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110वें जन्मदिवस पर ‘शहीद-ए-आजम’ भगत सिंह.... को शत् शत् नमन....

महान क्रांतिकारी ने आगरा में बम बनाया था...

महान क्रांतिकारी भगत सिंह का आगरा से गहरा रिश्ता रहा है। भगतसिंह ने आगरा के नूरी दरवाजा, नाई की मंडी, हींग की मंडी में काफी समय गुजारा। यहां पर वह छात्र बनकर किराए के मकान में रहे। इस मकान में ही क्रांतिकारी बम बनाते थे। यहीं पर बने बम से लाहौर असेम्बली में विस्फोट किया गया था। इतिहासकारों के मुताबिक, भगतसिंह ने आगरा में रहकर असेम्बली में बम कांड को अंजाम दिए जाने की तैयारी की थी। 

कहते हैं अलविदा हम अब इस जहान को
जाकर खुदा के घर से अब आया न जाएगा
हमने लगाई आग है जो इंकलाब की
इस आग को किसी से बुझाया न जाएगा

भारत की आजादी के इतिहास में भगत सिंह का नाम स्वर्णिम शब्दों में लिखा जाता है। आज भगत सिंह का आज 110वां जन्मदिन है। उन पर हजारों शोध हुए, उनके ऊपर सैकड़ों किताबें लिखी गई हैं। उनके जीवन पर बहुत सी फिल्में भी बनीं। यही वजह है कि आजादी के नायक से नई पीढ़ियां भी पूरी तरह वाकिफ हैं। इसके बावजूद यह कम लोग जानते हैं कि उनके असली फोटो केवल चार हैं। 28 सितंबर, 1907 में पाकिस्तान के बंगा में जन्मे भगत सिंह का पहला फोटो 12 साल की उम्र में खींचा गया था और नका अंतिम फोटो 1927 में लाहौर जेल का है।

शहीद-ए-आजम भगत सिंह पर बनीं फिल्में...

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (1954)।
शहीद भगत सिंह (1963)
शहीद (1965)।
छ लीजेंड आॅफ भगत सिंह (2002)।
शहीद-ए-आजम (2002)।
रंग दे बसंती (2006)

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