Home स्पोर्ट्स दिल्ली सरकार की मिशन एक्सेलेंस स्कीम की अनदेखी और अपने साथ इंसाफ का इतंजार करते पैरा खिलाड़ी

दिल्ली सरकार की मिशन एक्सेलेंस स्कीम की अनदेखी और अपने साथ इंसाफ का इतंजार करते पैरा खिलाड़ी

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सुवर्णा राज, (अंतर्राष्ट्रीय पैरा एथलीट)

मैं सुवर्णा राज, दिल्ली की एक अंतराष्ट्रीय पैरा खिलाडी हूँ। मैंने पिछले साल हुए पैरा एशियन गेम्स 2018 में भाग लिए था, जो जकार्ता, इंडोनेशिया में आयोजित हुए थे।

सोमवार दिनांक 10 जून 2019 को दिल्ली सरकार के खिलाफ 100 से ज्यादा खिलाडियों ने दिल्ली सचिवालय पर धरना किया। दिल्ली सरकार के खेल विभाग द्वारा शुरू किए गए मिशन एक्सेलेंस स्कीम जो सिर्फ कुछ दिन के लिए निकाले गए थे, जिसकी वजह से बहुत से पैरा खिलाडी आवेदन नहीं कर सके। जिन्होंने आवेदन किये उनमें से कई खिलाडियों का फॉर्म कैंसिल कर दिया गए। उसके बाद मैंने और कई खिलाडियों ने मुख्यमंत्री एवं उप मुक्यमंत्री को कई पत्र लिखे, परन्तु अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। 

इसके अलावा हमने पिछले वर्ष एशियन पैरा गेम्स 2018 से पहले भी इन दोनों को एक निवेदन किया था, जिसमे मैंने दिल्ली के विकलांग खिलाड़ियों (पैरा एथलीटो) को नौकरियों में कोटा देने और 2018 पैरा एशियाई खेलों में भाग लेने वाले खिलाडियों को हरियाणा सरकार की तर्ज पर 7.5 लाख रूपए देने के लिए अनुरोध किया था परन्तु, उस पर भी कुछ नहीं हुआ।

एशियन गेम्स में भाग लेने वाली लगभग सभी खिलाडियों को इस स्कीम में पैसा मिल चुका है सिर्फ मुझे छोड़कर। जिसकी वजह से आज मेरी ट्रेनिंग बंद है और मेरे दो अंतराष्ट्रीय टूर्नामेंट भी छूट गए हैं और अभी मुझे अगले महीने एक अंतराष्ट्रीय इवेंट जाना है परन्तु पैसो के आभाव में फिर से मैं नहीं जा सकुंगी।

जबकि केजरीवाल सरकार ये दावा करती है की वो आम आदमी के सबसे बड़ी शुभचिंतक है।  विकलांग जन भी हमारे देश का एक प्रमुख वर्ग हैं। यह राज्य का कर्तव्य है कि विकलांग व्यक्तियों सहित अपने सभी नागरिकों को बिना भेदभाव के अनुकूल सुविधाएँ प्रदान करे।

धरने की सुचना मिलते ही कल रात मुझे केजरीवाल जी के ऑफिस से कॉल आया कि मुख्यमंत्री जी आपसे मिलना चाहते हैं आप धरना मत करो और मैं सुबह हमारे डेलीगेशन के साथ वह पहुँच गई, परन्तु मुख्यमंत्री नहीं मिले, उन्होंने अपने एडवाइज़र मोहन गोपाल से मिलवा दिया जिन्हे खेलों और विकलांगता की कोई नॉलेज नहीं थी। उन्होंने कहा हमारे हाथ में कुछ नहीं है सब एल. जी. के हाथ में है। उसके बाद उन्होंने दिल्ली की डिप्टी डायरेक्टर आशा अग्रवाल को बुलाया जिन्होंने हमारी बातो को गंभीरता से नहीं लिया। जिसके बाद हमने धरना करने का फैसला किया और 100 से ज्यादा खिलाडियों ने दिल्ली सचिवालय तक मार्च किया और 3 घंटे तक धरना किया।  दिल्ली के सातों मंत्रियों में से कोई भी सचिवालय में मौजूद नहीं था और न ही मुख्य सचिव। दिल्ली सरकार ने पिछले 4 सालों में विकलांग जनों के लिए कुछ नहीं किया, अपने मेनिफेस्टो में भी झूठ लिखा। भीषण गर्मी के चलते हमने धरना ख़त्म कर दिया 46 डिग्री तापमान था फिर भी केजरीवाल जी को कोई फरक नहीं पड़ा दिल्ली के विकलांग मरें या जिएं।

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