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फिल्म रिव्यू : ‘बेलबाॅटम’ के कोड वाली अक्षय की ‘बेलबाॅटम’ खूब पसंद आएगी दर्शकों को

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  • स्टार काॅस्ट : अक्षय कुमार, वाणी कपूर, हुमा कुरैशी, लारा दत्ता, आदिल हुसैन।
  • डायरेक्टर : रंजीत तिवारी।
  • अवधि : 2 घंटे 10 मिनट।
  • रेटिंग : 3.5 स्टार

दर्शक यदि अब ओटीटी प्लेटफार्म से ऊब गए हैं, तो अब उत्साहित होकर देख आईए अक्ष्य कुमार की नई फिल्म ‘बेलवाॅटम’। जी हां यदि कोरोना काल में दर्शक बड़े पर्दे पर फिल्म का आनंद लेने से दूर रहे तो अब उनका इतंजार खत्म हो गया। फिल्म निर्देशक रंजीत एम तिवारी और निर्माता वाशु भगनानी व पूजा एंटरटेनमेंट और निखिल अडवाणी की एमी एंटरटेनमेंट की बड़ी फिल्म ‘बेलबाॅटम’ दर्शकों के लिए रिलीज होने जा रही है, जिसको पूरा श्रेय निर्माता-निर्देशक और अक्षय कुमार का जाता है। जहां एक ओर दुनिया कोरोना से टूट चुकी थी, वहीं एंटरटेंमेंट के हमारे ये जबांज दर्शकों को उदासी, खामोशी, बैचेनी को दूर करने के लिए उनके लिए फिल्म बनाने में मेहनत कर रहे थे। वैसे भी दर्शकों ने पिछले कुछ समय से इतिहास के पन्नों में छिपी कहानियों को दर्शकों के सामने का अतलुनीय बीड़ा उठाया है, वह वास्तव में काबिले तारीफ है। आइए जानते हैं क्या है ‘बेलबाॅटम’ की कहानी।

फिल्म की कहानी 80 के दशक में भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की समय पर केंद्रित हैं, उस दौर में इंडियन एयरलाइंस के विमान एक के बाद एक हाईजेक्स का शिकार हो रहे थे, क्योंकि प्लेन हाईजेक करने वाले प्लेन के यात्रियों के बदले में भारत सरकार से मोटी रकम मांगने के साथ ही भारत की जेलों में बंदर खूंखार और बड़े आंतकवादियों को रिहा करने की शर्त रखते थे, जिसको सरकार के पास पूरा करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नजर नहीं आता था। लेकिन एक हाईजेक प्लेन में अंशुल (अक्षय कुमार) की मां (डाॅली अहलूवालिया) की मृत्यु हो जाती है, जिसका राज अंशुल को एक राॅ एजेंसी का सीनियर आदिल हुैसेन बताता है, जिसके बाद वह राॅ एजेंट बनने की निर्णय लेता है। अक्षय कुमार पत्नी राधिका (वाणी कपूर) के साथ अपनी खुशहाल जिंदगी व्यतीत करने के बाद भी अंशुल एक राॅ एजेंट (बेल बाॅटम) के कोड रूपी नाम से देश की सेवा करने का संकल्प लेता है, और इंदिरा गांधी को बताता है कि इन प्लेन हाईजेक्स के पीछे पाकिस्तान के इंटेलिजेंस आइएएस का हाथ है। शुरू में जब दर्शक फिल्म को देखना शुरू करेंगें तो उनका यह फिल्म थोड़ी स्लो और बोरिंग लग सकती है, लेकिन इतिहास के तथ्यों को समझने के लिए इसमें ध्यान और मन लगाना जरूरी है। उस दौर में डूब जाने की जरूरत भी। फिर बाद में यह आपके अंदर के देशभक्ति की जगा देगी। इतना ही फिल्म में बहुत कुछ है, जिसको आप फिल्म देखने के बाद ही सोच-समझ सकते हैं।

किरदारों की बात करें तो अक्षय कुमार अपने काॅमिक अंदाजो को पीछे छोड़कर जब देशभक्ति वाले किरदारों को करते हैं, तो मील का पत्थर साबित होेते हैं। ‘बेलबाॅटम’ में अंशुल के किरदार को उन्होंने बड़ी बरीकी और समझदारी और एक अलग अंदाज में निभाया है। ‘राॅ एजेंट के के सूट में उनकी बेलबाॅटम का लुक देखते ही बनता हैं। लारा अपने अब तक के जबदरस्त न पहचाने जाने वाले लुक इंदिरा गांधी की भूमिका में सब को अंचभित कर देती हैं। वहीं वाणी कपूर भी अपने सौम्य किरदार में आकर्षित करती हैं। राॅ एजेंट के सीनियर के रूप में आदिल ने अच्छा अभिनय किया है। दूसरी और हुमा कुरैशी का किरदार छोटा होने के बावजूद दमदार लगता है। आतंकी के रूप में जैन ने दुर्रानी के रूप में आंतकी किरदार में अपने को खूब रमाया है।

कुल मिला कर कहा जाए की देशभक्ति की प्रेरणा देने वाली इन फिल्मों को छोटो और बड़ों को जरूर देखना चाहिए, जिससे उन्हें इतिहास की इन कहानियों को पता चल सके। और वैसे भी अब घरों से बहार निकलें, लेकिन पूरी एतिहात और सावधानी से, और जायें मनोरंजन करें, फिल्मी पर्दे पर जाकर इस फिल्म का आनंद जरूर लें।

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