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सर्जन पिता और सर्जन पुत्र को ‘‘सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र प्रकाशन पुरस्कार’’

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नई दिल्ली : सुप्रसिद्ध आर्थोपेडिक सर्जन प्रो. (डा.) राजू वैश्य एवं उनके पुत्र आर्थोपेडिक सर्जन डा. अभिषेक वैश्य को ‘‘सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र प्रकाशन पुरस्कार’’ से सम्मानित किया गया है।  गत दिवस नई दिल्ली के इद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के सभागार में आयोजित एक भव्य समारोह में अपोलो ग्रुप के अध्यक्ष डा. प्रताप सी. रेड्डी ने दोनों पुरस्कार विजेताओं को प्रशस्ति पत्र के साथ पुरस्कार प्रदान किए जो अपोलो ग्रुप  का सर्वाधिक प्रतिष्ठित पुरस्कार है। समारोह में विभिन्न क्षेत्रों के अनेक महत्वपूर्ण सख्शियत भी मौजूद थे। ये पुरस्कार अपोलो हास्पीटल शिक्षा अनुसंधान फाउंडेशन (एएचईआरएफ) की ओर से दिए जाते हैं।

डॉ. राजू वैश्य को यह पुरस्कार अपोलो ग्रुप के सभी चिकित्सकों में सबसे अधिक संख्या में वैज्ञानिक शोध पत्रों के प्रकाशन के लिए दिया गया है। वर्ष 2018 में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में डा. राजू वैश्य के 80 शोध प्रत्र प्रकाशित हुए। इसी समारोह में डा. राजू वैश्य को एडजुकेंट प्रोफेसर का भी खिताब दिया गया।

best paper publication award -Dr. Abhishek Vaishya

डॉ. अभिषेक वैश्य को ‘जटिल आर्थोपेडिक फ्रैक्चर मामलों में 3 डी प्रिंटिंग के उपयोग’’ पर उनके शोध पत्र के लिए पुरस्कार दिया गया। डा. अभिषेक वैश्य इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में आर्थोपेडिक सर्जन हैं। इससे पूर्व उन्होंने सफदरजंग अस्पताल के सेंट्रल इंस्टीच्यूट आफ आर्थोपेडिक्स में वरिष्ठ रेसीडेंट के तौर पर भी काम किया। डा. अभिषेक वैश्य ने 30 साल की उम्र में पांच शार्ष मेडिकल उपाधियां – एमबीबीएस, एमएस आर्थो, एमसीएच आर्थो, डिप सिकॉट, डीएनबी (आर्थो) और एमएनएएमएस हासिल की।
डॉ. राजू वैश्य भारत में आर्थोपेडिक बिरादरी में सर्वाधिक ख्याति प्राप्त चिकित्सक एवं चिकित्सा अनुसंधानकर्ता हैं। विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में उनके 300 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। कई अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं के वह संपादक रह चुके हैं।

वर्ष 2015 में अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में 58 शोध पेपर प्रकाशित हुए जबकि वर्ष 2018 में 80 शोध पत्र प्रकाशित हुए जो कि एक रिकॉर्ड है। वह नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में वरिष्ठ आर्थोपेडिक एवं ज्वांइट रिप्लेसमेंट सर्जन हैं। साथ ही वह इंडियन कार्टिलेज सोसायटी और आर्थराइटिस केयर फाउंडेशन (एसीएफ) के अध्यक्ष हैं। वह प्रतिष्ठित शोध पत्रिका-जर्नल आफर क्लिनिकल ऑर्थोपेडिक्स एंड ट्रौमा के प्रमुख संपादक हैं। दुलर्भ किस्म की आर्थोपेडिक शल्य क्रियाओं को सफल अंजाम देने के लिए उनका नाम 2012, 2013, 2014 और 2016 में लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज किया जा चुका है। अफगानिस्तान, नाइजीरिया, कांगो आदि जैसे दुनिया के सबसे कठिन और युद्धग्रस्त इलाकों में भी उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को चिकित्सा सेवाएं प्रदान की है। डा. बी सी रॉय ओरेशन अवार्ड एंवं गोल्ड मेडल, इनोवेशन अवार्ड इन मेडिसीन, प्राइड आफ एशिया अंतर्राष्ट्रीय अवार्ड जैसे महत्वपूण पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके हैं।

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