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फिल्म रिव्यू : ड्रीमगर्ल, कभी करम तो कभी पूजा

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के. कुमार

  • कलाकार : आयुष्मान खुराना, अन्नू कपूर, नुसरत भरूचा, विजय राज, अभिषेक बनर्जी, निधि बिष्ट, राजेश शर्मा।
  • निर्देशक : राज शांडिल्य।
  • निर्माता : एकता कपूर, शोभा कपूर।
  • रेटिंग : 3.5 सटार।

बॉलीवुड फिल्मों में युवाओं की कहानी के साथ जुड़ी होती है, एक प्रेमकहानी, जी हां हाल ही में रिलीज हुई बॉलीवुड फिल्म ‘ड्रीमगर्ल’ में भी आपको एक युवा आयुष्मान खुराना और उनकी ड्रीमगर्ल नुसरत भरुचा की कहानी देखने को मिलेगी। ‘विक्की डोनर’, बरेली की बर्फी’, ‘अंधाधुन’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अपने अभिनय को बाखूबी साबित किया है। इसीलिए उन पर केंद्रित फिल्म सिर्फ और सिर्फ उनके किरदार पर टिकी होती है, जिसमें में आयुष्मान एकदम सफल होते हैं, शायद वे लीक से हटकर ही ऐसी कहानी चुनते हैं, जो पारिवारिक जीवन और सामाजिक जीवन के विषयों को दर्शाती हैं। अब ‘ड्रीमगर्ल’ में आयुष्मान ने यह साबित कर दिया है कि उनको कोई भी किरदार दे दो, वे उसको अपने अंदर उतार कर ही रहते हैं।

कहानी यह है कि करम (आयुष्मान खुराना) बेरोजगार है, लेकिन उसकी आवाज में महिला स्वर का जादू है, जिसके चलते वह मोहल्ले में होने वाले नाटकों और रामलीलाओं में सीता और महिलाओं का किरदार निभाता है। करक की अपने दोस्त स्माईली (मनजोत सिंह) से यारी पक्की है। करम के पिता जगतीत सिंह (अन्नू कपूर) की अंतिम क्रिया के सामान की दुकान है और वे हमेशा करम को नौकरी करने के ताने देता रहता है। करम परेशान होकर नौकरी की तालाश में जा पहुंचता है, जहां एक फोन फ्रेंड कॉल सेंटर में, जिसका मालिक छोटू (राजेश शर्मा) से काफी मिन्नतों के बाद करम द्वारा लड़की की आवाज में बोलने के चलते उसको नौकरी पर रख लेता है और करम ‘पूजा’ बन वहां नौकरी करने लगता है। इसी बीच करम के जीवन में माही (नुसरत भरुचा) की एंट्री होती है, और शुरू होता है उनका प्रेम। लेकिन करम जब कॉल सेंटर में जॉब करने लगता है तो फिर क्या होता है, उस कॉल सेंटर के ग्राहकों को पूजा की आवाज इतनी पसंद आती है कि वे उसकी आवाज के दिवाने हो जाते हैं, और पूजा के प्यार में अपने जीवन के सपने बुनने लगते हैं। कॉल सेंटर के उन्ही ग्राहकों में हरियाणा पुलिस में काम करने वाला राजपाल (विजय राज), महेंद्र (अभिषेक बनर्जी), टोटो (राज भंसाली), रोमा (निधि बिष्ट) और खुद करम का पिता अन्नू कपूर ये सब पूजा की आवाज के कायल हो जाते हैं, और हर कोई पूजा से शादी करने के सपने संजोने लगता है। फिल्म की पूरी कहानी इन्हीं लोगों के अभिनय और संवादों पर केंद्रित है, तो ऐसे में पूजा उर्फ करम को किन-किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है और कैसे वह इनसे पीछा छुड़ाने में सफल होता है? यही पूरी कहानी में देखने लायक है।

ड्रीमगर्ल की कहानी को निर्देशक राज शांडिल्य ने बेहद खूबसूरत ढंग से मथुरा की वादियों और वहां से प्रेम करने वाले लोगों के लिए प्रस्तुत किया है। फिल्म की कहानी में एक के बाद एक संवादों को सुनने में आनंद आता रहता है। उन्होंने पूरी तरह कोशिश की है कि फिल्म देखने वाले दर्शकों को कहानी में पूरा मजा आए, इसीलिए वे इसको प्रस्तुत करने में सफल भी रहे हैं। राज ने कहानी को विद्या वालन की फिल्म तुम्हारी सुल्लू की तर्ज पर ही ड्रीमगर्ल का कन्सेप्ट निकाला है, इसके लिए उन्होंने आयुष्मान खुराना को पूजा का किरदार देकर उनके अभिनय को और निखार दिया है, और आयुष्मान ने भी करम और पूजा के किरदार को बैलंस करते हुए बाखूबी प्रस्तुत किया है।

बात अगर सबके अभिनय कि की जाए तो, जब दर्शक इसको देखेंगें, तो जीवन के परिवेश, भाषा और भेषभूशा से सहज ही अपना जुड़ाव महसूस करने लगते हैं। आज दर्शक गैलमर और चमक-दमक से परे छोटे शहर की कहानी को देखकर ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। ड्रीमगर्ल में आयुष्मान का किरदार भी एकदम सराहनीय है। पूरी फिल्म में कलाकारों के साथ-सथ दृश्यों और संवादों का ही पूरा आकर्षण है। आयुष्मान के बाद अन्नू कपूर भी जब अपने रोल में आते हैं, तो दर्शक अपनी हंसी को रोक नहीं पाते। अन्नू का पहले मथुरा का जगजीत और बाद में मुसलिम मियां बनने का अभिनय भी गजब का है। वहीं अभिनेत्री नुसरत भरुचा का किरदार ज्यादा असरदार नहीं है, सिर्फ उनको प्रेम कहानी के लिए करम की प्रेमिका के लिए ही लाया गया है। साथ-साथ अन्य कलाकारों में विजय राज का हरियाणवी पुलसिया शायर का किरदार भी दर्शकों को खूब आकर्षित करता है। बाकी राजेश शर्मा, अभिषेक बनर्जी, निधि बिष्ट, मनोजत सिंह, राज भंसाली सभी कलाकार भी दर्शकों को लुभाने में पूरी तरह कामयाब रहे हैं।

दृश्यों और संवादों के साथ ही फिल्म के गाने और संगीत भी अच्छे हैं। गाना ‘राधे राधे’ एकदम रंगों से भरपूर है। तो अब कहना कुछ ज्यादा नहीं है, यह एक अलग तरह की फिल्म है, जिसमें अंत में यह संदेश दिया गया है कि आजकल की भागदौड़ और व्यस्त जीवन शैली में युवाओं के लिए अपने परिवारों और रिश्तेदारों के साथ-साथ अपने लिए भी समय नहीं है, जिसके चलते वह अपने को अकेला महसूस करते हैं, और अपनी खामोशी और अकेलेपन को दूर करने के लिए दूसरे को ढूंढ़ते हैं। तो ऐसे में फिल्म की कहानी से कुछ सीख तो जरूर मिलते है, लेकिन मनोरंजन भी भरपूर मिलता है। अब देर ना करें, फिल्मों के चाहने वाले प्रेमी जाकर अगले दो दिनों की छुट्टियों में अपने सपनों की ‘ड्रीमगर्ल’ को भी देख आएं।

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