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पर्यावरण प्रदूषण बच्चों में अस्थमा की परेशानी का मुख्य कारक

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अस्थमा का अटैक रोकने के लिए उचित प्रबंधन और इनहेलर्स का सही उपयोग महत्वपूर्ण है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, अस्थमा से होने वाली मौतों में से 80 प्रतिषत निम्न और निम्न-मध्यम-आय वाले देशों में होती हैं। अगर दुनिया भर में अनुमानित 1.5 से 2 करोड़ अस्थमा रोगी हैं, तो हर 10 में से कम से कम 1 भारत में रहता है। हाल के एक अध्ययन से यह भी संकेत मिलता है कि देश में लगभग 35 प्रतिषत प्रीस्कूलर बच्चों में अस्थमा के लक्षण मिले हैं, जबकि दो-तिहाई में ये लक्षण बाद के वर्षों में दिखायी दिये और लगभग 16.67 प्रतिषत अभी भी इससे पीड़ित हैं।
विश्व अस्थमा दिवस पर, समय की आवश्यकता इस तथ्य पर जागरूकता बढ़ाने की है कि पर्यावरण प्रदूषण इस स्थिति के लिए एक बड़ा जोखिम कारक बनकर उभर रहा है, खासकर बच्चों में। इस वर्ष विश्व अस्थमा दिवस की थीम है- स्टॉप फॉर अस्थमा। यहां अंग्रेजी के स्टॉप अक्षरों का अर्थ हैः लक्षणों का मूल्यांकन, परीक्षण प्रतिक्रिया, निरीक्षण, मूल्यांकन का विस्तार, और उपचार को समायोजित करने के लिए अगला कदम। उचित प्रबंधन और इनहेलर के सही उपयोग के बारे में मरीजों को शिक्षित करना अत्यावश्यक है।
”अस्थमा को समझने के लिए वायुमार्ग के काम को समझना महत्वपूर्ण है। वायुमार्ग वे नलिकाएं हैं जो हवा को फेफड़ों से बाहर और अंदर ले जाती हैं। अस्थमा वाले लोगों में, इन वायुमार्गों में सूजन हो जाती है, जिससे वे बहुत संवेदनशील हो जाती हैं। इसके कारण, वायुमार्ग सांस लेने वाले पदार्थों के लिए दृढ़ता से प्रतिक्रिया करते हैं, जिससे उनके आसपास की मांसपेशियों में खिंचवा होता है। नतीजतन, वायुमार्ग संकीर्ण हो जाते हैं, जिससे कम हवा फेफड़ों में प्रवाहित होती है। वायुमार्ग में कोशिकाएं सामान्य से अधिक बलगम बना सकती हैं। इन सभी के परिणामस्वरूप अस्थमा के लक्षण हो सकते हैं, जो हर बार वायुमार्ग में सूजन के कारण बन सकते हैं। अस्थमा का बच्चों में विकास का कोई विशेष कारण नहीं है। हालांकि, धूल, वायु प्रदूषण, और टॉक्सकॉन्ड धुआं जैसे कई ट्रिगर हैं। अस्थमा के कारण स्कूल से बच्चे अनुपस्थित रहने लगते हैं।”
बच्चों में अस्थमा के कुछ लक्षणों में सांस लेने, खांसने, तेजी से सांस लेने पर सीने में दर्द होना, ऊर्जा कम होना और कमजोरी या थकान महसूस होना आदि शामिल हैं।
“ट्रिगर्स के संयोजन के लिए निरंतर संपर्क के कारण ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोगों के बीच वायुमार्ग संवेदनशीलता बढ़ रही है। अस्थमा के लिए निरंतर चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता होती है और मध्यम से गंभीर अस्थमा वाले लोगों को सूजन रोधी दवाएं लंबे समय तक लेनी चाहिए। लक्षणों और हमलों को रोकने के लिए इन्हें हर दिन लिया जाना चाहिए। अस्थमा के लक्षणों से त्वरित राहत के लिए छोटी अवधि की दवाइयां जैसे कि सांस लेने वाले बीटा-एगोनिस्ट का उपयोग किया जाता है।”
अस्थामा से बचाव के लिए ये करें
  • धूल के माइट्स के संपर्क में आने से बचें। ये छोटे कीट हैं और सबसे आम अस्थमा ट्रिगर्स में से एक हैं। वे बिस्तर, कालीन, फर्नीचर और नरम खिलौने में रहना पसंद करते हैं। इन सभी चीजों को धूल से मुक्त रखना महत्वपूर्ण है।
  • खासकर अगर एलर्जी हो तो पालतू जानवरों के साथ बच्चे के संपर्क को प्रतिबंधित करें।
  • एक स्वस्थ वजन बनाए रखें और खाने की अच्छी आदतों को प्रोत्साहित करें। उनकी डाइट में खूब फल, सब्जियां और साबुत अनाज शामिल करें।
  • धुएं के संपर्क में आने से बचें। गर्भवती माताओं को धूम्रपान पूरी तरह से छोड़ देना चाहिए क्योंकि यह बच्चों में अस्थमा के विकास के प्रमुख जोखिम कारकों में से एक है।
  • अपने शिशु को स्तनपान कराएं। इससे प्रतिरक्षा बढ़ेगी और संभावित जटिलताओं को दूर करने में मदद मिलेगी।
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