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फिल्म रिव्यू : ‘मिशन मंगल’ विज्ञान की शक्ति का प्रतीक

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के. कुमार

  • फिल्म : मिशन मंगल।
  • निर्देशक : जगन शक्ति।
  • कलाकार : अक्षय कुमार, विद्या बालन, तापसी पन्नू, सोनाक्षी सिन्हा, कीर्ति कुल्हारी, शरमन जोशी।
  • सटार : 3 स्टार।

गर्व की बात है कि भारत के इसरो, अतंरिक्ष केंद्र ने विश्व के प्रथम देश और अपने पहले ही प्रयास मंगलग्रह की ऑर्बिट में पीएसएलवी यान भेजकर वहां की तस्वीरें और सूचनाएं एकत्र करने का जो कार्य किया है, वह विज्ञान के सटीक गुणांक और वैज्ञानिक तकनीक का ही कमाल है। यह मिशन आज पूरे विश्व के लिए गौरव की बात है। इसरो द्वारा मंगल पर अपना यान भेजने की इसी खोज को लेकर निर्देशक जगन शक्ति द्वारा बनाई गई फिल्म ‘मंगल मिशन’ को एक बार देखने का अवसर तो हर किसी को उठाना चाहिए।

इसरो केंद्र में अंतरिक्ष वैज्ञानिक राकेश धवन (अक्षय कुमार) के नेतृत्व में ‘फैटबॉय’ नामक अंतरिक्ष मिशन के तहत एक राकेट को लांच किया जाता है, लेकिन वह किसी गड़बड़ी के चलते अपने प्रथम लांच पर ही असफल हो जाता है। इसके लिए राकेश धवन को वहां के अधिकारी जिम्मेदार ठहराते हैं, लेकिन इसरो में काम करने वाली तारा शिंदे (विद्या बालन) इस असफलता के लिए खुद अपने आपको जिम्मेदार ठहराती हैं। इस असफलता को भूल जाने को लेकर अधिकारी राकेश धवन को ‘मार्स मिशन’ का हेड बनाकर उस पर काम करने को कहते हैं।

मार्स मिशन में राकेश के साथ तारा शिंदे के अलावा और कोई उनकी टीम नहीं है, अब मार्स मिशन का यह काम बेहद चुनौतीपूर्ण है। तारा शिंदे मार्स मिशन को लेकर बहुत सीरियस होती हैं, और सोचती हैं, यह मिशन कैसे सफल हो। एक दिन वह किचन में पूरियां तलने वाले विचार से प्रभावित होकर उसके विचार को मार्स मिशन से जोड़कर देखती हैं और राकेश धवन को बताती हैं, राकेश धवन को यह आईडिया पसंद आता है, और वे इस आईडिये को अन्य बड़े अधिकारियों के साथ प्रदर्शित करते हैं, उनका यह आईडिया स्वीकार कर लिया जाता है। लेकिन अब समस्या यह है कि पूरे मिशन का बजट 800 करोड़ होता है, जो सरकार द्वारा पास नहीं होता, लेकिन राकेश धवन के समझाने के बाद वह 400 करोड़ पर आ जाता है।

अब बात आती है, मार्स मिशन के लिए सीनियर टीम की कहां, से आएं। वहीं नासा से लौटे भारतीय वैज्ञानिक रूपर्ट देसाई (दिलीप ताहिल) जो धवन के इस मिशर से खुश नहीं हैं। जिसके चलते वह उनकी टीम में सीनियर लोगों की जगह जूनियर सदस्य को शामिल कर देते हैं, जिसमें एका गांधी (सोनाक्षी सिन्हा), कृतिका अग्रवाल (तापसी पन्नू), वर्षा पिल्लई (नित्या मेनन), नेहा सिद्दीकी (कीर्ति कुल्हारी) , परमेशवर नायडू (शरमन जोशी) के साथ रिटार्यड अनंत अय्यर (एचजी दत्तात्रेय) टीम के सदस्य के रूप में आते हैं। अब सवाल यह उठता है कि यह पूरी टीम मंगलयान बनाने में कितना सफल हो पाती है या नहीं, किसी तरह ये सब विभिन्न चुनौतियों के बावजूद अपने मंगल मिशन को अंजाम दे पाते हैं, या नहीं, यही कहानी है इस पूरे मंगल मिशन की।

फिल्म की कहानी की रोचकता और कलाकारों के अभिनय की बात करें तो, फिल्म में अक्षय संग नारी शक्ति का जूनन देखने को मिलता है, जिनके बिना दुनिया का हर मिशन अधूरा है। जैसे आजाद ख्याल तारा शिंदे जो अपने काम के प्रति समर्पित हैं, लेकिन अपने पति संजय कपूर की हर पाबंदी और दकियानुसी विचारों के साथ ही अपने आजाद ख्याल बच्चों के साथ घर की हर जिम्मेदारी को उठाती है। वहीं अक्षय कुमार अपने कॉमिक अंदाज में सबको खुश कर देते हैं, उनको देखकर ऐसा लगता है, कि लाईफ में कोई भी समस्या हो वह संयम और आत्मविश्वास से दूर हो जाती है। कहानी में अन्य कलाकारों की भूमिका में खूबसूरत तीन अभिनेत्रियां, तापसी पन्नू, कीर्ति कुल्हारी, नित्या मेनन भी अपने अभिनय से आकर्षित कर जाती हैं। इसी के साथ दो विचारधारा के दो पक्षों में सरमन जोशी अंधविश्वासी व्यक्ति के रूप में दिखते हैं, तो सोनाक्षी सिन्हा मार्डन और आजाद ख्याल लड़की के रूप में लुभाती हैं।

मार्स मिशन कुल मिलाकर इसरो द्वारा किए गए इस मिशन की वास्तविकता को मनोरंजन और मसाले के साथ दिखते तो हैं, लेकिन उतना नहीं जितना समर्पण मार्स मिशन (मॉम) के असली वैज्ञानिकों ने किया। फिल्म का संगीत अच्छा है। वहीं फिल्म के दृश्यों में सेटेलाईट लांच के दृश्य और अंतरिक्ष में यान का पहुंचना भी वैज्ञानिक तकनीक और विज्ञान की सटीक क्षमता का सशक्त उदाहरण है।

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