Home दिल्ली ख़ास कला/साहित्य / संस्कृति 14 सितंबर हिंदी पर विशेष : हिंदी राजभाषा कैसे बनी -2

14 सितंबर हिंदी पर विशेष : हिंदी राजभाषा कैसे बनी -2

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  • आनंद क्रांतिवर्द्धन

14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखित हिंदी भाषा को भारतीय संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार कर लिया, इसके साथ ही यह भी व्यवस्था की गई कि अंग्रेजी का प्रयोग अगले 15 वर्ष की अवधि तक यानी 25 जनवरी 1965 तक पहले की तरह जारी रहेगा और इसके बाद अंग्रेजी पूर्णतया विदा हो जाएगी. लेकिन विदाई का यह पल आने से पहले ही राजभाषा अधिनियम 1963 की धारा 3 के माध्यम से अंग्रेजी के प्रयोग को अनंत काल तक जारी रखने का प्रावधान बना दिया गया.

संविधान सभा में देश के सभी प्रांतों से अधिकारी विद्वानों को शामिल किया गया था जिन्होंने अपने बहुमूल्य विचार दिए. इनमें से कुछ सदस्यों के विचार दृश्टव्य हैं:

1-पंडित लक्ष्मी कांत मोइत्रा ( पश्चिम बंगाल) की राय थी कि प्रांतीय ईर्ष्या द्वेष की भावना से बचने के लिए संस्कृत भाषा को राजभाषा बनाया जाना चाहिए क्योंकि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है. अगले 15 वर्ष की अवधि में यदि हम‌ गंभीरता से प्रयास करें तो संस्कृत सीख सकते हैं.

2-फ्रैंक एंथोनी( मध्य प्रदेश) ने कहा- मैं जानता हूं कि राजनैतिक आधार पर अंग्रेजी के खिलाफ एक भावना हमारे मन में है, लेकिन अंग्रेजों के खिलाफ हमारे मन में जो गुस्सा और कड़वाहट है उसे अंग्रेजी भाषा पर नहीं उतारना चाहिए ,मेरा सुझाव है कि हिंदी को रोमन लिपि में लिखा जाए. यह भाषाई एकरूपता लाने के लिए जरूरी है .यदि हमारी दृष्टि अवरुद्ध नहीं है तो हमें रोमन लिपि में लिखित हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्वीकार कर लेना चाहिए.

3-सतीश चंद्र सामंत (पश्चिम बंगाल ) का सुझाव था कि बंगला भाषा को राष्ट्रभाषा बनाया जाए क्योंकि यह एक समृद्ध भाषा है. ऑक्सफोर्ड, वारसा, पैरिस , ज्यूरिख, मॉस्को और रोम जैसे विश्वविद्यालयों में बंगला भाषा पढ़ाई जाती है. सन 1915 में ही बंगला भाषा की आशुलिपि तैयार कर ली गई थी, जिससे सरकारी कामकाज आसानी से किया जा सकता है.

4-पी टी चाको (ट्रावनकोर) की राय थी कि कई देशों में एक से अधिक राजभाषाएं हैं. हमारे देश में भी बंगला, तमिल,  हिंदी और अंग्रेजी को राजभाषा बनाने पर विचार किया जाए.

5-आर वी धूलेकर (संयुक्त प्रांत) ने कहा कई सदस्य संस्कृत को राजभाषा बनाने का सुझाव दे रहे हैं लेकिन मेरी राय में हिंदी को राजभाषा बनाया जाए. संस्कृत राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय भाषा है यह पूरे विश्व की भाषा है. इसमें 4000 धातु हैं. एक दिन जब हिंदी राजभाषा बनेगी, राष्ट्रभाषा बनेगी तो संस्कृत विश्व भाषा के रूप में स्थापित होगी.

उन्होंने कहा कि मुझे बताया गया है कि हमारे राजदूत ने जब रूस में अंग्रेजी भाषा में अपने परिचय के कागजात प्रस्तुत किए तो उस देश में उन्हें स्वीकार करने से इंकार कर दिया तथा उन्हें हिंदी में प्रस्तुत करने पर ही स्वीकार किया गया रूस जैसा देश तो हमारी भाषा का सम्मान करना जानता है लेकिन हमारे कुछ मित्र अपनी स्वयं की भाषा का सम्मान करना नहीं जानते.

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