दीपावली है, अंतस प्रकाशित करने का पर्व

News Detail 07 Nov 2018 Dharam / Aastha

  • दीपावली दीपों का उत्सव है, प्रकाश का उत्सव है। यह ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ (अंधकार से प्रकाश की ओर गमन) का विराट संदेश मानवता को देता है। लेकिन यह केवल बाह्य अंधकार को दूर करने की बात नहीं है, बल्कि अंतस में छिपे अज्ञानता और अहं के अंधकार को दूर करने की बात है। ऐसा होने से मानवता का भविष्य सदैव उज्ज्वल होगा।

दिवाली पर हम चारों ओर दीये जलाकर अंधकार मिटाते हैं। लेकिन असली बात अपनी बाहरी आंखों को रोशनी दिखाना नहीं है, बल्कि अपनी भीतरी दृष्टि में स्पष्टता लाना है। स्पष्टता के अभावा में कोई भी गुण आपके लिए हितकारी साबित नहीं होगा। 

भारतीय संस्कृति में एक दौर ऐसा भी था, जब साल के हर दिन कोई न कोई त्योहार मनाया जाता था। यानी 365 दिन और 365 त्योहार। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह यह थी कि हम चाहते थे कि हमारा पूरा जीवन एक उत्सव बन जाए। दिवाली मनाने के लिए पीछे भी विचार यही था कि आपकी जिंदगी में उत्सव मनाने का विचार लाया जा सके, इसलिए इस दिन पटाखे जलाए जाते हैं, ताकि थोड़ी-सी चिंगारी व उत्साह का संचार आपके भीतर भी हो सके।

इस त्योहार का मकसद यह नहीं है कि बस एक दिन मौज-जस्ती की और उसके बाद फिर वैसे ही हो गए। इसका असली मकसद है कि साल के हर दिन हमारे अंदर वहीं उमंग और उत्साह रहे। अगर हम यूं सहज बैठें तो हमारी जीवन ऊर्जा, दिल, दिमाग, शरीर एक पटाखे की तरह उमंग से भरा रहे। दिवाली को रोशनी से जोड़कर देखा जाता है। यहां बाहर दिये जलाकर रोशनी की जाती है। पर मन के भीतर जो अंधकार है, उसका क्या? भीतर रोशनी आनीचाहिए। रोशनी यानी स्पष्टता। स्पष्टता नहीं है तो कोई भी गण्ु, हुनर आपके लिए कोई उपहार साबित नहीं होगा, बल्कि अहित ही करेगा। स्पष्टता के अभाव में आत्म्मविश्वास भी खतरनाक ही होता है।

एक बार की बात है, एक नया पुलिस वाला अपने एक अनुभवी साथी के साथ शहर से होकर गुजर रहा था। रेडियों पर उनहें सेदश मिला कि कुछ लोग फलां गली में मटरगश्ती कर रहे हैं। उन्हें वहां से तितर-बितर करना है। उन्होंने देखा कि एक जगह लोगों की एक भीड़ खड़ी है। जैसे ही उनकी गाड़ी उन लोगों के करीब पहुंची, नए पुलिस वाले ने बड़े उत्साह के साथ गाड़ी की खिड़की खोली और बोला, ‘हटो यहां से।’ लोगों ने एक-दूसरे की तरफ उलझन भरी निगाह के साथ गाड़ी की खिड़की खोली और बोला, ‘हटो यहां से।’ लोगों ने एक-दूसरे की तरफ उलझन भरी निगाह सेदेखा। पुलिस वाला चिल्लाया, ‘तुम लोगों ने सुना नहीं? मैंने कहा कि इस जगह से हट जाओ।’ वे सब वहां से हट गए। यह सोचकर कि उसने अपनी पहली ड्यूटी में ही शानदार काम किया है, नौसिखिए पुलिस वाले ने अपने अनुभवी साथी से पूछा, ‘मैंने ठीक किया न?’ उसके साथी ने कहा, ‘हां, ज्यादा तो गलती नहीं की, बस यही किया कि इस बस स्टॉप से लोगों को भगा दिया।’

तो कहने का अर्थ यह है कि बिना स्पष्टता के आप जो भी करेंगें, वह खतरनाक ही होगा। प्रकाश केवल बाहरी आंखों में ही नहीं, बल्कि आपकी अंतदृष्टि में स्पष्टता लाता है। जीवन को आप कितनी स्पष्टता के साथ देखते हैं और अपने इर्द-गिर्द की चीजों को कितनी अच्छी तरह समझते-बूझते हैं, इसी से यह तय होता है कि आप अपने जीवन को कितनी समझदारी से चलाते हैं। दिवाली ऐसा दिन है, जब दुष्ट ताकतों का अंत होता है और प्रकाश फैलता है। यही इंसानी जिंदगी की उलझन भी है। घने काले बादल आकश में छा जाते हैं, बिना यह जाने कि वे सूर्य की रोशनी को रोक रहे हैं। किसी इंसान को प्रकाश कहीं से लाना नहीं है। अगर वह इन घने बादलों को हटा दे, जो उसके अंदर जमा हो गए हैं, तो प्रकाश तो अपने आप ही घटित होगा। प्रकाश पर्व इसी बात को याद दिलाता है।
साभार : ईशा फाउंडेशन

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