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मूवी रिव्यू : क्या है, ‘खानदानी शफाखाना’? ‘बात तो करो’

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  • के. कुमार
  • कलाकार : कुलभूषण खरबंदा, नादिरा बब्बर, सोनाक्षी सिन्हा, वरुण शर्मा, बादशाह, अन्नू कपूर आदि।
  • निर्देशक : शिल्पी दासगुप्ता।
  • रेटिंग : 2.5 स्टार।

फिल्म ‘खानदानी शफ़ाखाना’, जी हां सेक्स समस्याओं से जूझ रहे मरीजों का इलाज कर रहे क्लीनिक पर केंद्रित है। आज भी समाज में सेक्स विषय पर खुलकर बातचीत नहीं की जाती, क्योंकि समाज के अधिकतर लोग इसे अपनी परंपरा और संस्कृति के विरूद्ध मानते हैं। निर्देशक मृगदीप सिंह लांबा और निर्देशक शिल्पी दासगुप्ता दोनों ने ‘खानदानी शफाखाना’ फिल्म के माध्यम से सेक्स बोलने वाले लोगों पर कटाक्ष करते हुए यह फिल्म बनाई है। बालीवुड में पहले भी समाज जागरूक विषयों पर फिल्में बनती रही हैं। अब समाज में सेक्स शब्द को नकारने वाले मानसिक पीड़ित लोगों और गुप्त ज्ञान की बातों को आम लोगों तक पहुचाने की ही कहानी है ‘खानदानी शफाखाना’।

आइए जानते हैं, क्या है फिल्म की कहानी? जो शुरू होती है, एक लड़की बेबी बेदी (सोनाक्षी सिन्हा) से। जो अपने परिवार में मां और भाई के साथ रहती है। परिवार में बेबी ही कमाने वाली है, और वह है भी बहुत मेहनती। रोजमर्रा की जद्दोजहद से भरी उसकी दिनचर्या के बीच एक दिन पता चलता है कि उनके मामा हकीम ताराचंद को किसी ने मार दिया है। अब उनकी मृत्यु के बाद डागर नामक वकील (अन्नू कपूर) उनकी प्रोपर्टी (खानदानी शफाखाना) क्लीनाक के बारे में उनको बताता है, कि यह पूरा क्लीनिक आपके मामा जी बेबी बेदी के नाम कर गए हैं, जिसे आपको संभालना है, शर्त यह है कि बेबी आपको 6 महीने तक ‘खानदानी शफाखाना’ चालाना है। 6 महीनों के बाद ही आप किसी को यह प्रोपर्टी बेच सकते हो। लेकिन इससे पहले आपको यह क्लीनिक चलाना है, जिसमें सेक्स से जुड़ी बीमारियों का यूनानी तरीके से इलाज किया जाता है, जिससे कि यहां आने वाले मरीजों को लगातार दवाईयां मिलती रहें और मरीजों को यह न लगे कि ‘खानदानी शफाखाना’ बंद हो गया है। पहले तो बेबी के मन में अपने जीवन संघर्ष के बारे में सोचते हुए उस प्रोपर्टी को बेचने का ख्याल आता है, लेकिन बाद में मामा से जुड़ी यादें उनके साथ बिताया समय और उनके द्वारा समाज में सेक्स से पीड़ित लोगों को ठीक करने के लिए दिया गया योगदान समझ में आता है, और वह आगे के संघर्ष के लिए तैयार हो जाती है। अभी तक सदियों से चला आ रहा है कि आज तक हकीम पुरुष वर्ग में ही देखने को मिले हैं। लेकिन इस फिल्म की कहानी में सोनाक्षी सिन्हा को हकीम के रूप में प्रस्तुत किया गया है, और लड़की हकीम होने के नाते कोई भी सेक्स से जुड़ी समस्या पर बात नहीं करना चाहता। इसी के साथ के अधिकतर दकियानूसी सोच रखने वाला समाज उसके लिए और मुश्किलें खड़ी करता है। बता दें कि विषय बहुत गंभीर है, क्योंकि आज भी हमारे समाज में सेक्स पर खुलकर बात नहीं होती, और न ही उसको हमारी शिक्षा प्राणी के माध्यम से स्कूलों में पढ़ाने की पहल की जाती, लोग सेक्स पर बातचीत करने से कतराते हैं, जो समाज में एक समस्या बन गई है, और इसी समस्या पर प्रकाश डाला गया ‘खानदानी शफाखाना’ फिल्म के माध्यम से, कहानी में और भी बहुत कुछ है, जिसको जानने के लिए देखिए यह फिल्म।

फिल्म के सभी कलाकारों की बात करें तो निर्देशक शिल्पीदास गुप्ता ने हर किरदार को कहानी की जरूरत के हिसाब से पिरोया है, जिसमें दर्शकों को मनोरंजन और कॉमेडी भी भरपूर देखने को मिलेगी। किसी कहानी के जमीनी जुड़ाव के किरदार के रूप में बेबी बेदी के अभिनय में सोनाक्षी सिन्हा ने अपने करियर का अभी तक का बेहतरीन रोल निभाया है। वह पंजाबी लड़की के रूप में सभी को आकर्षित करती हैं। उनकी हाजिर जवाबी और उनका आत्मविश्वास उनको अपने किरदार को निखार कर लाता है। कॉमेडी कलाकर वरुण शर्मा ने भी अपने अभिनय से सबका खूब मनोरंजन किया है, जिनको देखकर दर्शक अपने आपको हंसने से रोक नहीं पाते। बेबी बेदी के रूप में सोनाक्षी और वरुण का भाई-बहन का प्यार खूब जंचता है। बेहद प्रतिभाशाली और शांत कलाकार कुलभूषण खरबंदा मामा के रूप में काफी दिनों बाद फिल्मी पर्दे पर दिखाई दिए हैं, जिनको देखना भी अच्छा लगता है। वहीं गायक रैपर बादशाह ने भी इस फिल्म के माध्यम से अपने अभिनय की एंट्री मारी है। और बात करें सबके पसंदीदा अन्नू कपूर की तो उनको चाहे कोई भी रोल दे दो, वह अपने को उसी क्लेवर-फ्लेवर में फिट कर लेते हैं।

फिल्म की खास बात यह है कि इसके फिल्मांकन में पंजाब के पूरे परिवेश जैसे-गालियों, चौराहों और खेतों को बाखूबी दर्शया गया है, जिसको देखकर आम जीवन की दिनचर्या और वहां की जीने की शैलियों का भी बता चलता है। वहीं ‘खानदानी शफाखाना’ क्लीनीक का पटियाला के बाजार में होना इतिहास के छुप्पे पन्नों पर नजर डालता है।

तो दर्शक अकेले या फैमेली के साठ इस वीकेंड कुछ अलग देखना चाहते हैं, तो उनके लिए ‘खानदानी शफाखाना’ ही सबसे बेहतर फिल्म होगी। चाहे वह पहले सुपर-सुपर एक्शन से भरपूर ‘फास्ट एंड फ्यूरियस-9’ को भी देख सकते हैं। लेकिन उसके बाद यह फिल्म जरूर देखें।

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