिनट की गति से 80 मिनट प्रति सप्ताह पैदल चलें।
  • प्रत्येक बार भोजन कम ही खाएंः 80 ग्राम या मिली कैलोरी भोजन।
  • निर्धारित होने पर, रोकथाम के लिए 80 मिलीग्राम एटोरवास्टेटिन लें।
  • शोर का स्तर 80 डीबी से कम रखें।
  • पार्टिकुलेट मैटर पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्तर को 80 एमसीजी प्रति क्यूबिक मीटर से नीचे रखें।
  • दिल की कंडीशनिंग वाले व्यायाम करते समय हृदय गति 80 प्रतिशत तक रखें।
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