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Learn, Play, Grow, के साथ मेघालय में बच्चों की मदद

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  • एसबीआई फाउंडेशन और सेसमी वर्कश़ॉप इंडिया ने लर्न, प्ले और ग्रो की पहल को लॉन्च किया। मेघालय में छोटे बच्चों की शिक्षा सबंधी जरूरतें पूरी करने के लिए एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस ने फंड के रूप में मदद दी।
  • लर्न, प्ले और ग्रो का लक्ष्य राज्य में आंगनबाड़ी केंद्र के माध्यम से करीब 60 हजार बच्चों और उनकी देखभाल करने वालों तक पहुंचना है।

मेघालय : फरवरी 2020 में मेघालय के करीब 60 हजार छोटे बच्चों की पढ़ाई और सीखने के उत्साहजनक सफर की शुरुआत हुई। सेसमी वर्कशॉप इंडिया, एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस और एसबीआई फाउंडेशन लर्न, प्ले ग्रो की पहल करने के लिए बिल्कुल तैयार हैं, जिससे राज्य में 3 हजार आंगनवाड़ी में प्रारंभिक शिक्षा की क्वॉलिटी को बेहतर बनाया सके।

बचपन में जब मनुष्य के दिमाग का विकास बहुत तेजी से होता है तो इसका संबंध भविष्य में सीखने की क्षमता, व्यवहार और स्वास्थ्य से जोड़ा जाता है। विकास की इस अवस्था की ओर से पेश किए गए इस अवसर को उभारते हुए “हार्वर्ड सेंटर फॉर द डेवलपिंग चिल्ड्रेन” ने हमें यह बताया कि बच्चे का दिमाग प्रारंभिक वर्षों में प्रति सेकेंड 1 मिलियन नए न्यूरल कनेक्शन जोड़ता है। इसी तरह जिन बच्चों में प्रोत्साहन और प्रेरणा की कमी होती है या जिन बच्चों में सीखने की उत्सुकता कम होती है। वह अपने साधनसंपन्न दोस्तों से काफी पीछे रह सकते हैं।

भारत में एकीकृत बाल विकास सेवाओं के तत्वाधान (आईसीडीएस) में आंगनवाड़ी नेटवर्क बच्चों को स्कूल से पहले प्री स्कूल सर्विसेज प्रमुख रूप से मुहैया कराती है। आंगनवाडी नेटवर्क ने जच्चा-बच्चा के बेहतर स्वास्थ्य की देखभाल में सराहनीय योगदान दिया है। इसके अलावा आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के प्रारंभिक पोषण और छोटे बच्चों के टीकाकरण पर अपना ध्यान केंद्रित करता है। अब आंगनवाड़ी नेटवर्क आधारभूत ढांचे और स्टाफ की ट्रेनिंग पर ध्यान केंद्रित कर बच्चों को हाई क्वॉलिटी की प्रारंभिक शिक्षा देने की क्षमता को और मजबूत बना रहा है।

उत्तर पूर्व में आंगनवाड़ी नेटवर्क की प्रारंभिक चुनौतियों में क्षेत्र का दुर्गम होना शामिल है। वहां कुल मिलाकर बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा के प्रति समुदाय में जागरूकता की काफी कमी है। एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (एएसईआर) के अनुसार मेघालय की आंगनवाड़ी में 3-4 वर्ष के बच्चों की भर्ती का आंकड़ा काफी कम है। वहां यह मात्र 23.9 फीसदी है। कुछ पैरंट्स प्राइवेट प्री स्कूलों में अपने बच्चों को भेजना पसंद करते हैं। क्योंकि कम बजट के प्री स्कूलों में बुनियादी ढांचा और सुविधाएं काफी कम हैं। इसलिए इन्हें किसी भी लिहाज से पर्याप्त नहीं कहा जा सकता। इन चुनौतियों के कारण बच्चों का नई चीजों को सीखने का स्तर काफी कम हैं। पहली क्लास में पढ़ने वाले केवल तीन-चैथाई बच्चे ही पढ़ पाते हैं। 10.9 फीसदी बच्चों को अक्षरों की पहचान ही नहीं है, जो कोई भी लिखी हुई चीज पढ़ने की पहली बेसिक प्री-रीडिंग स्किल होती है।

एसबीआई फाउंडेशन, एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस और सेसमी वर्कशॉप इंडिया लर्न, प्ले ग्रो, की दिल से की गई पहल में अब आईसीडीएस और स्थानीय एनजीओ से की गई साझेदारी से ये संस्थाएं बच्चों और उनकी देखभाल करने वाले लोगों के लिए 3000 आंगनवाडी केंद्रों को हाई क्वॉलिटी की शैक्षिक सामग्री प्रदान कर रहे हैं। इस पहल के तहत क्षमता निर्माण और टीचरों के प्रशिक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है। पैरंट्स और बच्चों की देखभाल करने वाले लोगों को बच्चों को मौज-मस्ती में उपयोगी चीजें सिखाने और खेल-खेल में पढ़ाई कराने की शिक्षा दी जा रही है, जिससे बच्चों का पूर्ण रूप से शैक्षिक विकास हो सके।

मेघालय के माननीय मुख्यमंत्री श्री कोनराड कोंगकल संगमा ने कहा, “छोटे बच्चों को स्थिर संबंधों, देखभाल और शिक्षा तक लगातार पहुंच की जरूरत होती है। इससे उनकी जिंदगी को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। इससे उनमें लचीलापन आता है। किसी भी मुश्किल स्थिति का समाधान खोजने में मदद मिलती है। अच्छी शिक्षा जिंदगी में सफलता का मुख्य आधार है। हम मेघालय के बच्चों को बेहतरीन शैक्षिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे राज्य को भी मजबूती मिलेगी। आंगनवाडी वह जगह हैं, जहां बच्चों को न केवल प्रारंभिक शिक्षा मिलती है, बल्कि उन्हें अक्षर और संख्याओं का ज्ञान भी कराया जाता है। यहां बच्चों को जिंदगी जीने की कला भी सिखाई जाती है। एसबीआई फाउंडेशन की इस पहल के माध्यम से उन कदमों का समर्थन कर हम काफी खुश हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि बच्चों को न सिर्फ स्कूलों में बेहतरीन शिक्षा मिले, पर जब वह घर पर भी रहें तो भी वह उपयोगी चीजें सीखते रहें।”

बैंकिंग के बाद भी लोगों की सर्विस करने के एसबीआई फाउंडेशन मिशन के बारे में निदेशक श्री आलोक कुमार चैधरी ने कहा, “एसबीआई शिक्षा, स्वास्थ्य रक्षा, आय के स्त्रोतों का सृजन में लगातार काम करने में जुटा है। हम यह सुनिश्चित करते हैं कि जिन लाखों बच्चें के जीवन में हम बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं, उनका लगातार विकास होता रहे। सुविधाओं से विहीन बच्चे भी उन संसाधनों का पूरी क्षमता से उपयोग कर अपनी जिंदगी को संवार और निखार सकें, जो उनके पास है।”

एसबीआई फांउडेशन के अध्यक्ष और सीओओ निक्सॉन जोसेफ ने कहा, ’हम गरीबों और सुख सुविधाओं से विहीन समुदाय के नन्हे-मुन्नों को प्री-स्कूल एजुकेशन का लाभ दिलाने के लिए लगातार काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और इस दायरे में ज्यादा से ज्यादा बच्चों को लाभ दिलाने का प्रयत्न कर रहे हैं। यह पहल मेघालय में बच्चों के संपूर्ण विकास को बढ़ावा देगी।’ सहायक उपाध्यक्ष और प्रोग्राम हेड अमन भइया ने कहा, ष्हम यह सुनिश्चित करेंगे कि आंगनवाडी में पढ़ रहे बच्चों को अपने जीवन की बेहतरीन शुरुआत मिले। हमें आशा है कि ये बच्चे अच्छी प्री-स्कूल एजुकेशन हासिल कर प्राइमरी और फिर सेकेंडरी स्कूलों में शिक्षा प्राप्त करेंगे और भविष्य में भारत के विकास की गाथा में अपना योगदान देंगे।

सेसमी वर्कशॉप इंडिया की प्रबंध निदेशक सोनाली खान ने कहा, “हमने यहां नई-नई बातें सीखने और पढ़ने-पढ़ाने का मजा लेने के लिए अलग-अलग समुदायों को एकत्रित किया है। हमारा ध्यान किसी भी बच्चे का संपूर्ण रूप से विकास करने पर हैं। हम यहां सिर्फ बच्चे की प्रारंभिक शिक्षा पर ही ध्यान नहीं देते, बल्कि उसके शारीरिक विकास, साफ-सफाई और बच्चे के भावनात्मक विकास पर भी हमारा पूरा ध्यान रहता है। सेसमी के पास उच्च स्तर पर शोध के बाद दुनिया भर की जरूरतों की कसौटी पर खरा उतरने वाला कंटेंट है, जिससे हम हकीकत के धरातल पर बच्चों को पढ़ाई के अलावा जीवन में काम आने वाली बातें सिखाते हैं। हम किसी भी बच्चे को उसकी स्कूली लाइफ और आम जिंदगी की जरूरतों के लिए तैयार करते हैं। यह एक अच्छी शुरुआत है। इसके लिए हम मेघालय सरकार और एसबीआई फाउंडेशन के विजन को धन्यवाद देते हैं।”

सेसमी वर्कशॉप इंडिया बच्चों को नई-नई और मुश्किल चीजें मजेदार अंदाज में सिखाने के लिए कठपुतली के शो, मीडिया और आधुनिकतम तकनीक का प्रभावी ढंग से सहारा लेता है। तरह-तरह के खेलों, कहानियों की किताब और ऑडियो विचुअल सेगमेंट से शब्द और अक्षर ज्ञान में बच्चों की दिलचस्पी जागती है। इस तरह की स्किल्स बच्चों को घर में भी सिखाई जा सकती है। रेडियो और सामुदायिक भागीदारी से भी बच्चों को शिक्षा दी जाती है। राज्य के आईसीडीएस के सिलेबस के इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रयोग कर सेसमी टीचरों को यह ट्रेनिंग देता है कि किसी पाठ में बच्चों की दिलचस्पी कैसे जगाई जाएं और मजेदार अंदाज में बच्चों को प्रेरित कैसे किया जाए कि वह नई-नई चीजें सीखने में रुचि लें। पैरंट्स बच्चों की शिक्षा में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। पैरंट्स कोउस प्रोग्राम से फायदा होगा, जो यह दिखाते हैं कि किस तरह बच्चों की देखभाल करने वाले अभिभावक खेल-खेल में मजेदार चीजें सिखाते हुए उनके सीखने का लेवल बढ़ा सकते हैं।

लर्न, प्ले एंड ग्रो इनीशिएटिन को एसबीआई फाउंडेशन का पूरा समर्थन हासिल है। एसबीआई फाउंडेशन अपनों प्रयासों से शिक्षा के माध्यम से बच्चों की जिंदगी को बदलने के काम में पूरी तरह जुटा है। मेघालय में हजारों बच्चों को आकर्षक ढंग से शैक्षिक अवसर प्रदान करने में “लर्न, प्ले ग्रो” एक नई उम्मीद की किरण बनकर उभरा है। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2019 के विजन को शेयर करती है। इसके अनुसार सभी बच्चों को बेहतरीन क्वॉलिटी की शिक्षा प्रदान कर समाज को स्थिर रूप से समान और जीवंत समाज में बदलना है, जिसमें सबके पास ज्ञान का प्रकाश हो।

यह एक ऐसा कदम है, जिससे भारत के बच्चों को स्मार्ट, मजबूत और दयालु बनने में मदद की जा रही है।

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