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फिल्म रिव्यू : प्रभास उर्फ साहू का जलवा

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के. कुमार

  • फिल्म : साहो।
  • निर्देशक और लेखक : सुजीत।
  • कलाकार : प्रभास, श्रद्धा कपूर, नील नीतिन मुकेश, जैकी श्राफ, चंकी पांडे, मंदिरा बेदी, मुरली शर्मा।
  • रेटिंग : 3 स्टार।

प्रभास का नाम आते ही बाहुबली फिल्म की कल्पना हमारे मस्तिष्क में आने लगती है, और हमारे सामने प्रभास की छवि दिखने लगती है। बहुत दिनों से दर्शक इतंजार कर रहे थे कि प्रभास की कोई दमदार और धमाकेदार फिल्म नहीं आ रही है, तो दर्शकों का इतंजार अब खत्म हुआ, अब प्रभास की वही छवि, लेकिन एक्शन और स्पेशल इफेक्ट्स से भरी आधुनिक छवि दर्शकों को देखने को मिलेगी फिल्म ‘साहू’ में। जाहिर सी बात है फिल्म का बजट भी 300 करोड़ है, तो दर्शकों में उत्सुकता है कि ऐसा क्या कि निर्देशक सुजीत ने इस फिल्म में दर्शकों के मनोरंजन के लिए 300 करोड़ खर्च कर दिए।

कहानी कुछ यूं हैं कि रोशनी की चकाचैंध से भरपूर शहर है वाजी, गगनचुंबी इमारतों से भरा, जहां अंतर्राष्ट्रीय स्तर के अपराधी के कुछ गैंग हैं, उन्हीं गैंग में से एक का हेड है राॅय (जैकी श्राॅफ)। लेकिन राॅय से पहले ‘वाजी’ शहर में पृथ्वीराज (टीनू आनंद) का राज था। पृथ्वीराज राज अपने बेटे देवराज (चंकी पांडे) को अपनी कुर्सी पर दे देता है, लेकिन देवराज इस बात से नाराज हो जाता है और अपने पिता का अपाहिज कर देते है। अब राॅय यह अपराधिक धंधों को छोड़ जनहित के लिए काम की शुरुआत करता है। लेकिन मुंबई जाने के दौरान देवराज राॅय का एक्सीडेंट करवा देता है, जहां राॅय की मौत हो जाती है। राॅय अपने पीछे लाखों-करोड़ों की संपत्ति को छोड़ जाता है। मुंबई पुलिस को पता चलता है कि मुंबई में बैंकों से हजारों करोड़ की चोरियां हो रही हैं, और उसमें कोई बड़ा गैंग लिप्त है, जिनका कुछ पता नहीं चल रहा। तो वह इनवेस्टिगेशन के लिए सीनियर अंडरकवर आॅफिसर अशोक चक्रवर्ती (प्रभास) को यह काम सौंपते हैं, जिनके साथ हैकर डेविड (मुरली शर्मा) और एक इंस्पेक्टर गोस्वामी व क्राइम ब्रांच की आॅफिसर अमृता नायर (श्ऱद्धा कपूर) शामिल हैं। राॅय की मौत के बाद देवराज राॅय की कुर्सी पर कब्जा करना चाहता था, इसमें उसका दोस्त प्रिंस (महेश मांजरेकर) उसका साथ देता है, लेकिन उसके करीबी साथी का बेटा (अरुण विजय) राॅय का बेटा बन जाता है, जो राॅय की लाखों-करोड़ों के खजाने पर कब्जा करने के लिए षड्यंत्र रचता है और उस खजाने को पाने के लिए एक आधुनिक चाबी ‘ब्लैक’ की कहानी रचता है। आगे क्या-क्या ट्विस्ट और टर्नस आते हैं, इसके लिए देख आइए ‘साहो’।

दर्शक जब फिल्म को देखना शुरू करते हैं, तो वे उसमें इतना डूब जाते हैं, और बेसब्री से इतंजार करते हैं कि अब क्या होने वाला है, क्योंकि कहानी इतनी अनसुलझी है कि पता ही नहीं चलता कि क्या हो रहा है, पहला हाॅफ थोड़ा लंबा है, जो पता ही नहीं चलता, साथ ही कहानी में तड़का लगाने लिए डाले गए गाने, जिनकी कोई खास जरूरत नहीं थी।

अगर फिल्म दर्शकों का आकर्षित करती है, तो वह शहरों की चमकदम और उसकी भव्यता को। वहीं दृश्यों के फिल्मांकन भी खूबसूरत और जबर्दस्त है। फिल्म में एक्शन और स्पेशल इफेक्ट्स के तो क्या कहने और उसके साथ बैकग्रांड साउंड ऐसे हैं कि हाॅल में आप जिस कुर्सी पर बैठे हैं उसमें भी कंपन होने लगती है। हाॅलीवुड फिल्मों की तरह ही ‘साहू’ के एक्शन देखकर ‘फास्ट एंड फ्यूरियस’ की याद आने लगती है। अंत में बाहुबली की तरह साहू की कहानी में भी प्रभास को लड़ाई में बैकअप देने के लिए उसकी सेना वाली टीम आ जाती है।

फिल्म की कहानी के दो केंद्र हैं प्रभास और श्रद्धा कपूर और दोनों को देखने में आनंद और प्रसन्न्ता होती है। लेकिन प्रभास का दक्षिण भारतीय होना उनके द्वारा डाॅयलग डिलिवरी में थोड़ा असहज लगता है। वहीं श्रद्धा का ग्लैमरस से भरा किरदार भी दर्शकों को पसंद आएगा। देवराज के रूप में चंकी पांडे ने खलनायक का अच्छा किरदार निभाया है। अभिनेता मुरली शर्मा भी काॅरर्डिनेट करने में सफल रहे हैं। वहीं जिस तरफ जैकी श्राफ की भूमिका छोटी है तो मंदिरा बेदी भी कुछ आकर्षक छाप नहीं छोड़ पातीं।

दर्शक यदि इस वीकेंड तीन दिनों की छुट्टियों के दौरान कुछ मसालेदार, धमाकेदार, एक्शन से भरपूर और खासकर प्रभास के दीवाने उनकी फिल्म साहू के देखने के दीवाने हैं, तो बिना सोचे समझे यार-दोस्तों और परिवार के साथ जा सकते हैं, मजा जरूर आएगा।

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