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रिव्यू : ‘मणिकर्णिका’ खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी

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प्रस्तुति : के. कुमार

फिल्म : ‘मणिकर्णिका
स्टार कास्ट : कंगना रनौत, अतुल कुलकर्णी, अंकिता लोखंडे, डैनी डेंगजोंग्पा, जिस्सू सेनगुप्ता।
निर्देशक : कंगना रनौत, राधा कृष्ण, जगरलामुडी।
निर्माता : कमल जैन और निशांत पिट्टी।
रेटिंग : 3.5

आज भारतीय सिनेमाघरों में फिल्म मणिकर्णिका रिलीज हो चुकी है। तो आइए जानते हैं, फिल्म की कहानी के बारे में। असल में (मणिकर्णिका) फिल्म वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई के जीवन पर आधारित है, जिन्होंने 29 वर्ष की उम्र में अंग्रेज़ी साम्राज्य की सेना से लड़ कर अपनी वीरता का अहसास करवाते हुए रणभूमि में अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। इस फिल्म में बचपन की मनु के झाँसी की रानी बनने और अंग्रेजों से मुकाबला करने को पूरा सफर दिखाया गया है। फिल्म में खूबसूरत कंगना रनौत, मणिकर्णिका बनी हैं, जिन्होंने एक्टिंग के साथ इस फिल्म को डॉयरेक्ट भी किया है, लेकिन फिर भी रानी झांसी के जीवन के कुछ वास्तविक तथ्यों को नहीं दिखाया गया है। अगर वो भी फिल्म में दिखाए गए होते तो, दर्शक इतिहास को और ज्यादा अच्छे से समझ पाते।

मणिकर्णिका में कंगना अपने अब तक के फिल्मी करियर में पहली बार किसी ऐतिहासिक दमदार किरदार में नजर आ रही हैं। कंगना ने इस फिल्म के जरिए डॉयरेक्शन में भी कदम रखा है। लगभग 125 करोड़ के बजट में यह फिल्म बनी है।

फिल्म मणिकर्णिका की शुरुआत होती है, अमिताभ बच्चन की आवाज से, जिसके बाद आगे कहानी में रानी लक्ष्मीबाई (कंगना रनौत) की एंट्री होती है। लक्ष्मीबाई बहादुर हैं, लेकिन एक दयालु रानी भी, उन्हें अपनी मातृभूमि से प्यार है, और उस पर मर मिटने का जज्बा भी।

फिल्म के अन्य कलाकारों में अतुल कुलकर्णी ने तात्या टोपे, जिशु सेनगुप्ता ने गंगाधर राव, डैनी डेन्जोंपा ने गुलाम गौस खान, सुरेश ओबराय ने पेशवा बाजीराव, वैभव तत्ववादी ने पूरण सिंह और ताहेर शब्बीर ने संग्राम सिंह का रोल निभाया है। इस फिल्म में कंगना के बाद सबसे महत्वपूर्ण किरदार झलकारी बाई का है, जिसे अंकिता लोखंडे ने निभाया है। मिष्टी चक्रवर्ती, काशीबाई बनी हैं, तो रायपुर की उन्नति देवरा कंगना की फौज का हिस्सा हैं। वहीं फिल्म में प्रिया गमरे और स्वाति सेमवाल अभिनय कर रही हैं। सदाशिव राव भाऊ का रोल मोहम्मद जीशान अयूब ने निभाया है।

मणिकर्णिका द क्वीन ऑफ झाँसी को हिंदी के अलावा तमिल और तेलुगु के डब वर्जन के साथ रिलीज़ की गई है। खास बात यह है कि करीब दो घंटे 28 मिनट की फिल्म को सेंसर बोर्ड ने बिना किसी कट के पास किया है, जिसमें अमिताभ फिल्म की कहानी को बयां कर रहे हैं। संगीत शंकर अहसान लोय ने दिया है।

फिल्म में वीएफएक्स काफी अच्छे हैं। फिल्म का पहला हाफ दिल को छूने वाला और भावनात्मक है, लेकिन दूसरे हॉफ में दर्शक फिल्म की कहानी में अपने आपको बांधे यानि अपने को डूबा पाएंगें। कई जगह पर कंगना का फुर्तिलापन और आक्रोश का तरीका भी दर्शकों को बेहद पसंद आएगा।

बता दें कि कंगना रनौत (मणिकर्णिका : द क्वीन ऑफ झांसी) ऐतिहासिक फिल्म बनाने में सफल रही हैं, उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई के साहस और बलिदान की कहानी को बेहद शानदार और भव्य तरीके से परदे पर उतारा है और बेहतरीन जबरदस्त विजुअल्स क्रिएटस करने में भी वे सफल रही हैं, जिसे देखकर दर्शकों के अंदर देशभक्ति की भावना पैदा होती है। रानी लक्ष्मीबाई के साहासिक व्यक्तित्व पर बनी फिल्म में अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ते हुए रणभूमि में अपने को शहीद कर देने का पहलू कुछ अजीब सा लगता है, क्योंकि वह वास्तविक तथ्य से परे है। शायद और ज्यादा रिसर्च और जानकारियां जुटाई जाती तो, तस्वीर कुछ और ही निकल कर आती, लेकिन कंगना की यह बतौर निर्देशक पहली फिल्म है, जिसमें अपने प्रयास में वे सफल रहीं हैं।

फिल्म के गानों की अगर बात करें तो वो ज्यादा प्रभावित नहीं करते। लेकिन कंगना रनौत की परफॉर्मेंस दमदार है। वह रानी लक्ष्मीबाई के किरदार में जम रही हैं। तो दर्शकों को या यूं कहें कि उनके पूरे परिवार को रानी लक्ष्मीबाई के साहस और बलिदान की एतिहासिक शौर्यगाथा को जरूर देखना चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि हमें गर्व है, देश के उन वीरों पर जिन्होंने अपने स्वाभिमान और अपने साहस के दम पर अपनी मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।

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