Home खबरें होली विशेष : जीवन में आध्यात्मिक रंग भरने का महापर्व

होली विशेष : जीवन में आध्यात्मिक रंग भरने का महापर्व

0 second read
0
1
10

होली रंगों से खुद को और दूसरों को केवल बाह्य रूप से रंगने का महापर्व नहीं है। यह अपनी चेतना को रंगाने का भी पर्व है। होली का तात्पर्य है अंदर की कालिमा को दूर कर अंतःकरण को उज्जल बनाना। जीवन में आनंद का वास्तविक रंग भरना…

भगवान का स्वरूप तो ‘सत्यं शिवं सुंदरम्’ है। उस सुंदर ही सुंदर ही पसंद आता है। अपने मन को सुंदर बनाओ, अपनी बुद्धि को संुदर बनाओ। मन को मैला नहीं होने देना चाहिए। मन में भय नहीं आने देना चाहिए। मन जब भय, संशय से मुक्त होकर उज्ज्वल बनेगा, तभी गुरु के ज्ञान का रंग इस पर लगाया जा सकता है, तभी सच्ची होली होती है।

Load More Related Articles
Load More By admin
Load More In खबरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

असीम शांति एवं सुख का अनुभव कराता है, ‘भ्रामरी प्राणायाम’

योगाचार्य (डॉ.) राजेश कुमार साहा भ्रामरी प्राणायाम : जिस प्रकार भंवरा गुंजन क्रिया करता है…