हेल्थ : लंबें समय तक खाते हैं आप ज्यादा चीनी तो हो सकते हैं ये नुकसान....

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  • एक औसत भारतीय हर साल लगभग 20 किलोग्राम चीनी का उपभोग करता है।

  • है। बाजार में उपलब्ध अधिकांश प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में खूब सारी चीनी मिलाई जाती है।

  • चीनी अतिसंवेदनशीलता न्यूरोलॉजिकल समस्याओं जैसे अवसाद, चिंता, डिमेंशिया और यहां तक कि अल्जाइमर से भी संबंधित है। यह मस्तिष्क को सचमुच धीमा कर स्मृति और सीखने को कम करती है।

  • 24 से 28 अक्टूबर के बीच होने वाले 25वें एमटीएनएल परफेक्ट हैल्थ मेला 2018 में स्वास्थ्य जांच शिविर होंगे, जहां लोग अपने रक्त शर्करा के स्तर की जांच कर सकते हैं।

नई दिल्ली : अनुमान बताते हैं कि एक औसत भारतीय सालाना लगभग 20 किलोग्राम चीनी का उपभोग करता है! इस स्थिति को जो चीज ज्यादा खराब करती है, वो है कि ज्यादातर लोग इस बात से अनजान हैं कि चीनी अच्छी नहीं होती है और यह नशे की लत जैसी चीज है। जीवनशैली की सबसे आम बीमारियों में से एक, टाइप 2 मधुमेह, चीनी की अतिसंवेदनशीलता के कारण होती है। उन व्यक्तियों में जो नियमित रूप से बहुत अधिक चीनी का उपभोग करते हैं, पैंक्रियास बहुत अधिक इंसुलिन उत्पन्न करते हैं और शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन प्रतिरोध विकसित करती हैं। इसका मतलब यह है कि ग्लूकोज को आसानी से शरीर की कोशिकाओं में संग्रहित नहीं किया जा सकता है, जिससे रक्त प्रवाह में चीनी अधिक हो जाती है।

वैश्विक स्तर पर, चीन के बाद भारत में टाइप 2 मधुमेह वाले वयस्कों की सबसे ज्यादा संख्या है। भारत में टाइप 2 मधुमेह से पीड़ित लोगों की संख्या वर्तमान में 7.2 करोड़ से बढ़ कर वर्ष 2045 तक 15.1 करोड़ होने की संभावना है।

डॉ. के के अग्रवाल के मुताबिक ‘जब हम चीनी खाते हैं, तो मस्तिष्क बड़ी मात्रा में डोपामाइन, यानी अच्छा महसूस करने वाला एक हार्मोन पैदा करता है। बाजार में उपलब्ध अधिकांश प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में खूब सारी चीनी मिलाई जाती है, ताकि हम केचप, दही, पेस्ट्री और इसी तरह के अन्य प्रोडक्ट अधिकाधिक उपभोग करने के लिए प्रेरित करते हैं। चीनी की अतिसंवेदनशीलता मस्तिष्क को बहुत अधिक डोपामाइन छोड़ने का कारण बनती है, जिससे इसके हिस्सों को असंवेदनशील बना दिया जाता है। समय के साथ, अच्छा महसूस करने के लिए, हमारी चीनी खपत भी बढ़ जाती है। हालांकि, यह अच्छी भावना केवल 15 से 40 मिनट तक चलती है। इसलिए, यह तीव्र इच्छाओं का एक दुष्चक्र है, जिससे बहुत से लोग पूरे दिन जूझते हैं। चीनी अतिसंवेदनशीलता न्यूरोलॉजिकल समस्याओं जैसे अवसाद, चिंता, डिमेंशिया और यहां तक कि अल्जाइमर से भी संबंधित है। यह मस्तिष्क को सचमुच धीमा कर स्मृति और सीखने को कम करती है।’

खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) चीनी की तीन श्रेणियों को परिभाषित करता है। प्राकृतिक (फलों और सब्जियों में खाद्य संरचना में निर्मित), जोड़ी गयी (प्रोसेसिंग और तैयारी के दौरान खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों में शर्करा और सीरप मिलाया जाता है) और निःशुल्क (शक्कर और स्वाभाविक रूप से शहद, सीरप, फलों के रस और फलों में मौजूद होती हैं)।

‘श्वेत शक्कर धीमा जहर है। प्रोसेस्ड सफेद चीनी पाचन तंत्र के लिए भी हानिकारक है, खासतौर पर उन लोगों के लिए जिन्हें कार्बोहाइड्रेट पचाने में कठिनाई होती है। यह महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन के प्रभाव को बढ़ाती है जो चेहरे के बाल जैसे एंड्रोजेनस अभिव्यक्तियों में होता है। प्राचीन काल में, भारत के लोग या तो गन्ने का रस, गुड़ या फिर ब्राउन शुगर (खांड) का उपभोग करते थे। प्रोसेस्ड सफेद चीनी के उपयोग का कोई उल्लेख नहीं है। गुड़ और ब्राउन शुगर दोनों सुरक्षित हैं।’

24 से 28 अक्टूबर के बीच होने वाले 25वें एमटीएनएल परफेक्ट हैल्थ मेला 2018 में स्वास्थ्य जांच शिविर होंगे, जहां लोग अपने रक्त शर्करा के स्तर की जांच कर सकते हैं। मधुमेह को रोकने के तरीके के बारे में उनके ज्ञान को बढ़ाने के लिए उन्हें कुछ दिलचस्प रिसोर्स भी मिलेंगे।

कुछ सुझावों को ऐसे अपनाएं.......

* उच्च फ्रक्टोज वाले कॉर्न सीरप से बचें। लेबल में इसके घटक देखें।

गन्ना, शहद या गुड़ जैसे प्राकृतिक स्वीटनर्स का प्रयोग करें।

तीन बड़े भोजन के बजाय, दिन में कई बार छोटे भोजन खाएं। पूरे दिन में फैले छोटे हिस्सों को खाने से, आप अधिक तृप्त महसूस करेंगे और अस्वास्थ्यकर      मिठाई का उपभोग करने के इच्छुक नहीं होंगे।

शराब का सेवन सीमित करें, क्योंकि इसमें छिपी हुई चीनी होती है।

जितना संभव हो उतना रोटी और रोटी से बने उत्पादों को प्रतिबंधित करें, खासतौर पर गेहूं युक्त। गेहूं में चीनी की तुलना में उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है।

जितना संभव हो सके सफेद चावल और मैदा से भी बचें।

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