Home दिल्ली ख़ास कला/साहित्य / संस्कृति तीन दिवसीय मेगा कला महोत्सव-‘जश्न-ए-हिंद- भारतीय लोकाचार का उत्सव‘ का रंगारंग शुभारंभ

तीन दिवसीय मेगा कला महोत्सव-‘जश्न-ए-हिंद- भारतीय लोकाचार का उत्सव‘ का रंगारंग शुभारंभ

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‘जश्न-ए-हिंद के पहले दिन आर्मी बैंड एवं मशाल की रोशनी के अदभुत प्रस्तुति गायक निजामी द्वारा प्रस्तुत साईं भजन फरीद हसन खान द्वारा ठुमरी ख्याल गायकी ‘बात शायरी की ‘कार्यक्रम, जिसमें अशोक चक्रधर और कुंवर रणजीत चैहान के साथ पीयूश मिश्रा का संबाद एवं सोभना नारायण द्वारा प्रस्तुत शास्त्रीय नृत्य ने लागों का मन मोहा।

नई दिल्ली : इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर द आर्ट्स के साथ मिलकर भारत की सांस्कृतिक विरासत एवं कला के लिए समर्पित स्वयंसेवी संस्था साक्षी द्वारा आयोजित तीन दिवसीय मेगा कला महोत्सव “जश्न-ए-हिंद-भारतीय लोकाचार का कला उत्सव” का रंगारंग शुभारंभ आज दिल्ली के इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर द आर्ट्स में हुआ।

21, 22 एवं 23 फरवरी 2020 तक चलने वाले इस तीन दिवसीय ‘जश्न-ए-हिंद-भारतीय लोकाचार का उत्सव ‘के पहले दिन आज शुक्रवार, 21 फरवरी को कार्यक्रम की शुरूआत गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। ‘जश्न-ए-हिंद कार्यक्रम के उद्घाटन के बाद सैनिकों को सलाम ,आर्मी बैंड एवं मशाल की रोशनी के अदभुत प्रस्तुति ने लोगों को देश प्रेम के रंग में रंग दिया। इसके बाद जानेमाने गायक निजामी द्वारा प्रस्तुत साईं भजन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया साथ ही फरीद हसन खान द्वारा ठुमरी ख्याल गायकी ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया। फिर शुरू हुई ‘बात शायरी की ‘कार्यक्रम जिसमें अशोक चक्रधर और कुंवर रणजीत चैहान के साथ पीयूष मिश्रा का संबाद काफी प्रभावी रहा। पहले दिन की कार्यक्रम का समापन पदमश्री सोभना नारायण द्वारा प्रस्तुत शास्त्रीय नृत्य से हुआ। सोभना नारायण ने अपनी नृत्य से लोगों का दिल जीत लिया। कुल मिलाकर ‘जश्न-ए-हिंद-भारतीय लोकाचार का उत्सव‘ का पहला दिन यादगार रहा।

पियूष-मिश्रा-एवं-मृदुला-टंडन-ने-प्रदान-किया-अशोक-चक्रधर-को-प्रथम-जश्न-ए-हिंद-लाइफटाइम-अचीवमेंट-पुरस्कारतीन दिवसीय मेगा महोत्सव “जश्न-ई-हिंद -भारतीय लोकाचार का कला उत्सव” में पैनल डिस्कशन, गजल गायन, गुरबानी, सूफी संगीत, मुशायरा, शास्त्रीय नृत्य और संगीत, नाटक में यूथ सहित विभिन्न साहित्यिक और कला पृष्ठभूमि के प्रतिष्ठित विद्वानों और विश्व-प्रसिद्ध गणमान्य लोगों द्वारा बहु-केंद्रित सत्र और कला प्रदर्शन होंगे। मेगा महोत्सव में बुक-लॉन्च, कव्वाली, भजन, ओपन-माइक, लोक-प्रदर्शन और कई अन्य रोमांचक सत्र का भी आयोजन होगा ताकि भारत की गंगा-जमुनी तहजीब को उजागर किया जा सके।

साक्षी के अध्यक्ष व जश्न- ई-हिंद महोत्सव की आयोजिका डॉ. श्रीमती मृदुला टंडन ने कहा कि ‘जश्न-ए-हिंद, एक मल्टीस्टेज कला महोत्सव है जिसमें भारतीय लोकाचार का जश्न प्रत्येक सुबह 3 चरणों में संगीत के साथ शुरू होगा, जिसमे भजन, सूफी, गुरबानी होंगे इसके बाद शास्त्रीय संगीत-गायन और वाद्य दोनों होंगे। फिर स्कूली बच्चों के प्रदर्शन पर एक मंच दिया जाएगा जिसमें ऑटिस्टिक और विकलांग बच्चों और गैर सरकारी संगठनों के केंद्रों के बच्चे शामिल हैं। एवं इसके बाद दिन भर विश्व प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा विभिन्न काय्रक्रम का आयोजन होगा ।

तीन दिवसीय जशन-ए-हिंद महोत्सव में भाग लेने वाले स्टार कलाकारों में पदमश्री, पद्म भूषण, पदमविभूषण पं0 बिरजू महाराज, पीयूष मिश्रा, जनबा शाहुर रहमान फारूकी, लक्ष्मी शंकर बाजपेई, कुंवर बेचैन, पिनाज मसानी, सबजानी, सबाना मसानी, सबा मसानी शामिल हैं। हमसर हयात, पं- अजय प्रसन्ना, चित्रा मुद्गल, राजा बुंदेला, सुष्मिता मुखर्जी, शोभना नारायण ,जनाब शमीम हनफी, गीता चंद्रन की मंडली, डॉ खालिद अलवी, यामिनी और भावना रेड्डी, रंजना गौहर, सीनियर गौहर ,सुश्री रमा, प्रिंसिपल हंसराज कॉलेज, गुलाम दस्तगीर खान, अमृतसर गोल्डन टेंपल मंदिर से गुरदेव सिंहग्रंथी, साधना श्रीवास्तव, सुदेश शर्मा (गायन, राजस्थान), प्रीतिपेल, छब्रबब के लोक कलाकार, कुंवर रणजीत चैहान, मोईन शादाब, खुशबीर, जीशान नियाजी, मदन मोहन दानिश, आजम मशकरी, ममता किरण, अलीना इरत, रहमान मुसावीर, रचित दीक्षित, दीक्षित दनकौरी, महेश गढ़िया बेढक, सुहैल अख्तर, शकील अहमद, प्रताप सोमवंशी, डॉ. निमेश देसाई, डीआर आईएचबीएएस, रणवीर सैनी पैरालिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट आदि प्रमुख होंगे ।

डॉ. श्रीमती मृदुला टंडन का कहना है कि एक महोत्सव आयोजित करने के लिए जो समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और सार्वभौमिक रूप से प्रासंगिक शाश्वत मूल्यों को मानता है, जो भारत को समृद्ध करते हैं,‘जश्न-ए-हिन्द‘ ऐसी गतिविधियों को एक मंच पर मेगा महोत्सव के माध्यम से लाने का प्रयास है। ‘जश्न-ए-हिन्द‘ इस तथ्य को उजागर करती हैं कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति दुनिया में सबसे प्राचीन है और फिर भी यह एक जीवित विरासत है, हम इन मूल्यों को अपने सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने में समेटते हैं, यहाँ तक कि भारत भी 21वीं सदी में और इसके बाद भी, एक विश्व गुरू के रूप मे स्थापित है जश्न-ए-हिंद के रूप में हम समुदाय में जागरूकता बढ़ाकर सामाजिक प्रासंगिकता के समकालीन मुद्दों को कला के विभिन्न माध्यमों, कलाकारो कवियों नाटकारों गायकों ,नृत्यांगनों एवं विद्वानों के माध्यम से दर्षकों के बीच प्रदर्षित एवं संबोधित करेंगे। यह हमारे समृद्ध समग्र, सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से है। कार्यक्रमों का चुनाव इस बात को ध्यान में रखेगा कि लोकाचार गंगा जमनी तहजीब के मूल्यों के अनुरूप होना चाहिए, अर्थात यह जीवन और पर्यावरण के लिए सौहार्द, सद्भाव और सम्मान के साथ रहना सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और सभ्य समाज अपने सबसे कमजोर सदस्यों यानी विकलांग लोगों के लिए समान अवसर और उचित इलाज सुनिश्चित करता है, का संदेश भी देगा।

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