Home खबरें अजय जोशी को मिला अशोक सिंघल वैदिक शिक्षा पुरस्कार

अजय जोशी को मिला अशोक सिंघल वैदिक शिक्षा पुरस्कार

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नई दिल्ली : विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतर्राष्ट्रीय  अध्यक्ष और हिंदुत्व के प्रखर पुरोधा अशोकजी सिंघल की याद में सिंघल फाउण्डेशन  की ओर से भारतात्मा अशोक सिंघल वैदिक पुरस्कार के तीसरे संस्करण का आयोजन लोधी एस्टेट स्थित चिन्मय मिशन ऑडिटोरियम में किया गया। हिंदू ह्दय सम्राट अशोक सिंघल की याद में वैदिक शिक्षा के क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन करने वाले छात्र, शिक्षक और वैदिक स्कूल को सम्मानित किया गया और उन्हें लाखों के पुरस्कार भी प्रदान किए गए। वैदिक शिक्षा के प्रचार और प्रोत्साहन के लिए सिंघल फाउण्डेशन की ओर से “भारतात्मा अशोक सिंघल वैदिक पुरस्कार” के लिए सर्वश्रेष्ठ छात्र के रूप में तेलंगाना के रहने वाले श्री अजय जोशी का चुनाव किया गया, जिन्हें 3 लाख रुपये की राशि प्रदान की गई। वे ऋगवेद के विद्यार्थी है द्य वहीं सर्वश्रेष्ठ शिक्षक का पुरस्कार श्री गगन कुमार चटोपाध्याय जी को दिया गया जो कलकत्ता के निवासी है, जिन्हें पुरस्कार राशि के तौर पर 5 लाख रुपये प्रदान किए गए। आचार्य श्री गगन कुमार चटोपाध्याय सामवेद के विद्वान है।

सर्वश्रेष्ठ वैदिक स्कूल के रूप में राजस्थान के भीलवाड़ा स्थित मुनिकुल ब्रह्मचर्य वेद संस्थान का चयन किया गया, संस्थान को सिंघल फाउण्डेशन की ओर से सात लाख रुपये की राशि प्रदान की गई। ये राजस्थान के छोटे से गांव में 139 साल पहले की गई थी। समारोह में स्वामी तेजोमयानंद ने विजेताओं को पुरस्कारों का वितरण किया। पुरस्कार समारोह में विशिष्ट वेदार्पित जीवन पुरस्कार (वेदों के लिए लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार) आर आर वेंकटरमन जी को दिया गया।

समारोह के मुख्य और सम्मानित अतिथि परम पूज्य स्वामी तेजोमयानंद जी ने कहा कि वेद को धर्म की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए। यह धर्म से बहुत ऊपर है। वेदों से ही भारत की भारतीयता है। वेदों के अध्ययन से आत्मज्ञान,  ब्रह्माज्ञान  , जीवन ज्ञान और सर्व विज्ञान का अध्ययन हो जाता है। देश में वेद आधारित शिक्षा प्रणाली लागू होनी चाहिए। गौरतलब है कि आध्यात्मिकता के क्षेत्र में 2016 में स्वामी तेजोमयानंद को पद्मभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। सिंघल फाउण्डेशन के ट्रस्टी सलिल सिंघल ने कहा, “श्रद्धेय अशोक जी सिंघल हिंदुत्व के अग्रणी जननायक थे। उन्हें वेदों के पठन-पाठन में गहरी रुचि थी। वह वेदों के संपूर्ण ज्ञाता थे। उनके प्रयास से देश में कई वैदिक विद्यालयों की स्थापना की गई। वेदों के प्रति उनके लगाव को देखते हुए फाउंडेशन ने उनकी याद में वैदिक पुरस्कार देने का फैसला किया।”

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