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हृदय रोगियों पर भारी पड़ रहा है कोरोना का डर

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 मुरादाबाद:- कोविड महामारी के बीच अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोग डर के कारण अस्पताल जाने से करता रहे हैं,  जिसके कारण कई मरीजों की हालत बिगड़ती जाती है तो कई घर पर ही जान गंवा बैठेते हैं।  इनमें मुख्य रूप से हृदय रोगी शामिल हैं। लेकिन ऐसे मामले अभी तक मीडिया का ध्यान अपनी ओर नहीं खींच पाए हैं।

दरअसल, हृदय संबंधी पुराने रोगों पर ध्यान देना आवश्यक है। सबसे आम बीमारी, ब्लड प्रेशर, जो स्ट्रोक्स और हार्ट अटैक का कारण बनती है, इसे ज्यादातर लोग गंभीरता से नहीं लेते हैं। अनियंत्रित ब्लड प्रेशर स्ट्रोक या हार्ट अटैक के साथ घातक साबित हो सकती है, जहां मरीज को अस्पताल पहुंचने के लिए पर्याप्त समय तक नहीं मिल पाता है।

नोएडा स्थित फोर्टिस अस्पताल के कार्डियोलॉजी निदेशक, डॉक्टर परनीश अरोड़ा ने जानकारी देते हुए कहा कि, “जागरुकता में कमी और खराब शिक्षा के कारण कई क्षेत्रों में लोग बीपी की जांच घर पर करने की बजाय अस्पताल जाते हैं, जो लॉकडाउन के दौरान बिल्कुल भी संभव नहीं रहा है। कई बार तो मेडिकेशन तक में समस्या रही है। एक्सरसाइज़ की कमी, खाने और सोने की खराब आदतें और तनाव आदि के कारण अनियंत्रित डायबिटीज भी हार्ट अटैक और स्ट्रोक को बढ़ावा देती है। कोविड के डर और स्वास्थ्य प्रदाताओं के साथ संचार की कमी के कारण कई मरीजों के इलाज में देरी हुई है। लैपटॉप पर घंटों बिताने के कारण किसी का ध्यान बीमारियों की तरफ जाता ही नहीं है, जिसके कारण बीमारी घातक होती जाती है।”

डॉक्टर परनीश अरोड़ा ने आगे बताया कि, “ज्यादातर लोगों को लगता है कि अस्पताल में भर्ती होने से उन्हें कोरोना हो सकता है, जिसके कारण वे सीने में दर्द, सांस लेने में कठिनाई, पक्षाघात आदि जैसे गंभीर लक्षणों को भी अंदेखा कर देते हैं। परिणामस्वरूप हार्ट अटैक के कारण घर पर ही कई मरीजों की जान चली जाती है। वहीं बीमारी की पहचान न होने के कारण मरीजों की मौत को कोविड से जोड़ दिया जाता है। चूंकि, कोविड रक्त वाहिकाओं और फेफड़ों की धमनियों में थक्कों के जोखिम को बढ़ाता है, इसलिए सीने में दर्द होने पर मरीज को अस्पताल ले जाना बेहद जरूरी है।”

चूंकि, वर्तमान में कोविड महामारी का कोई अंत नहीं नज़र आ रहा है इसलिए लोगों के लिए डायबिटीज़, बीपी और सीने में दर्द, सांस में मुश्किल, घुटन, कमज़ोरी आदि जैसे न समझ आने वाले लक्षण नज़र आने पर उचित डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है। समय पर इलाज की मदद से न सिर्फ मरीज की जान बचाई जा सकती है बल्कि उसे आजीवन विकलांगता से भी बचाया जा सकता है।

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