Home खबरें रक्षा बंधन में भारतीय संस्कृति और परंपराओं की विविधता साफ झलकती है

रक्षा बंधन में भारतीय संस्कृति और परंपराओं की विविधता साफ झलकती है

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शिवाजी के प्रिय श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन होने वाले इस पावन त्योहार में इस बार भद्रा सूर्योदय से पूर्व ही समाप्त हो जाएगी। इसलिए बहनें निश्चिंत होकर अपने भाइयों को राखी बांध सकती हैं। सनातन धर्म की यह विशेषता रही है कि हर पारिवारिक संबंध के लिए त्योहार मनाने का विधान है। रक्षा-सूत्रा भाई को अपनी बहन की बराबर याद दिलाता रहता है। यह पर्व महाराज दशरथ के हाथों अपने माता-पिता के साथ तीर्थयात्रा कर रहे श्रवण कुमार की मृत्यु से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए इन दिन रक्षा-सूत्रा सर्वप्रथम गणेश जी को बांधने के बाद श्रवण कुमार को ही अर्पण किया जाता है। रक्षासूत्रा में सरसों, केसर, चंदन, अक्षत और दूब जरूर बांधना चाहिए। रक्षा-सूत्रा की पूजा जरूर करनी चाहिए।

रक्षा-सूत्रा बांधते समय इस मंत्रा का वाचन करें-‘येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।’ राखी दाहिनी कलाई पर ही बांधनी चाहिए। संभव हो तो रक्षा-सूत्रा के बांधने तक भाई और बहन दोनों उपवास रखें। बहन भाई मिठाई खिलाती है, आशीर्वाद देती है, तो भाई अपनी बहन की सुरक्षा और खुशहाली के लिए वचनबद्ध हो जाता है। बहन को कपड़े और धन आदि प्रदान करता है।

अगर आप अपने शत्राओं से परेशान हैं तो इस दिन वरुण देवता की पूजा करें। वरुण वरुण देवता की पूजा आपके शत्राओं का नाश कर देगी। आज के दिन ही भगवान विष्णु ने देवताओं की प्रार्थना पर वामन अवतार लेकर राजा बलि को स्वर्गलोक से वंचित किया था। महाराष्ट्र में नारियल पूर्णिमा या श्रावणी के दिन लोग नदी से समुद्र के तट पर जाकर अपने जनेऊ बदल लेते हैं। इसके अलावा लोग लक्ष्मी के पिता समुद्र देव की पूजा भी करते हैं। धर्मशास्त्रों के अनुसार 12 वर्ष तक चले देव-दानव युद्ध में देवराज इंद्र जब दानवों से हारने लगे, तब उनकी पत्नी इंद्राणी ने रक्षा-सूत्रा बांधकर उन्हें विजयी बनाया था। प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों के उपदेश की पूर्णाहुति इसी दिन होती थी। वे अपने पास आए राजाओं के हाथों में रक्षा-सूत्रा बांध कर उन्हें समस्त प्रजा की रक्षा करने का संकल्प कराते थे। इसी को ध्यान में रखकर बहुत से लोग आज भी अपने कुल ब्राह्मणों से रक्षा बंधवाते हैं।

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