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गर्व करें हम महिला हैं…. (महिला दिवस 8 मार्च पर विशेष )

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  • कमलेश मुद् ग ल#

सृष्टि की रचना में महिला का विशेष योगदान है। सभी महापुरुष यही सोच कर महिलाओ की दशा को सुधारने के लिए अग्रसर रहे हैं। सच है महिला किसी से कम नहीं है पर कई बार समाज उनको कम तर आंक ने लगता है। एक महिला की सोच पूरे समाज को बदलने की ताकत रखती है। पंडित जवाहर लाल नेहरू ने कहा था ष्लोगों को जगाने के लिएष् महिलाओं का जागृत होना जरूरी है। एक बार जब वो अपना कदम उठा लेती है, परिवार आगे बढ़ता है, गाँव आगे बढ़ता है, और राष्टृ विकास की और उन्मुख होता है।

समाज में महिला के इर्द गिर्द सब घूमता है। वह किसी की बेटी, बहन, माँ, और पत्नी होती है। इन्ही रिश्तों को निभाते निभाते समाज के उत्थान में सहयोग देती है। उसका योगदान रिश्तों के साथ साथ बढ़ता जाता है। बेटी के रूप में पढ़ाई में नाम कमा कर पिता का नाम रोशन करती है। परिवार के लिए क्या भला क्या बुरा ये समझ यहीं से आरंभ हो जाती है। बेटी के फर्ज को बखूबी जानती है और उसे पूरा भी करती है। बहन बन कर अपने भाई बहनो और रिश्तेदारों के प्रति सम्मान का भाव रख कर हर कदम सोच समझ कर रखती है। अपने विचारों से परिवार के विचार बदलने की हिम्मत रखती है। जब शादी के पवित्र बंधन में बंधती है तब दो परिवारों की अपेक्षाओं पर खरी उतरने के लिए अपनी कमर कस लेती है। सभी सदस्यों में ताल मेल बिठा कर आपस में मिल जुल कर रहने की भावना, एक दूसरे के प्रति प्रेम की,निष्ठा की बयार बन जाती है। परिवार का समुचित पालन कैसे करे, बच्चो और बुजुर्गो में ताल मेल कैसे रखे, नौकरी की जिम्मेदारी के साथ साथ देश विदेश की खबरों पर भी सही पकड़ रखती है। कितनी समझदारी के साथ अपनी समाज में साख बनाती है। उसके विचारों का, परिवार के साथ साथ समाज पर भी असर पड़ता है। हर जगह से उसको प्रोत्साहित किया जाता है।

जब माँ बनती है मानों नया जीवन प्राप्त करती है। सब से बड़ी परीक्षा की तै या री यही है आरंभ होती है। अब अपनी रचना को बेहतर बनाने की योजना। अब दोहरी भूमिका का पहला कदम वो अत्यंत सोच समझ कर उठाती है। अब घर के साथ ही अपने बच्चो में सभ्य नागरिक के गुण उसे ही भरने होते हैं। उसके द्वारा दिया एक एक संस्कार बना या बिगाड़ सकता है। पुरे घर को बांध सकता है या तोड़ सकता है। समाज को एक अच्छा नागरिक देकर अपना माँ का फर्ज पूरा करती है। हर कदम उसके लिए चुनोतियों भरा होता है। जिसको वह सहर्ष स्वीकार करती है।

महिलाएं समाज का मुख्य हिस्सा होती हैं। आर्थिक, सामाजिक, राजनीति क क्रियाओं में बड़ी भूमिका निभाती हैं। उनका योगदान कम या ज्यादा नहीं होता बल्कि उनकी भूमिका महत्व पूर्ण होती है। उनकी सभी उपलब्धियों को याद करने और सरहाना करने के लिए उन्हे एक विशेष दिवस समर्पित किया गया है। एक ऐ सा विशेष दिन, जिस दिन हर महिला, अपने आप पर गर्व कर सके कि-वह महिला है। उसे इस बात का अहसास रहे कि पूरा विश्व उसकी अहमियत को जान ता, पहचान ता, और मानता है। उसके एक एक कार्य का पूरे विश्व पर असर पड़ता है। वह विशेष है, और आगे भी अपने गुणों के बल पर विशेषता हासिल करती रहेगी। यह सिलसिला युंही चलता रहेगा ।

साल का आरंभ होते ही जब कैलेंडर पर नजर जाती है तो सब महिला ये एक दिन विशेष को मार्क कर लेती हैं और वो होता है 8 मार्च का दिन। बहुत ही महत्वपूर्ण है ये दिवस सभी महिलाओं को समर्पित। अंतर राष्ट्रीय महिला दिवस पूरे विश्व में मनाया जाता है। महिलाओं को प्यार और सम्मान देने के लिए, उनके प्रति समाज का नजरिया बदलने के लिए, प्रति वर्ष ये दिन हर्ष उल्लास से मनाते हैं। इस खास दिन हर महिला खास महसूस करती है। उस दिन की रौनक कुछ अलग ही होती है। हर महिला अपने आप को समाज की विशेष धुरी समझ ती है जो बाकी दिन वो नहीं समझ पाती। उसे अपने अंदर की शक्ति का ज्ञान होता है, उस को ये गर्व होता है कि ये कार्य वो भी कर सकती है, वो किसी से कम नहीं है। आटा गुँथ ने वाले हाथों में, हथियार लेकर देश की रक्षा कर सकती है, खेतों में हंसिया, कुदाल लेकर मुह अंधरे काम कर सकती है, तो पायलेट बन कर आसमान में जहाज भी उड़ा सकती है। अपने रीति रिवाज बखूबी निभाती है तो अगले ही पल देश के दुश्मनों को धूल चटा सकती है। हाथ में कलम लेकर लिख सकती है, जागृति पैदा कर सकती है तो एक अच्छी शा सि का बन कर अपने देश का परचम लहरा सकती है। खेलों में अपना नाम कमा रही है तो अभिनय के जरिए भी देश दुनिया में अपना नाम लिख रही है।

मैं नारी हूँ, विश्वास के साथ कर्तव्य निभाती पूर्ण ओज के साथ परचम देश का लहराती हाँ, मैं नारी हूँ, अंतर राष्ट्रीय महिला दिवस आज से करीब एक सदी पहले आरंभ हुआ था। आज इस का स्वरूप हर देश, में अलग अलग है। लेकिन उदेश्य केवल एक है, महिलाओं का सम्मान।

महिला दिवस को अंतर राष्ट्रीय स्तर पर मनाने का विचार क्लारा जेटकि न का था। उन्होंने वर्ष 1910 में ये प्रस्ताव रखा था। वह मार्क्स वादी विचारों वाली कार्य कर्ता थीं। महिलाओं के प्रति सम्मान, उनके विभिन्न मुद्दो पर उनका पक्ष लेती थीं, उन से जुड़े हर मसले पर सक्रियता दिखाती थीं। संपूर्ण विश्व की महिलाएं देश, जात पात, भाषा, राजनीतिक, सांस्कृतिक, आर्थिक भेद से परे एक जुट होकर इस दिन को मनाती हैं। सबको बेसब्री से इस दिन का इंतजार रहता है। इस दिन को आयोजित होने वाले कार्यक्रम की रूप रेखा बननी आरंभ हो जाती है। सब अपने अपने सुझाव देते हैं। इस दिन का हिस्सा बनती हैं। आज नारी ने अपने अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करना सीख लिया है। इक्की सवी सदी की महिला ने अपनी शक्ति पहचानी है। हर मोड़ पर आज उसका नाम है। उसका वर्चस्व हर ओर बढ़ रहा है। उसकी नई नई उपलब्धियों पर उसको सम्मानित किया जाता है। विकसित हो, या विकास शील, हर देश की महिला को इस दिन विशेष अहसास होता है। हर देश उनके अधिकारों की बात करता है। उनको समाज में बराबरी का दर्जा दिये जाने की बात होती है।

अपने देश में भी इस दिन बहुत उत्साह होता है। देश दुनिया के साथ साथ अपने देश की महिलाओं के लिए भी खास हो जाता है- ये दिन। विभिन्न क्षेत्रों में स रा ह नीय कार्य करने वाली महिलाओं को, सम्मान दिया जाता है, जिस से सीख लेकर और महिलाएं भी अपना काम बखूबी कर सके। इस दिन जो संगठन, महिलाओं के हित में काम करते हैं, वो विभिन्न प्रशिक्षण शिविर, लगाते हैं। अनेक प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। जो महिलाएं आर्थिक रूप से कमजोर हैं, उनके लिए भी कुछ सहायता, देने की घोषणा की जाती है। आज महिला दिनों दिन प्रगति की ओर अग्रसर है। नारी पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही है। कोई भी काम अब महिलाओं की हद से दूर नहीं है। आज बेटा और बेटी के बीच का फर्क नहीं रहा है। फिल्म का निर्माण करना हो, या कोई अनुसंधान, कृषि विभाग की बात हो, या अंतरिक्ष में जाने की बात। हर जगह अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। महिला दिवस के दिन घर, हो या बाहर, या ऑफिस, उन्हें विशेष ट्रीटमेंट दिया जाता है। उनको गुलाब, गिफ्ट्स, चैकलेट दिये जाते हैं। ऑफिस में उनको उस दिन छुट्टी दे दी जाती है, या हाफ डे भी दे दिया जाता है। इस दिन बहुत ही अच्छे स्लो गन लिख कर, एक दूसरे को भेजे जाते हैं। इन संदेशों में एक महिला, कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, घर और बाहर, क्या अहमियत है उसकी जिंदगी में, यही लिखा होता है। यह दिन किसी त्यौहार से कम नहीं होता। हर महिला के चेहरे पर मुस्कुराहट होती है कि चलो एक दिन- उसका अपना दिन- उसको समर्पित दिन।

अंतर राष्ट्रीय महिला दिवस 2021 की थीम है “Women in leadership: Achieving an equal future in a Covid-19 World” (नेतृत्व में महिलाएं : Covid-19 की दुनिया में एक समान भविष्य की प्राप्ति) है। इस दिन को मनाने का उदेश्य है- महिलाओं को आत्म निर्भर बनाना। उनकी विभिन्न क्षेत्रों में, उनके द्वारा अर्जित उपलब्धियों को दुनिया के सामने लाना, जो संस्थाएँ, महिला उत्थान की ओर अग्रसर हैं- उनके द्वारा संचालित कार्य क्रम को सामाजिक करना, आर्थिक विकास के लिए उनको आर्थिक सहायता राशि, के लिए पैसे जुटाने के साथ साथ उनका वितरण करना भी एक अहम काम होता है। उनकी सुरक्षा, उनके कल्याण, को लेकर नवीन यो ज ना ए बनाना।

चाहे धरती हो या चाँद, महिलाएं, अपने सपनों की उड़ान भर रही हैं। कुछ को मंजिल मिल गई है, तो कुछ पाने के लिए परिश्रम कर रही हैं। जो अपना मुकाम हासिल कर चुकी हैं, इस दिन उनको याद करते हैं, उनके विचारों के बारे में, जान कर आगे बढ़ने के अवसर तलाश करते हैं,। हम उन सभी महिलाओं का आभार प्रकट करते हैं, जिन के गुणों के कारण, हमारे देश का नाम रोशन हुआ। इन मे से कुछ के नाम हैंम द र टेरेसा, इंदिरा गाँधी, लता मंगेशकर, आशा भोंसले, कल्पना चावला, मैरी कॉ म, साइना नेहवाल, अमृता प्रीतम, प्रतिभा पाटिल, सानिया मिर्जा, अरुंधति रॉय, सरोजिनी नायडू, आशा पूर्णा देवी, मिशन मंगल में शामिल महिलाएँ, सूची बहुत ही विस्तृत है। हम इनको नमन करते हैं। देश का नाम रोशन करने में इनके योगदान को आने वाली पीढियां याद करेंगीकरेंगी। हमारे शास्त्रों में लिखा है ‘यत्र नार्यस्तु पूजयंते तत्र रमंते देवता (अर्था त जहाँ पर नारी का सम्मान होता है, वहाँ देवता निवास करते हैं।)

एक दिन महिलाओं को समर्पित है। क्या हम रोज उनको ख़ास महसूस करवाने की आदत डाल ले। जिस से और अधिक ऊर्जा के साथ घर, समाज, और देश की तरक्की में अपना योग दान दे सके। हर माँ उन्नति करेगी तभी परिवार उन्नति करेगा। मैरी कॉम ने सही कहा है-अगर कठिन समय आये ,तो ये सोचिये कि अच्छा समय आपके लिए इंतजार कर रहा है।

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