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इतिहास से जुड़ी अनेकों ऐतिहासिक धरोहर को देख सकेंगें पुराने किले में

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नई दिल्ली : यूं तो दिल्ली एतिहासिक शहर है, दिल्ली ने इतिहास को अपने में गहरे तक संजोएं रखा है। यही वजह है कि इतिहास और दिल्ली की अनेकों खूबियों की वजह से देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों यहां 12 महीने पूरे साल लगा रहता है। अब दिल्ली के पुराने किले में बहार से आने वाले पर्यटक यहां दुर्लभ पुरातात्विक धरोहरों को देख सकेंगें। अभी हाल ही में केंद्रीय पर्यटन मंत्री प्रहलाद पटेल ने पुराने किले में एक अधिग्रहित एवं प्रत्यर्पित पुरावशेष संग्रहालय का उद्घाटन किया है।

संग्रहालय की खासियत यह है कि इसमें दर्शकों को धातु की मूर्तियां, सिक्के, चित्रकारी, हाथी दांत, तांबे से बनी कलाकृतियों सहित कई चीजें देखने को मिलेंगीं। यही नहीं यहां प्राचीनकालीन मूर्तियां भी शामिल की गई हैं, जो काफी पहले चोरी हो गई थीं, उनको विदेश से वापस लाया गया है। इनमें चोल काल की पार्वती और श्रीदेवी की मूर्ति भी शामिल हैं। बता दें कि 2016 में श्रीदेवी की मूर्ति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यूयाॅर्क दौरे के वक्त वापस लाया गया था।

सन् 1999 में मेट्रोपाॅलिटन म्यूजियम आॅफ आर्ट द्वारा वापस दी गई सथानक बुद्ध की मूर्ति, सन् 2005 में केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा अधिग्रहित ग्र्रेनाइट से निर्मित चार भुजा वाली नटराज की प्रतिमा है, जो 10वीं सदी की है। इसका वनज 350 किलाग्राम है। वहीं गुजरात के पाटन से सन् 2001 में चोरी हुई 12वीं सदी की ब्रह्मा और ब्रह्माणी की मूर्ति जिसे 15 साल बाद लंदन से लाया गया है। सन् 12वीं सदी की यह मूर्ति ब्रह्मा और ब्रह्माणी की है। इसके अलावा 10वीं सदी की महिषासुरमर्दिनि की प्रतिमा और भगवान विष्णु की प्रतिमा भी पर्यटक यहां देख सकेंगें। वहीं दूसरी ओर हुमायूं मकबरे के परिसर में स्थित नीला गुबंद भी पर्यटकों के लिए खोला गया है।

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