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कैंसर को 6 बार मात देने वाला एक अनोखा व्यक्ति

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ग़ाज़ियाबाद : साल के एन. के. चौधरी ने कैंसर को 1 या 2 बार नहीं बल्कि 6 बार मात देकर यह साबित कर दिया है कि उम्मीद और साहस से किसी भी घातक या जानलेवा बीमारी से जिंदगी जीती जा सकती है।

धरी जी के कैंसर का निदान पहली बार 2005 में हुआ, जिसके बाद 2007, 2010, 2014 के साथ 2018 में 2 बार कैंसर का पता चला। जब तीसरी बार 2010 में उनके कैंसर पता चला, तब उन्होंने वैशाली के मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के रेडिएशन ऑनकोलॉजी के निदेशक, डॉक्टर दिनेश सिंह से बात कर उनकी टीम के अंतर्गत इलाज शुरू करवाया। श्री एन. के. चौधरी रेडियोथेरेपी के लिए 5वीं बार मैक्स, वैशाली पहुंचे।

2005 में पहली बार पता चला कि चौधरी जी को जीभ का कैंसर है, जिसके लिए उन्होंने लेजर ट्रीटमेंट  करवाया और जीवनशैली में कुछ बदलावों के साथ कैंसर पूरी तरह से ठीक हो गया। 2 साल बाद, 2007 में कैंसर ने चौधरी जी की गर्दन को अपना शिकार बना लिया, जिसके लिए उन्होंने नेक डिसेक्शन अपनाया और रेडियोथेरेपी से कैंसर का इलाज किया गया। इलाज के बाद वे 3 साल तक कैंसरमुक्त रहा। हालांकि, 2010 में उनके दाहिने टॉन्सिल में कैंसर हो गया जिसे कॉन्करंट कीमोथेरेपी से ठीक किया गया। इलाज के बाद वे 4 साल तक बिल्कुल स्वस्थ रहे, लेकिन बदकिस्मती से 2014 में दांत की प्लेट के छोर पर कार्सिनोमा का पता चला । इस कैंसर के चलते उन्हें विकरण के साथ सर्जरी करवानी पड़ी और वो फिर एक बार मौत के मुंह से बाहर आ गए। फरवरी, 2018 में उन्हें फिर से कैंसर हो गया। इस बार उनके चेहरे और निचली होठ पर गांठ बन गई जिससे पस निकल रहा था।

डॉ अरुण गोयल ,डायरेक्टर सर्जिकल ऑन्कोलॉजी मैक्स हॉस्पिटल वैशाली ने बताया की सभी चर्चाओं के बाद डॉक्टरों की टीम ने कॉन्करंट केमियोथेरेपी करने का फैसला लिया। ये काफी मुश्किल था क्योंकि मरीज पहले ही कई सर्जरी से गुजर चुका था और 3 बार रेडिएशन करवा चुका था। हालांकि, मजबूत प्लानिंग के साथ डॉक्टरों की टीम ने मरीज को 5वीं बार कैंसरमुक्त कर दिया।

6 महीने बाद उन्हें 6ठी बार फिर से जीभ का कैंसर हो गया। यह मामला और पेचीदा बन गया क्योंकि 5वीं बार रेडियोथेरेपी करते वक्त टिशूज को लेकर बड़ा खतरा था। इस बार ट्यूमर बोर्ड ने कैंसर के इलाज के लिए इंट्राऑपरेटिव ब्रैकीथेरेपी करने का फैसला लिया।

इस मामले की जटिलता और गंभीरता के बारे में बात करते हुए डॉक्टर दिनेश सिंह ने बताया कि मरीज को बेहोशी की हालत में ओटी से ब्रैकीथेरेपी रूम में शिफ्ट किया गया जो रेडियोथेरेपी विभाग के अंतर्गत आता है।सिर्फ इस मरीज के लिए सभी गलियारों को संक्रमण रहित बनाया गया और लिफ्ट और सभी रास्तों को रोगमुक्त करने के लिए सभी मुमकिन कदम उठाए गए। इंट्राऑपरेटिव ब्रैकीथेरेपी को 10जीवाई (ग्रे) की सिंगल सिटिंग की हाई डोज दी गई, जबकि आमतौर पर किसी भी मरीज को केवल 2जीवाई की डोज ही दी जाती है। 5 घंटे की यह पूरी प्रक्रिया सफल साबित हुई और मरीज को सफलतापूर्वक कैंसर से मुक्त किया गया।

डियोथेरेपी के 6 महीने बाद, अब एन.के. चौधरी पूरी तरह से स्वस्थ हैं और अभी तक टिशू के गलने के कोई लक्षण नहीं नजर आएं हैं। उनकी हालिया पीईटी सीटी स्कैन भी किसी तरह की कोई बीमारी या खतरा नहीं दिखा रहा।

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