Home खबरें Angrezi भाषा का कोई मीडियम नहीं आपसी रिश्तों की कहानी है : Angrezi Medium

Angrezi भाषा का कोई मीडियम नहीं आपसी रिश्तों की कहानी है : Angrezi Medium

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के. कुमार

फिल्म: अंग्रेजी मीडियम।

  • कलाकार : इरफान खान, दीपक डोबरियाल, राधिका मदान, करीना कपूर, डिपंल कपाड़िया, पंकज त्रिपाठी, किक्कू शारदा, रणीवीर शौरी, मनु ऋषि।
  • निर्देशक : होमी अदजानिया।
  • निर्माता: दिनेश विजन और ज्योति देशपांडे।
  • रेटिंग : 3.5 ।

लोगों के बिखरते रिश्तों को जोड़ना आज बेहद जटिल हो गया। वैसे यह समझ नहीं आता कि रिश्तों से बड़ा उनका अहम बड़ा क्यों बन जाता है, जिसके चलते वह अपनों को भी नहीं देखते। लोग हैं, तो रिश्ते हैं, और रिश्ते हैं, तो हम हंै। रिश्तों के प्रेम और भावनाओं की मालाओं से सजी है फिल्म ‘अंग्रेजी मीडियम’। निर्देशक होमी अदजानिया ने ‘अंग्रेजी मीडियम’ फिल्म बनाकर कमाल कर दिया है, जिसके लिए दर्शक उनको सदा याद रखेंगें, या यूं कहें कि लोगों के बिगड़े रिश्तों को फिर से जोड़ने की जो सीख मिलेगी, यही उनकी फिल्म की सफलता की सार्थकता होगी।

यह कहानी है, उदयपुर के घसीटेराम के पड़पोते और उसकी बेटी की। कहानी पूरी तरह पिता और पुत्री के रिश्तों और उनकी भावनाओं से जुड़ी है, यह कहानी दो भाइयों के आपसी नोकझोंक और उनके प्रेम और भावनाओं की भी दिखाती है। असल में कहानी में दो पीढ़ियों के समन्वय को दिखाया गया है, जहां उदयपुर के घसीटाराम के पाड़पोते चंपक (इरफान खान) और उसकी पुत्री तारा (राधिका मदान) दोनों खुशियों में मस्त रहते हैं। राधिका अजाद ख्यालों की स्वछंद लड़की है, और पढ़-लिखकर लंदन जाना चाहती है। वहीं चंपक जमीन से जुड़ा होने के बाद भी अपनी बेटी की हर खुशियों को पूरा होते देखना चाहता है, लेकिन उसका डर यह भी है कि बेटी मेरे से दूर ना हो जाए।

आजकल की पीढ़ी के नौजवान यह चाहते हैं, कि उनका हर सपना पूरा हो जाए, जिसके लिए वे रिश्तों और अपनों की परवाह किए बगैर हर संभव कोशिश करते हैं, जो उनको नहीं करनी चाहिए, जीवन में सफल होना अच्छा है, पर रिश्तों की बली देना उनसे दूर जाना अच्छा नहीं, क्योंकि अतंत है, वही आपके हित में काम आते हैं, क्योंकि उनकी सफलता के पीछे उनके अपनों का ही हाथ होता है। चाहे वह किसी भी रूप में हो। चंपक के भाई कमल (दीपक डोबरियाल) दोनों के आपसी संबंधों के दृश्य आपको भावुक कर देंगें, जो चंपक से लड़ता तो बहुत है, लेकिन अपनी भतीजी से उतना ही प्यार करता है, वह हमेशा उसे खुश देखना चाहता है। वह अपना पुश्तैनी नाम पाने के लिए एक जज को रिश्वत भी देता है, जिसका खुलासा इरफान तारिका के काॅलेज में कर देता है, और वह जज उसके काॅलेज की प्रिंसिपल का पति होता है, जिसके चलते तारिका का लंदन जाने का सपना टूट जाता है। फिर कहानी कुछ आगे चलती है, लंदन में जहां रिश्तों का एक और टूटा पहलू दर्शकों के सामने आता है, लंदन पुलिस की नयना (करीना कपूर) और उसकी मां डिपंल कपाड़िया दोनों के टूटे बिगड़े रिश्तों को दिखाया गया है। निर्देशक होमी अदजानिया ने ‘अंग्रेजी मीडियम’ के द्वारा भारतीय लोगों के टूटते-बिखरते रिश्तों को जोड़ने का पूरा प्रयास किया है। कहानी लंबी है, क्योंकि चंपक लंदन भेजने के लिए अपनी बेटी तारा के लिए क्या-क्या जोड़-तोड़ करता है, उनकी इस यात्रा में क्या उतार-चढ़ाव आते हैं, यही फिल्म ‘अंग्रेजी मीडियम’ का क्लाइमेक्स है, जिसको जानने के लिए फिल्म को देखना तो बनता ही है।

अब फिल्म के किरदारों की बात करें तो इरफान खान का नाम सुनते ही हर बार की तरह उनके बेहतरीन अभिनय की छवि दिमाग में छा जाती है। उनके अभिनय की पूरी दुनिया कायल है। हर फिल्म में उनका अभिनय एक नयापन लिए होता है, जो हमेशा याद रहता है उनकी आने वाले अगली फिल्म तक, और उत्सुकता बनी रहता है, आगे अगली फिल्म में वे क्या नया करने वाले हैं। वैसे इरफान दम रखते हैं, कि यदि वह एकल अभिनय की फिल्म भी करेंगें तो दर्शकों को वह भी पसंद आएगी। अब अंग्रेजी मीडियम में उनके चंपक के किरदार के बाद कोमल के किरदार में दीपक डोबरियाल ने जबरदस्त अभिनय कर अपने व्यक्तित्व की छवि को दर्शकों के बीच छोड़ दिया है, जो उनको जीवन भर याद रहेगी। वहीं राधिका मदान भी अपने सौम्य, सरल सहज अभिनय करते हुए दर्शकों को आकर्षित करती हैं, हालांकि उन्होंने अभिनय में ज्यादा कुछ नया नहीं किया है, क्योंकि ‘मेरी आशिकी तुमसे ही है’ सीरियल से प्रसिद्ध हुई राधिका वैसी ही लगती हैं। दूसरी तरफ करिना कपूर, डिंपल कपाड़िया, पंकज त्रिपाठी रणवीर शौरी, मनु ऋषी, किक्कू शारदा आदि कालाकारों ने भी जरूरत के हिसाब से अपने किरदारों को बाखूबी निभाया है।

अगर फिल्म के दृश्यों की बात करें तो उदयपुर और राजस्थान को जीवंत कर दिया हैं, वहीं उसके आगे लंदन की चमक फीकी पड़ती है। गानों में तनिशका संघवी और सचिन जिगर का गाया गाना टाईटल सांग ‘एक जिंदगी मेरी’ दिल को छू लेता है। वहीं गाना लाड़की मन को भावुक करता है।

काबिले तारीफ हैं, होमी अदजानिया जैसे निर्देशक, जो दर्शकों के लिए इस तरह की फिल्मों को प्रस्तुत करते हैं, और समाज में टूटे और बिखरे हुए रिश्तों को जोड़ने का प्रयास भी। कहना न होगा कि यह फिल्म पूरे परिवार के साथ तो देखने लायक है, ही और साथ ही अपने किसी रिश्तेदार या भाइयों से भी रिश्ते बिगड़े हुए हैं, तो उनको भी इस फिल्म के बारे में बताना या दिखाना चाहिए कि रिश्तों का नाम ही परिवार है, यदि वे सही हैं, तो सब सही है। तो देर किस बात है कि है, कल फिल्म रिलीज हो रही है, इस खूबसूरत फिल्म को देखने का अवसर हाथ से न जाने दें। अपना रिव्यू ज्यादा खास नहीं पर शायद, जितना लिखा गया है, हो सकता है कि आपके मन में कुछ उत्सुकता जागे कि फिल्म को देखने जाना चाहिए, तो हमारे रिव्यू लिखने की सार्थकता भी पूरी हो जाएगी।

 

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