Home खबरें ‘तान्हाजी : द अनसंग वारियर’ मराठों की वीरता की कहानी

‘तान्हाजी : द अनसंग वारियर’ मराठों की वीरता की कहानी

3 second read
0
1
71

के. कुमार

  • फिल्म : ‘तान्हाजी : दा अनसंग वारियर’
  • कलाकार : अजय देवगन, सैफ अली खान, काजोल, शरद केलकर, नेहा शर्मा।
  • निर्देशक : ओम राउत।
  • रेटिंग : 3.5

बाॅलीवुड धन्य है, जो कई सौ सालों के इतिहास में घटित घटनाओं और खासकर उन वीरों की गाथाओं को जिन्होंने अपने भारत की मातृभूमि पर अपने प्राण न्यौछावर कर अपने देश का स्वाभिमान बनाए रखा। बाॅलीवुड की ऐतिहासिक फिल्मों में पद्मावत, मणिकर्णिका, बाजीराव-मस्तानी, जोधा-अकबर, केसरी, पानीपत जैसी इतिहास के पन्नों में दर्ज शूरवीरों की कहानी दिखाती है। इतिहास में मराठों की शूरवीरता को हमेशा याद किया जाता है, जी हां मराठों की वीरातों को दर्शाती फिल्म ‘तानाजी’ भी इतिहास के उन अमूल्य वीरों की गाथा को दर्शाती है, जिन्होंने हिंदुस्तान और अपने गौरव के लिए अपने प्राण त्याग दिए। निर्देशक ओम राउत द्वारा निर्देशित ‘तानाजी द अनसंग वारियर’ आपकी देशभक्ति और अंदर के जोश को जीवित कर देती है। जाहिर सी बात है, उन्होंने इस फिल्म के माध्यम से मराठों की शूरवीरता का बेहद भव्य अंदाज में दर्शाया है, और वो भी 3डी इफेक्ट्स और ग्राफिस के जरिए, जिसमें आपको मराठों की वीरता, थ्रील, सस्पेंस आदि सभी पहलू देखने को मिलेंगें। ‘तानाजी’ फिल्म को 3डी में देखना आपको एक अद्भुत और अविस्मरणीय अनुभव देगा।

‘तानाजी’ की कहानी 17वीं शताब्दी की है, जो 4 फरवरी, 1670 में सिंहगढ़ के ऐतिहासिक युद्ध के इतिहास में दर्ज उन पन्नों की है, जिसमें स्वयं परस्त औरगंजेब (ल्यूक केनी) पूरे भारत पर मुगलों का वर्चस्व स्थापित करना चाहता था, लेकिन दक्षिण किले में रहने वाले शिवाजी महाराज (शरद केलकर) अपने स्वराज्य के प्रति दृढ़ हैं। मुगलों द्वारा पुरंदर संधि में कोंडाणा किले के साथ 23 किलों को मुगलों के अधीन करने के बाद भी मुगलिया सल्तनत अपनी भूख को शांत नहीं होने देते। जब राजमाता जीजाबाई ने कोंडाणा का किला मुगलों को देने के साथ ही यह शपथ ली थी, कि जब तक यह इस किले में दुबारा मराठों को परच नहीं लहराएगा, तब तक वह अपनी पादुकाएं नहीं पहनेंगी।

महाराज शिवाजी के परममित्र और जाबांज योद्धा सूबेदार तानाजी मालसुरे (अजय देवगन) अपनी पत्नी सावित्रीबाई (काजोल) और अपने बेटे की शादी को लेकर वयस्त हैं, और ऐसे में शिवाजी महाराज नहीं चाहते कि तानाजी के घर के खुशि के माहौल में कोई विघ्न न पड़े। लेकिन तानाजी इस बात से बिल्कुल अंजान है कि पुरंदर संधि में कोंडाणा किले के साथ 23 किलों का मुगलों द्वारा अधीन करने के बाद भी वे नहीं रूके हैं।

शिवाजी महाराज के परिचित द्वारा तानाजी को मुगलों की मंशा का पता चल जाता है, जिसके बाद वह अपने पुत्र के विवाह से ज्यादा शिवाजी महाराज को उनकी प्रतिज्ञा और स्वराज्य को अपना प्रथम कत्र्तव्य बताता है और शिवाजी को विश्वास दिलाता है कि उनके होते हुए आपके गौरव और मराठा साम्राज्य के गौरव पर कोई आंच नहीं आएगी, और ताना जी निकल पड़ता है, उदयभानु राठौड़ को खत्म करने।

वहीं औरंगजेब अपने विश्वासपात्र और क्रूर प्यादे उदयभानु राठौड़ (सैफ अली खान) को अपनी भव्य सेना और भव्य नागिन तोप के साथ कोंडाणा किले और मराठा साम्राज्य को निस्तेनाबूत करने का आदेश देता है। असल में उदयभानु का भी एक अतीत है, जिसमें एक राजकुमार कमला, जिससे वह प्रेम करता था, लेकिन उदभानु को वह स्वीकार नहीं करती और उदयभानु शर्मसार हो वहां से चला जाता है और वहां से जाकर वह मुगलों के साथ मिल जाता है, जिसके बाद वह राजकुमारी कमलादेवी (नेहा शर्मा) का अपहरण कर लाता है। उदयभाुन भी औरंगजेब का एक जांबाज और क्रूर योद्धा है, जो तानाजी से भी किसी भी तरह कम नहीं है।

अब इस ऐतिहासिक कहानी में उदयभानु और वीर योद्धा तानाजी को जबरदस्त युद्ध होता है, जिसमें तानाजी और मराठाओं की वीरता और शौर्यता के उन क्षणों का पता चलता है, जो समय घटित हुए थे। तो क्या तानाजी और उदयभानु राठौड़ में किसी विजय होती है? क्या तानाजी जी मराठा साम्राज्य और शिवाजी महाराज को दिए गए वचन को पूरा कर पाता है या नहीं? यह जानने के लिए आपको ‘तानाजी’ फिल्म देखकर इतिहास के उन पन्नों को पढ़ लेना चाहिए, जो आप नहीं जानते, आप धन्य है, जो बाॅलीवुड के माध्यम से आप इतिहास की गहराई में दफन कहानियों से रू-ब-रू हो रहे हैं।

ऐतिहासिक फिल्मों की फेहरिस्त में निर्देशक ओम राउत भी एक मील का पत्थर साबित हुए हैं, जिनहोंने ‘तानाजी’ की वीरता को दर्शकों के सामने प्रदर्शित किया। और साथ ही फिल्म की विशेषता यह है कि यह 3डी इफेक्ट्स और ग्राफिस का बेजोड़ संगम है। फिल्म देखते-देखते युद्ध के बहुत से दृश्यों में दर्शकों द्वारा अचानक ही अपनी पलकों को झपका देने वाले सीन भी आपको हैरान कर देंगें, जो खूब अद्भुत और थ्रिलता से भरे हुए हैं। वहीं युद्ध के दृश्यों में उदयभानु राठौड़ के तलवारबाजी के एक अलग ही अंदाज को दिखाया गया है।

फिल्म के संगीत की बात करें तो गाना ‘शंकरा रे शंकरा’, ‘माय भवानी’ और ‘घमंड कर’ शानदार लगते हैं। अजय देवगन ने एक वीर योद्धा तानाजी के किरदार को बाखूबी निभाया है। वहीं काजोल के साथ उनका होना भी फिल्म में अच्छा लगता है। वहीं फिल्म ‘लाल कप्तान’ के बाद सैफ अली खान ने खलनायक उदयभानु राठौड़ के किरदार में अपनी छाप छोड़ी है। चाहे दृश्यों में उनका मौन रहना हो या फिर उनकी सैनिकों पर बर्बरता या फिर उनका अंदाजे नृत्य। शिवाजी के रूप में (शरद केलकर) ने भी स्वाभाविक अभिनय किया है, जो दर्शकों को हमेशा याद रहेगा।

अब देकर किस बात की है नया साल भी है, और एक ऐतिहासिक उम्दा फिल्म भी, जिसको देखकर आप भी अपने देश पर मर मिटने वाले शूरवीरों की गाथाओं से एक बार फिर परिचत हो अपने आपको गौरवांवित महसूस करने से पीछे नहीं रहेंगें।

Load More Related Articles
Load More By admin
Load More In खबरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

दिल्ली पुलिस ने सेक्शन 144 CRPC को किया सख्ती से लागू, दिल्ली मेजोरोटी ने किया सहयोग

नई दिल्ली : दिल्ली पुलिस के पीआरओ एमएस रंधावा ने कहा है कि दिल्ली पुलिस ने सेक्शन 144 सीआर…