Home खबरें दिवाली विशेष : आपको पता होनी चाहिए दीपावली से जुड़ी यह 16 रोचक पौराणिक बातें

दिवाली विशेष : आपको पता होनी चाहिए दीपावली से जुड़ी यह 16 रोचक पौराणिक बातें

7 second read
0
1
38
  • दीपावली से जुड़े कुछ ऐसे रोचक तथ्य हैं, जो आज भी इतिहास के पन्नों में अपना विशेष स्थान रखते हैं। इस त्योहार का अपना ऐतिहासिक महत्व भी है। आपको भी जाननी चाहिए दीपावली से जुड़ी 16 रोचक पौराणिक बातें…

1. त्रोतायुग में भगवान राम जब रावण को हराकर अयोध्या वापस लौटे तब उनके आगमन पर दीप जलाकर उनका स्वागत किया गया और खुशियां मनाई गईं।

2. कार्तिक अमावस्या के दिन सिखों के छठे गुरु हरगोविन्द सिंहजी बादशाह जहांगीर की कैद से मुक्त होकर अमृतसर वापस लौटे थे।

3. कृष्ण ने अत्याचारी नरकासुर का वध दीपावली के एक दिन पहले चतुर्दशी को किया था। इसी खुशी में अगले दिन अमावस्या को गोकुलवासियों ने दीप जलाकर खुशियां मनाई थीं।

4. राक्षसों का वध करने के लिए मां देवी ने महाकाली का रूप धारण किया। राक्षसों का वध करने के बाद भी जब महाकाली का क्रोध कम नहीं हुआ तब भगवान शिव स्वयं उनके चरणों में लेट गए। भगवान शिव के शरीर स्पर्श मात्रा से ही देवी महाकाली का क्रोध समाप्त हो गया। इसी की याद में उनके शांत रूप लक्ष्मी की पूजा की शुरुआत हुई। इसी रात इनके रौद्ररूप काली की पूजा का भी विधान है।

5. बौद्ध धर्म के प्रवर्तक गौतम बुद्ध के समर्थकों एवं अनुयायियों ने गौतम बुद्ध के स्वागत में हजारों-लाखों दीप जलाकर दीपावली मनाई थी।

6. सम्राट विक्रमादित्य का राज्याभिषेक दीपावली के दिन हुआ था। इसलिए दीप जलाकर खुशियां मनाई गईं।

7. चतुर्थ शताब्दी में रचित कौटिल्य अर्थशास्त्रा के अनुसार कार्तिक अमावस्या के अवसर पर मंदिरों और घाटों (नदी के किनारे) पर बड़े पैमाने पर दीप जलाए जाते थे।

8. अमृतसर के स्वर्ण मंदिर का निर्माण भी दीपावली के ही दिन शुरू हुआ था।

9. जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर ने भी दीपावली के दिन ही बिहार के पावापुरी में अपना शरीर त्याग दिया। महावीर-निर्वाण संवत‌ इसके दूसरे दिन से शुरू होता है। अनेक प्रांतों में इसे वर्ष के आरंभ की शुरुआत मानते हैं। दीपोत्सव का वर्णन प्राचीन जैन ग्रंथों में मिलता है। कल्पसूत्रा में कहा गया है कि महावीर-निर्वाण के साथ जो अन्तर्जयोति सदा के लिए बुझ गई है, आओ उसकी कमी के लिए बहिर्ज्योति के प्रतीक दीप जलाएं।

10. पंजाब में जन्मे स्वामी रामतीर्थ का जन्म व महाप्रयाण दोनों दीपावली के दिन ही हुआ। इन्होंने दीपावली के दिन गंगा तट पर स्नान करते समय ‘ओम’ कहते हुए समाधि ले ली।

11. महर्षि दयानंद ने भारतीय संस्कृति के महान जननायक बनकर दीपावली के दिन अजमेर के निकट अवसान लिया। इन्होंने आर्य समाज की स्थापना की।

12. दीन-ए-इलाही के प्रवर्तक मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल में दौलतखाने के सामने 40 गज ऊंचे बांस पर एक बड़ा आकाशदीप दीपावली के दिन लटकाया जाता था। बादशाह जहांगीर भी दीपावली धूमधाम से मनाते थे।

13. मुगल वंश के अंतिम सम्राट बहादुर शाह जफर दीपावली को त्योहार के रूप में मनाते थे और इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेते थे।

14. शाह आलम द्वितीय के समय में समूचे शाही महल को दीपों से सजाया जाता था एवं लाल किले में आयोजित कार्यक्रमों में हिन्दू-मुसलमान दोनों भाग लेते थे।

15. मोहनजोदड़ो सभ्यता के अवशेषों में मिट्टी की एक मूर्ति के अनुसार उस समय भी दीपावली मनाई जाती थी। उस मूर्ति में मातृ-देवी के दोनों ओर दीप जलते दिखाई देते हैं।

16. महाप्रतापी तथा दानवीर राजा बलि ने अपने बाहुबल से तीनों लोकों पर विजय प्राप्त कर ली, तब बलि से भयभीत देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने वामन रूप धारण कर प्रतापी राजा बलि से तीन पग पृथ्वी दान के रूप में मांगी। महाप्रतापी राजा बलि ने भगवान विष्णु की चालाकी को समझते हुए भी याचक को निराश नहीं किया और तीन पग पृथ्वी दान में दे दी। विष्णु ने तीन पग में तीनों लोकों को नाप लिया। राजा बलि की दानशीलता से प्रभावित होकर भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल लोक का राज्य दे दिया, साथ ही यह भी आश्वासन दिया कि उनकी याद में भू लोकवासी प्रत्येक वर्ष दीपावली मनाएंगे। साभार : https://hindi.webdunia.com

Load More Related Articles
Load More By admin
Load More In खबरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

वरिष्ट पत्रकार विनोद तकिया वाला को स्टार पर्सनेलिटीज ऑफ इंडिया अवार्डस 2020 से सम्मानित हुए

नई दिल्ली : वरिष्ट पत्रकार विनोद तकिया वाला कोआलंबन चेरीटेबल ट्रस्ट की तरफ से राजधानी दिल्…