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मेडिकल और इंजीनियरिंग के अलावा भी हैं कई विकल्प

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अंकित कपूर, (मैनेजिंग डायरेक्टर, प्रथम टेस्ट प्रेप, नई दिल्ली)

समाज लोगों से मिलकर बनता है, जो कुछ धारणाएं निर्धारित कर देते हैं और चाहते हैं कि दुनिया उन धारणाओं का पालन करे। इनमें से एक धारणा इंटेलिजेंस से जुड़ी हुई है। कक्षा 12 में साइंस बैकग्राउंड (मेडिकल या नॉन-मेडिकल) वाले अधिकांश छात्र यह सोचकर इंजीनियरिंग या मेडिकल की लाइन चुनते हैं कि इनके अलावा और क्या किया जा सकता है। यही वजह है कि कुछ समय के बाद वे अपनी राह से भटकने लगते हैं, जिसके कारण उन्हें समझ ही नहीं आता है कि उस मोड़ पर उन्हें क्या करना चाहिए। कई छात्र ऐसे होते हैं जिन्हें बचपन से यही बाताया जाता है कि सांइस के छात्रों के लिए केवल इंजीनियरिंग और मेडिकल के विकल्प ही उपल्बध हैं।

इंजीनियंरिंग और मेडिकल से क्यो आकर्षित होते हैं लोग?

इंजीनियरिंग और मेडिकल के कोर्स तब अधिक लोकप्रिय थे जब इनके अलावा किसी दूसरे स्ट्रीम में कुछ खास विकल्प उपलब्ध नहीं थे। जब कोई छात्र इंजीनियरिंग या मेडिकल का प्रवेश क्लियर कर लेता था, तो उसके लिए वह गर्व का पल होता था। छात्रों को एक बड़ी पहचान मिल जाती थी, क्योंकि ये उन्हें करियर के बेहतरीन विकल्प प्रदान करते थे।

लेकिन अब वक्त बदल रहा है। वर्तमान के ट्रेंड के अनुसार आज के समय में कोर्स के लिए एप्लीकेशन की तुलना में सीटें लिमिटेड होती हैं, जिसके कारण कम्पटीशन बढ़ गया है। पिछले 5 सालों से सिलेक्शन रेट 1ः है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय इंजीनियरों में डिजिटल स्किल की कमी होती है, जिसमें विशेषकर टेक स्किल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डाटा साइंस और वायरलेस टेक्नोलॉजी शामिल है। केवल 2.5% इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का ज्ञान होता है और केवल 5.5% छात्रों में बेसिक प्रोग्रामिंग स्किल्स होती हैं।

चूंकि, अधिकांश छात्र इंजीनियरिंग और मेडिकल की लाइन में जाते हैं, इन क्षेत्रों में अब पहले जितना आकर्षण नहीं रहा और जल्द ही इनका महत्व लगभग पूरी तरह से खत्म हो जाएगा। यही कारण है कि आज के समय में छात्र दूसरे विकल्पों में भी दिल्चस्पी दिखाने लगे हैं। भले ही आज भी लोग ज्यादा महत्व इन्ही क्षेत्रों को देते हों लेकिन कहते हैं कि ‘सब बदल जाता है लेकिन बदलाव कभी नहीं बदलता’ और धीरे-धीरे ही सही लेकिन चीजों में बदलाव नजर आ रहा है। अधिक से अधिक छात्र मैनेजमेंट, लॉ, मास कम्यूनिकेशन, होटल मैनेजमेंट और फैशन डिजाइनिंग आदि जैसे नए कोर्स का चुनाव कर रहे हैं।

  • मैनेजमेंट

करियर के रूप में मैनेजमेंट अपने आप में एक बेहतरीन और मजबूत विकल्प बनकर उभर रहा है। आकड़ों के अनुसार, मैनेजमेंट के लिए पोस्टग्रेजुएट कॉलेज साइंस स्ट्रीम के अधिक से अधिक छात्रों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। इसके अलावा मैनेजमेंट के लिए अंडरग्रेजुएट स्तर पर भी कई कॉलेज और विश्वविद्यालय खुल रहे हैं। ऐसे कॉलेजों में शहीद सुखदेव कॉलेज ऑफ बिजनेस स्टडीज और आईआईएम इंदौर शामिल होते हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी का शहीद सुखदेव कॉलेज ऑफ बिजनेस स्टडीज छात्रों को बीएमएस का कोर्स ऑफर करता है, जिसकी प्रवेश परीक्षा का नाम है डीयू-जेएटी। जबकि आईआईएम इंदौर मैनेजमेंट में 5 साल का इंटीग्रेटेड कोर्स (आईपीएम) ऑफर करता है, जिससे छात्रों को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) जैसे भारत के एक विख्यात कॉलेज में पढ़ने का मौका मिलता है। इसके अलावा पुणे का सिम्बॉइसिस, मुंबई का नरसी मोंजी, गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी और क्रिस्ट यूनिवर्सिटी आदि मैनेजमेंट के टॉप कालेजों में शामिल होते हैं।

  • लॉ

यदि लॉ को करियर के रूप में देखा जाए तो यह आज के समय के सबसे आकर्षित व मजबूत कोर्सों में से एक है, जिससे छात्रों का भविष्य संवर जाता है। वैश्विक मंदी के दौरान जब कंपनियां डूबने लगती थी तो वे कर्मचारियों की छटनी करने लगती थीं, जिसके कारण छात्रों के लिए नौकरी ढूंढना मुश्किल हो जाता था। इस स्थिति में कई सुरक्षा विकल्प मौजूद होते थे और लॉ इसमें से एक था क्योंकि इस परिस्थिति में मार्केट के मुद्दों को सुलझाने के लिए कानूनी सलाहकारों (लीगल एडवाइजर) की जरूरत पड़ती थी। इस डिगरी का चुनाव करने वालों में कई हस्तियां भी शामिल हैं, जैसे कि महात्मा गांधी, नेल्सन मंडेला और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा आदि। इसकी प्रवेश परीक्षा क्लैट (कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट) के नाम के जानी जाती है। इस कोर्स को करियर के रूप में चुनने वाले छात्रों में निम्नलिखित क्वालिटीज होनी चाहिए-

  • अच्छी कम्यूनिकेशन स्किल।
  • पढ़ने को इच्छुक क्योंकि इसमें रिसर्च का काम अधिक से अधिक होता है।
  • उद्देश्य ताकि आप अपने निष्कर्ष पर खुद ही आ सकें।
  • यदि आप अपनी बात को खुलकर रख पाते हैं तो आपके लिए यह करियर बिल्कुल सही है।
  • होटल मैनेजमेंट

ये एक ग्लोबल इंडस्ट्री है जो ट्रैवलिंग पसंद करने वाले ग्रेजुएट्स को कई आकर्षित अवसर प्रदान करती है। इसमें छात्र देश-विदेश कहीं भी करियर बना सकते हैं। पिछले 1 दशक में, चूंकि भारतीय इकोनॉमी की ग्रोथ हुई है और इसी के साथ देश में हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री की भी ग्रोथ हुई है। हॉस्पिटैलिटी के क्षेत्र में आने वाले 5 सालों में 43,300 करोड़ निवेश के साथ 3.5 मिलियन कुशल कर्मचारियों की जरूरत होगी। इसके लिए भारी संख्या में नौकरियों के लिए विभिन्न स्थानों की नियुक्ति की जाएगी और यह छात्रों के लिए किसी बड़े अवसर से कम नहीं है।

प्रथम आईआईएफएम के निदेशक, श्री अंकित कपूर ने बताया कि, “छात्रों को अपने करियर का चयन उचित रिसर्च के साथ सोच समझकर करना चाहिए।”

अगर धोनी हॉक्टर होता, को क्या इतना सक्सेसफुल होता? करियर, छात्र की पसंद और उसके टैलेंट के अनुसार होना चाहिए। जब छात्र ऐसी परिस्थिति में फस जाते हैं और कोई फैसला नहीं ले पाते हैं, तो ऐसे मामलों में प्रथम एजुकेशन छात्रों को सही फैसला करने में मदद करता है। प्रथम न सिर्फ हर प्रकार की प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराता है बल्कि हर विषय के लिए स्टडी मटीरियल के साथ मॉक टेस्ट भी उपलब्ध कराता है। यदि किसी छात्र को लिखने में समस्या आती है तो प्रथम ऐसे छात्रों को अलग से समय देता है और उन्हें लिखने का अभ्यास कराता है। यहां के सभी शिक्षक छात्रों के हर संदेह व समस्या को दूर करने में विश्वास रखते हैं इसलिए छात्रों को अलग से क्लासेस दी जाती हैं, जहां वे अपने सभी डाउट्स व समस्याओं को दूर कर पाते हैं।

समय बदल रहा है और साथ ही लोगों के सोचने का तरीका भी बदल रहा है। यह बदलाव इतनी तेज गति में हो रहा है कि परिवार और समाज भी इस बात को समझ चुके हैं कि इस परंपरा को तोड़ने की जरूरत है। विशेषकर साइंस स्ट्रीम वाले छात्र लिबरल आर्ट्स, साइकोलॉजी, फाइन आर्ट्स, जर्नलिज्म, फोटोग्राफी, क्रिएटिव राइटिंग, व्लॉगिंग आदि जैसे करियर के नए विकल्पों का चुनाव कर रहे हैं।

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