Home खबरें फिल्म रिव्यू : ‘बाटला हाउस’ के सच को जानने के लिए देखें फिल्म ‘बाटला हाउस’

फिल्म रिव्यू : ‘बाटला हाउस’ के सच को जानने के लिए देखें फिल्म ‘बाटला हाउस’

0 second read
0
3
35

के. कुमार

  • फिल्म : बाटला हाउस।
  • निर्देशक : निखिल आडवाणी।
  • कलाकार : जॉन अब्राहम, मृणाल ठाकुर, रवि किशन, मनीष चौधरी, राजेश शर्मा, नोरा फतेही।
  • रेटिंग : 3 स्टार।

आज से 11 वर्ष पूर्व सन् 2008 में दिल्ली के जामियानगर इलाके के बाटला हाउस में दिल्ली पुलिस द्वारा एक एनकाउंटर हुआ था, जो काफी चर्चा का विषय रहा था। इस एनकाउंटर में दिल्ली की स्पेशल सेल ने दो आंतकियों को मारा गिराया था। वहीं इस ऑपरेशन को लीड करने वाले दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा भी मारे गए थे। इसी एनकाउंटर को लेकर फिल्म ‘बाटला हाउस’ दर्शकों के लिए लेकर आए हैं निर्देशक निखिल आडवाणी। वे पूरी तरह से बाटाला हाउस एनकाउंटर की सच्चाई को फिल्मी पर्दे पर उतारने में सफल रहे हैं।

क्या था बाटाला हाउस एनकाउंटर? जानिए इसकी कहानी इस फिल्म की जुबानी। दिल्ली पुलिस द्वारा सीरियल बम धमकों की जांच कर रहे अधिकारियों को एक सूचना मिलती है कि बाटला हाउस के एक मकान के फ्लोर पर आईएम के कुछ आतंकी छिपे हैं, जो वहां मिलकर आतंकी गतिविधियों को अंजाम देते हैं।

उन्हीं आतंकियों को पकड़ने के लिए दिल्ली पुलिस के एसीपी संजय (जॉन अब्राहम) अपनी टीम को बाटाला हाउस में जाने को निर्देश देते हैं, उनकी टीम के एक इंस्पेक्टर के.के. वर्मा (रवि किशन) अपनी टीम के कुछ सदस्यों को लेकर मकान के अंदर जाते हैं, लेकिन तभी आतंकी गोलिया चला देते हैं, और पुलिस द्वारा चलाई गई जवाबी फायरिंग में दो आतंकियों को मार दिया जाता है। उनमें से एक आतंकी तुफैल (आलोक पांडेय) को पकड़ लिया जाता है, और दो आतंकी दिलशाद (शहीदुर रहमान) और आदिल (क्रांति प्रकाश झा) वहां से भीड़ के साथ भाग जाते हैं। आतंकियों के इस एनकाउंटर से पूरे पुलिस महकमे में हलचल मच जाती है। क्योंकि पुलिस पर फर्जी एनकाउंटर का आरोप लग जाता है, जिसकी सीबीआई जांच की मांग की जाती है। लेकिन एसीपी संजय कुमार अपनी पूरी टीम को संयमित रहने को कहते हैं। एसीपी संजय कुमार और उनकी टीम के खिलाफ टीवी और मीडिया में खूब खबरें चलती हैं। संजय कुमार की पत्नी नंदिता (मृणाल ठाकुर) भी पहले इस एनकाउंटर की सच्चाई नहीं जान पाती, लेकिन बाद में वे पूरे सच से वाकिफ हो जाती है। संजय को अपने वरिष्ठ ऑफिसर (मनीष चौधरी) का भी पूरा साथ मिलता है।

फिल्म की कहानी को लेखक रितेश शाह और निर्देशक निखिल आडवाणी ने जबरदस्त तरीके से फिल्मी पर्दे पर उतारा है। बाटाला हाउस की सच्चाई के फिल्मांकन को जिस ढंग से प्रस्तुत किया गया है, वह बिल्कुल भी नहीं झूठा नहीं लगता। बाटाला हाउस देखकर दर्शक यह नहीं कह सकते कि दिल्ली पुलिस द्वारा बाटाला हाउस का एनकाउंटर फर्जी था, जिसे लोग कह रहे थे कि यह फर्जी एनकाउंटर है।

अभिनेता जॉन अब्राहम के करियर की अब तक की यह सबसे शानदार फिल्म है, खासकर उनका एसीपी संजय कुमार के रूप में वे एकदम खरे उतरे हैं, उनके चेहरे की हर स्थिति के अलग अलग भाव देखते ही बनते हैं, खासकर उनका एक आतंकी को पकड़ने के लिए यूपी के निजामपुर जाने का जो अदांज और निडरता भरे एक्शन दिखाए गए हैं, वे रोमांचित करते हैं। उनके द्वारा बोला गया एक डॉयलॉग भी दिल को छूता है कि ‘‘आतंकवादियों से भिड़ने के जितने पैसे हमें मिलते हैं, उतने पैसे तो ट्रैफिक पुलिस का सिपाही एक दिन में कमा सकता है।’’ वहीं फिल्म की शुरुआत में अभिनेता रवि किशन की भूमिका छोटी होने के बावजूद वह असरदार लगती है। एसीपी संजय कुमार की पत्रकार पत्नी नंदिता, मृणाल ठाकुर भी अपने अभिनय में जंचती हैं। अभिनेत्री नूरा फतेही का आईटम सॉग भी खूब रंग-बिरंगा लगता है।

यदि दर्शकों ने यह फिल्म 15 अगस्त और रक्षा बंधन के अवसर पर नहीं देखी है, तो अब किसी भी दिन प्लान बनाकर या वीकेंड पर अकेले या परिवार के साथ जाकर दिल्ली के सबसे चर्चित ‘बाटला हाउस’ एनकाउंटर की सच्चाई जानने के लिए इस फिल्म को देखने जरूर जाएं।

Load More Related Articles
Load More By admin
Load More In खबरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

अफगानिस्तानी दूतावास के साथ फैशन, फूड और कल्चर को बढ़ाने के लिए सीडी फाउंडेशन ने किया कॉफी मार्निंग का आयोजन

‘अफगानिस्तान के राजदूत ताहिर कादरी ने की शिरकत’। ‘अफगानिस्तान के आजादी के सौ स…