Home खबरें मायावी है चैनलों की दुनिया, प्रख्यात टीवी पत्रकार व NIU के प्रोफेसर आदर्श का विमर्श

मायावी है चैनलों की दुनिया, प्रख्यात टीवी पत्रकार व NIU के प्रोफेसर आदर्श का विमर्श

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  • (स्पेशल रिपोर्ट, कौशल कुमार)

‘’टीवी न्यूज चैनलों की दुनिया बड़ी ही मायावी है, जहां बेशुमार पैसा है, शोहरत है, ताकत है- कुल मिलाकर वो सब कुछ इस दुनिया में मौजूद है, जो एक शानदार करियर के पैमाने माने जाते हैं, लेकिन यहां की दुनिया में दाखिल होना नाकों चने चबाने जैसा है, खासकर टॉप 2-3 चैनलों में नौकरी हासिल करने का मतलब है कि आपने अलादीन का चिराग हासिल कर लिया’’- ये बातें कल टीवी पत्रकार आदर्श कुमार ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के पत्रकारिता के छात्रों को संबोधित करते हुए कही। दिल्ली यूनिवर्सिटी के भीमराव अंबेडकर कॉलेज के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग द्वारा आयोजित टीवी प्रोडक्शन विषय पर स्पेशल लेक्चर में छात्रों के साथ-साथ पत्रकारिता के प्राध्यापकगण और कई स्थानीय पत्रकार भी शामिल हुए।

करीब 194 बिलियन डॉलर की संपत्ति वाली दुनिया की सबसे बड़ी मीडिया कंपनी ‘द वॉल्ट डिज्नी’ के स्टार टीवी ग्रुप के स्टार न्यूज में 7 साल काम कर चुके पत्रकार आदर्श कुमार के मुताबिक आने वाले वक्त में मीडिया का अंतरराष्ट्रीय बाजार और तेजी से बढ़ेगा। उनके मुताबिक टीवी न्यूज चैनल की दुनिया ऐसी है, जहां हर सेकंड आपकी परीक्षा होती है। न्यूज प्रसारण की प्रक्रिया में एक सेकंड की देरी भी आपकी नौकरी पर भारी पड़ सकती है। आप कल्पना कर सकते हैं कि आपकी वजह से अगर कोई न्यूज चैनल ब्रेकिंग न्यूज देने में सिर्फ एक सेकंड पीछे रह गया तो प्रतिद्वंदी चैनल इस प्रोमो को लगातार एक हफ्ते तक दिखाता है कि हमने ये खबर सबसे पहले ब्रेक की और ऐसा करते हुए वो करोड़ों का विज्ञापन हासिल कर चुका होता है। ऐसे में अगर न्यूज प्रोडक्शन की पूरी टीम में से किसी एक ने भी उतनी तेजी नहीं दिखायी, जितनी तेजी की आवश्यकता है तो पूरे चैनल के लिए मुश्किल खड़ी हो जाती है। इसलिए रॉकेट की गति से काम करना टीवी न्यूज चैनल में काम करने की पहली शर्त है।

तेज गति के साथ काम करने के अलावा सतर्कता की भी उतनी ही आवश्यकता होती है। आदर्श कुमार ने एक वाकये का जिक्र करते हुए कहा कि साल 2011 में टाइम्स नाऊ पर पुणे में 100 करोड़ की मानहानि का मुकदमा किया गया था। बाद में बॉम्बे हाई कोर्ट ने टाइम्स नाऊ को मुकदमे के खिलाफ अपील करने से पहले 20 करोड़ रुपये नकद और 80 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जमा कराने का आदेश दिया था। चैनल के टेक्निकल कर्मचारी से बस इतनी गलती हुई थी कि टीवी स्क्रीन पर 15 सेकंड तक दूसरे व्यक्ति की बजाय सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस पीवी सावंत की तस्वीर चल गई थी। ये एक बानगी भर है कि टीवी न्यूज चैनल में काम करने के लिए किस हद तक सतर्कता की आवश्यकता होती है।

एक छात्र के टीआरपी पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए आदर्श कुमार ने बताया कि हर हफ्ते टीवी चैनलों में टीआरपी का आंकड़ा आता है। ऐसे में अगर आप टीवी पत्रकार हैं और आपका कार्यक्रम टीआरपी की रेस में अगर एक बार भी पीछे रह जाता है तो आपको जवाब देने होते हैं। मान लीजिए कि अगर लगातार दो-तीन हफ्ते तक टीआरपी की रेस में आप आगे बढ़ने में कामयाब नहीं होते हैं तो आपकी नौकरी खतरे में पड़ जाती है। टीआरपी का आंकड़ा आपके हर दिन हर पल की कठिन मेहनत पर निर्भर करता है, इसलिए टीवी की दुनिया में हर सेकंड आपको अग्निपरीक्षा देनी पड़ती है। इसलिए किसी भी न्यूज चैनल में अगर आप 6 महीने भी काम कर लेते हैं तो ये अपने आप में किसी उपलब्धि से कम नहीं है। इसलिए आप सुनते होंगे कि आज ये पत्रकार इस चैनल में कल उस चैनल में और परसों कहीं नहीं।हां, एक बात जरूर है कि टीवी न्यूज चैनलों में जो सुख-सुविधाएं और बाहर निकलने पर जो प्रतिष्ठा मिलती है, हमेशा सेलिब्रिटी के इर्द-गिर्द जीवन गुजरता है, वैसा आनंद किसी भी दूसरे क्षेत्र में नहीं है। आदर्श कुमार से जब बड़े चैनल में नौकरी हासिल करने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने साल 2005 में स्टार न्यूज चैनल ज्वाइन किया था और 12 साल तक स्टार न्यूज-ABP न्यूज में ही रहे। इससे पहले वो ‘आज तक’, ‘ऑल इंडिया रेडियो’ और द इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के सबसे प्रतिष्ठित हिंदी अखबार‘जनसत्ता’ में काम कर चुके थे।

दिल्ली यूनिवर्सिटी के टॉपर व गोल्ड मेडलिस्ट रह चुके आदर्श कुमार के लिए उस वक्त स्टार ग्रुप में नौकरी हासिल करना किसी ओलंपिक रेस को जीतने के बराबर था । भारत के एकमात्र इंटरनेशनल न्यूज चैनल स्टार न्यूज में जब एक सीट की वैकेंसी निकलती थी तो देश-विदेश से करीब 1700-1800 प्रतिभागी शामिल होते थे। रिजनिंग टेस्ट, जीके टेस्ट, न्यूज राइटिंग टेस्ट, ग्रुप डिस्कशन, पैनल इंटरव्यू, प्रजेंटेशन स्किल टेस्ट और फिर आखिर में फाइनल इंटरव्यू- ये सात स्टेप्स पार करना सात समंदर पार करने के बराबर ही था। इंटरव्यू पैनल में भी उस वक्त एक-दो भारतीय के अलावा ज्यादातर स्टार ग्रुप के विदेशी अधिकारी ही शामिल होते थे। सब कुछ हेडक्वार्टर न्यूयॉर्क से संचालित होता था और दुनिया की सबसे बड़ी मीडिया हस्ती रुपर्ट मर्डोक स्वयं भारत में अपने करीब 45 चैनलों के कामकाज पर पैनी निगाह रखते थे।स्टार ग्रुप के चैनल खासकर स्टार वर्ल्ड, नेशनल ज्योग्राफिक,स्टार मूवीज, फॉक्स टीवी, स्टार प्लस, स्टार स्पोर्ट्स, स्टार गोल्ड और स्टार न्यूज पूरे भारत के दर्शकों पर कब्जा जमा चुके थे। हॉलीवुड-बॉलीवुड फिल्मों का निर्माण करने वाली स्टार ग्रुप की फादर कंपनी 20-21 सेंचुरी फॉक्स फिल्म‘टाइटेनिक’‘स्टार वॉर’ और ‘अवतार’ के जरिए दुनिया भर मेंतहलका मचा रही थी। स्टार न्यूज अपने इंटरनेशनल फ्लेवर और टेक्नॉलॉजी की वजह से टॉप पर था।बता दें कि एनडीटीवी भी पहले स्टार न्यूज का ही हिस्सा था और प्रणय रॉय, राजदीप सरदेसाई, बरखा दत्त, अभिसार शर्मा- सभी स्टार ग्रुप के लिए ही काम करते थे। अपने कार्यक्रम ‘इंसाफ का तराजू’, ‘जांबाज’, ‘सिटी 60’, ‘सनसनी’, ‘स्टार रिपोर्ट’, ‘देश-विदेश’, ‘टॉप स्पीड’, शेखर सुमन का पोल खोल, ‘खबर फिल्मी है’ के जरिए स्टार न्यूज न्यूज चैनल की दुनिया में तहलका मचा चुका था। उस वक्त के आज तक के हेड उदय शंकर ने भी स्टार न्यूज ज्वाइन कर लिया था। आदर्श कुमार के मुताबिक कामयाबी के लिए आपके पास टेलिविजन चैनल की जरूरत के हिसाब से प्रतिभा और अलग-अलग विषयों के ज्ञान के अलावा कुल 12 टेक्निकल स्किल्स से लैस होने की आवश्यकता होती है।

छात्रों के विशेष आग्रह पर जूम पर आयोजित इस स्पेशल लेक्चर को आगे दो घंटे तक बढ़ाना पड़ा। बता दें कि आदर्श कुमार अपने लंबे टीवी करियर में सईद अंसारी के कार्यक्रम ‘इंसाफ का तराजू’, गौरव बनर्जी-सिद्धार्थ शर्मा- अजय कुमार- दीपक चैरसिया के न्यूज बुलेटिन, दिबांग के कार्यक्रम ‘प्रेस कॉन्फ्रेंस’, किशोर अजवाणी के कार्यक्रम 9 PM ABP लाइव, अभिसार शर्मा के न्यूज रिपोर्ट, अंजना ओम कश्यप के डेली न्यूज बुलेटिन, चित्रा त्रिपाठी के कार्यक्रम‘कौन बनेगा मुख्यमंत्री’,‘24 घंटे 24 रिपोर्टर’, ‘तीन देवियां’, ‘समर्पण’, ‘बोलो वत्स’, फिल्म अभिनेत्री टिस्का चोपड़ा के ‘मैं हूं ना’, आमिर खान और किशोर अजवाणी संग ‘असर’(सत्यमेव जयते के बाद हर हफ्ते का कार्यक्रम), फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा संग इयर एंड शो ‘दीवार’ और रागिनी खन्ना संग ‘गुड मॉर्निंग न्यूज’जैसे हिट कार्यक्रमों के प्रोड्यूसर रहे हैं।


आदर्श कुमार के कुशल निर्देशन में तैयार होने वाले शो ‘तीन देवियां’ ने टीआरपी के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे- उस शो को दिन में तीन बार ऑन एयर किया जाता था। टीवी न्यूज चैनल की दुनिया में आदर्श न्यूज राइटिंग और शो प्रोड्यूस करने के मामले में मास्टर माने जाते हैं। उन्हें नवंबर 2016 में नोटबंदी के कवरेज के लिए ‘ABP न्यूज सर्टिफिकेट ऑफ एक्सीलेंस’, 2016 में ही ABP न्यूज के सीईओ द्वारा ‘एबीपी न्यूज लांग एसोसिएशन अवॉर्ड’ और 2017 में 5 राज्यों के चुनाव के कवरेज के लिए ‘एबीपी न्यूज सर्टिफिकेट ऑफ रिकॉग्नीशन’ से सम्मानित किया गया था।

साहित्य, पठन-पाठन और समाजसेवा से जुड़ाव की वजह से उन्होंने टीवी न्यूज चैनल की दुनिया को साल 2017 में अलविदा कह दिया। मगर मीडिया की दुनिया में अपने प्रोडक्शन और इंटरव्यू के जरिए अभी भी वो उतना ही मजबूत दखल रखते हैं, अभिसार शर्मा के साथ उनका इंटरव्यू बेहद चर्चित रहा था। इसके अलावा आदर्श कुमार प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के सम्मानित वरिष्ठ सदस्य हैं- समय-समय पर सूचना प्रसारण मंत्रालय व मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा संचालित दूरदर्शन के ‘ज्ञान दर्शन’ चैनल के अलावा और भी कई चैनलों पर एक्सपर्ट के तौर पर मीडिया एजुकेशन से जुड़े मुद्दों पर लाइव शो के जरिए अपनी बात रखते हैं। अकादमिक जगत में आदर्श कुमार को ‘शाइन दिल्ली बेस्ट मीडिया अकेडमिशियन अवॉर्ड’, ‘राइजिंग स्टार अवॉर्ड’ और ‘वीएम अकेडमिशियन ऑफ द ईयर इन मीडिया स्टडीज (2019)’ अवॉर्ड मिल चुका है। उनकी पुस्तक ‘अक्षर अक्षर आदर्श’जापान समेत कई देशों के युवाओं में लोकप्रिय है। आदर्श कुमार इंकलाब साल 2017 मेंगणतंत्र दिवस महोत्सव के राष्ट्रीय आयोजन यानि देश के सबसे बड़े ऐतिहासिक, राजकीय, लोकप्रिय और प्रतिष्ठित- हिंदी अकादमी और दिल्ली सरकार द्वारा आयोजित लाल किला राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में बतौर राष्ट्रीय कवि अपना परचम लहरा चुके हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी में तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से बेस्ट स्टूडेंट का अवॉर्ड हासिल कर चुके आदर्श कुमार केसाल 2002 में प्रकाशितआलेख ‘बाढ़ आई तब न खइब मछरी’ ने बिहार सरकार की नींद उड़ा दी थी तो वहीं ‘मशीन नहीं हैं बच्चे’ शिक्षा व्यवस्था को झकझोरने वाला वो आलेख था, जिसने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया था। फिलहाल आदर्श कुमार ग्रेटर नोएडा में स्थित नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर कार्यरत है।

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