Home खबरें मोदी मंत्रिमंडल के सात मंत्री मेरे करीबी, उम्मीद का समंदर पार करना बड़ी चुनौती

मोदी मंत्रिमंडल के सात मंत्री मेरे करीबी, उम्मीद का समंदर पार करना बड़ी चुनौती

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आदर्श कुमार इंकलाब, टीवी पत्रकार, मीडिया एजुकेटर और राष्ट्रीय कवि

नयी सरकार का गठन हुए करीब एक हफ्ते हो गए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई आर्मी फिलहाल एक्शन मोड में नजर आ रही है। केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल ज्यादातर लोग अपने काम के लिए जाने जाते हैं। इसमें जहां राजनाथ सिंह, अमित शाह, नितिन गडकरी, रामविलास पासवान, डॉ. हर्ष वर्धन, प्रकाश जावडेकर, मुख्तार अब्बास नकवी जैसे दिग्गज हैं तो बिहार के अश्विनी चौबे और बंगाल के बाबुल सुप्रियो जैसे ऊर्जावान चेहरे भी हैं। हालांकि पीएम की इस नई आर्मी में 75 फीसदी चेहरे पुराने है- फिर भी उम्मीद की जा सकती है कि ये सरकार बेहतर प्रदर्शन करेगी। ऐसा मैं अपने व्यक्तिगत अनुभव के लिहाज से कह रहा हूं। पीएम मोदी के इस मंत्रिमंडल में 8 चेहरे ऐसे हैं जिनके कामकाज को मैंने बेहद करीब से देखा है- उनसे व्यक्तिगत परिचय है इसलिए उनकी पूरी चिंतन प्रक्रिया से भी भली-भांति वाकिफ हूं। 

पीएम मोदी के मंत्रिमंडल में एक चेहरा ऐसा है जिस पर इल्जाम लगता रहा है कि सरकार किसी की भी हो, वो मंत्री पद की शपथ जरूर लेते हैं। आप जानते हैं मैं राम विलास पासवान की बात कर रहा हूं, एकाध मौके को छोड़कर ऐसा वो करते भी रहे हैं मगर मेरा उनसे जनता दल के दिनों यानि बचपन से परिचय है। राम विलास पासवान के पोस्टर गांव-गांव उन दिनों खूब चिपके हुए मिलते- जिस पर लिखा होता था- मैं उस घर में दीया जलाने चला हूं, जिस घर में सदियों से अंधेरा है। पापा सीतामढ़ी में जनता दल से जुड़े थे इसलिए शहर में हर रैली के आयोजन में उनकी बड़ी भूमिका होती थी। मंच पर बड़े उत्साह के साथ पापा हर बड़े नेता से मिलवाते थे- फिर कई बार अलग-अलग जगह पर भी सबसे मुलाकात होती रही। कई पारिवारिक-सामाजिक आयोजन में दिल्ली से आकर शरीक होते थे। यहां तक कि जब मेरी शादी हुई तो वो बाहर थे, उनका कॉल आया- बाद में पत्र और बुके भी । खैर, कुल मिलाकर राम विलास पासवान की आलोचना इसलिए तो की जा सकती है कि उनके लिए मंत्री पद सबसे ज्यादा मायने रखता है, विचारधारा नहीं- मगर ये भी सच है कि वो जमीन से जुड़े हुए नेता हैं, लोगों की तकलीफ समझते हैं। उनसे उम्मीद है कि इस बार अपने क्षेत्र के लोगों के लिए कुछ खास करेंगे।
टीवी मीडिया इंडस्ट्री में ये बात सभी जानते हैं कि आदर्श की पैठ बीजेपी, आरजेडी और समाजवादी पार्टी में समान रूप से है। ये बात काफी हद तक सही है। आरजेडी और समाजवादी पार्टी से जुड़ाव पारिवारिक विरासत का हिस्सा है- वहीं बीजेपी से जुड़ाव राष्ट्रवादी विचारधारा की वजह से है।

मैं ये बात दावे के साथ कह सकता हूं कि बीजेपी के बहुत सारे नेता हैं, जो वाकई बेहद अच्छे हैं। इनमें से एक नाम है डॉ. हर्ष वर्धन। डॉ. हर्षवर्धन जी से साल 2004 से मेरा परिचय है, जब वो शीला दीक्षित के खिलाफ प्रदर्शन किया करते थे और दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष हुआ करते थे। ऑल इंडिया रेडियो में रिपोर्टिंग के दौरान कई बार उनसे मिला और उसके बाद उनसे एक व्यक्तिगत जुड़ाव बन गया, जो आज तक कायम है।

मैंने जब किताब लिखी तो उसके लिए उन्होंने बेहद अच्छे शब्दों का प्रयोग करते हुए शुभकामना संदेश भेजा- बाद में जब उन्हें किताब भेंट करने गया तो बड़ी देर तक बहुत सारे मसलों पर उनसे बात होती रही। मेरी शादी के मौके पर उनका कई बार फोन आया, बाहर थे नहीं आ सके मगर उन्होंने बड़ी देर तक बात की और दिल से बहुत शुभकामनाएं दीं- घर आने को कहा। कई बार उनके घर पर भी अच्छी मुलाकात हुई।

जब मैं एबीपी न्यूज में था और उनके एक बयान को लेकर विवाद हुआ तो मैंने उन्हें एसएमएस करके एक सुझाव दिया था, जिसे बाद में उन्होंने माना। ये उनके बड़प्पन की निशानी है। अभी हाल ही में उनसे मुलाकात हुई तो बेहद व्यस्त समय के बावजूद काफी देर तक किसी पुराने दोस्त की तरह बात करते रहे। इस बात में कोई शक नहीं कि वो एक शानदार व्यक्तित्व के धनी हैं, कर्मठ भी। वो जिस भी मंत्रालय में रहते हैं, काम करते हैं- एक बार फिर उन्हें उनका पसंदीदा स्वास्थ्य मंत्रालय मिला है- इसलिए उन्हें बधाई और शुभकामनाएं।

मौजूदा मोदी सरकार में जो मेरे दूसरे पसंदीदा मंत्री हैं वो हैं प्रकाश जावडेकर। प्रकाश जावडेकर जी से लगातार संवाद होता था- वो बीजेपी के प्रवक्ता हुआ करते थे। बाद में मंत्री बने मगर वही सौम्य व्यवहार बना रहा। अपनी किताब के प्रकाशन से पहले उनको मैंने अपनी कविताएं भेजी- उन्होंने बड़े अच्छे शब्दों में शुभकामनाएं भेजी- जब भी मेल करता था तो वो खुद जवाब दिया करते थे वो भी हिंदी में। उनसे मुलाकात के दौरान मैं अक्सर उनकी हिंदी की तारीफ किया करता था तो उनके चेहरे पर खुशी तैर जाती थी

मराठी होने के बावजूद हिंदी से उनके लगाव की प्रशंसा की जानी चाहिए। सूचना प्रसारण मंत्रालय और पर्यावरण मंत्रालय की जिम्मेदारी के लिए उनको बधाई। सूचना प्रसारण मंत्रालय में पहले भी उन्होंने अच्छा काम किया था। वो एक बार फिर अच्छे सूचना प्रसारण मंत्री साबित होंगे, इसमें कोई शक नहीं, उन्हें दिल से शुभकामनाएं।

मोदी कैबिनेट में मेरे जो तीसरे पसंदीदा मंत्री हैं वो हैं मुख्तार अब्बास नकवी। जब भी मैं उनसे मिला, इतनी आत्मीयता से मिले कि पूछिए मत। जब कभी उनको कुछ लिखने के लिए कहा तो कहते वैसे तो काफी व्यस्तता है मगर आपके लिए जरूर लिखूंगा। और फिर जब लिखते तो ऐसी लच्छेदार भाषा कि आप मुस्कुराते रह जाएं।

पहले वो हाथ से लिखकर पीए को देते फिर जब प्रिंट होकर आता तो उसके बाद भी कुछ न कुछ उसमें जोड़ देते। बतौर पत्रकार मैं कह सकता हूं कि किसी भी मसले पर बोलने या लिखने के लिए एक नेता के भीतर जो उत्साह होना चाहिए, वो नकवी जी में कूट-कूटकर भरा हुआ है। मेरी किताब हो या शादी का अवसर उनका पत्र सबसे पहले आता था। उनसे फोन पर बातचीत में भी उनका उत्साह झलकता था। खैर, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री के तौर पर वो पहले से बेहतर काम करेंगे- ऐसी मेरी आशा है।
मोदी कैबिनेट की मंत्री स्मृति ईरानी की भी जितनी तारीफ की जाए कम है। मैं उन्हें जब मैसेज करता था तो ये सोचकर कि इसका जवाब घंटों बाद आएगा- लेकिन तुरंत उनका जवाब आता था। कई बार जब वो देश से बाहर होती थीं तो मुंबई उनके आवास पर कॉल करता था। लौटते ही उनका कॉल आता था। साल 2005 में जब मैं मुंबई स्टार न्यूज में था तो उनसे मुलाकात हुई थी- उसके बाद से उनसे संवाद होता रहा। मेरी किताब जब प्रकाशित हो रही थी तो वो बाहर थीं, उनका पहले मैसेज आया कि बाहर होने की वजह से कुछ लिख नहीं पा रही हूं, आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं। उस वक्त मैं उनके मैसेज का जवाब नहीं दे पाया तो बाद में कॉल आया।

हालांकि कई पत्रकार इस बात को लेकर शिकायत भी करते थे कि वो बाइट, इंटरव्यू या फिर कॉल-मैसेज का जवाब नहीं देती- मगर मेरा अनुभव अलग रहा । आज मैं कह सकता हूं कि अमेठी की जंग अगर उन्होंने जीती है तो इसमें लोगों से जुड़े रहने की उनकी प्रतिभा का बहुत योगदान है। उम्मीद है कि वो महिला और बाल विकास मंत्री के तौर पर बहुत अच्छा काम करेंगी।

जब मैं स्टार न्यूज सेंटर, मुंबई में था तो उन्हीं दिनों बाबुल सुप्रियो से पहली बार मिला था। तब दूर-दूर तक अंदेशा नहीं था कि ये राजनीति की दुनिया में कदम भी रखेंगे। बाद में दिल्ली में कई बार उनसे मुलाकात हुई। कुछ दिनों पहले भी उनसे मिला। बेहद ऊर्जावान और हिम्मती शख्स हैं बाबुल सुप्रियो- आने वाले दिनों में ममता बनर्जी के खिलाफ रणनीति बनाने में वे बेहद कारगर साबित होंगे। 

मुझे ऐसा लगता है कि आने वाले दिनों में बंगाल पर बीजेपी का कब्जा होगा और उसमें बाबुल सुप्रियों की बड़ी भूमिका हो सकती है। इसलिए उन्हें मंत्री पद के साथ-साथ आने वाले भविष्य के लिए भी शुभकामनाएं।

मोदी कैबिनेट में रविशंकर प्रसाद का खास स्थान है। बतौर पत्रकार मैंने देखा है कि कई बार वो किसी भी कार्य में देर होने पर तुरंत आपा खो बैठते हैं मगर उन्हें अच्छे लोगों की परख है। साल 2014 में जब मेरी किताब प्रकाशित हो रही थी तो उनका कॉल आया कि आदर्शजी बेहद व्यस्त हूं- लिखना चाहता था आपके लिए लेकिन इस भागदौड़ में कैसे लिखूं। मैंने कहा कि आपकी शुभकामनाएं ही काफी है।

जब भी मिला वो बेहद सक्रिय नजर आए। मेरा मानना है कि बीजेपी जिस आक्रामक राजनीति की राह पर चलती है, उसमें रविशंकर प्रसाद तत्परता से अपनी भूमिका निभाते हैं। अब चूंकि वो शत्रुघन सिन्हा जैसे दिग्गज को हराकर आएं हैं तो उम्मीद है कि अपने लोकसभा क्षेत्र पटना साहिब के लिए वो कुछ खास करेंगे।

फिजां बदायूंनी का एक शेर है कि
मौजों की सियासत से मायूस न हो ‘फानी’
गिर्दाब की हर तह में साहिल नजर आता है।
इसलिए इंतजार कीजिए वक्त कैसे और किस तरह करवट लेता है।
( लेखक 12 साल तक स्टार न्यूज-।ठच् न्यूज में कार्यरत रहे, पिछले दो साल से मीडिया एजुकेटर हैं)

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