हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई) ने वर्ल्ड हार्ट डे पर प्रधानाचार्यों और शिक्षकों को किया सम्मानित

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  • कार्यक्रम का उद्देश्य था एंटीमाइक्रोबायल रेसिस्टेंस और हृदय की सेहत के महत्व पर जागरूकता पैदा करना

  • सभी शिक्षकों को हैंड्स-ऑनली सीपीआर में प्रशिक्षित किया गया

नई दिल्ली : एक अग्रणी राष्ट्रीय गैर-लाभकारी संगठन, हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई) ने विश्व हृदय दिवस के उपलक्ष्य में, 29 सितंबर 2018 को आईएमए हाल में एचसीएफआई टीचर्स अवार्ड्स कार्यक्रम का आयोजन किया। दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न सरकारी व निजी स्कूलों के लगभग 40 प्रधानाध्यापकों और 10 शिक्षकों को स्कूल स्तर की स्वास्थ्य शिक्षा में उनके विशेष योगदान के लिए पुरस्कार दिये गये। 

इस अवसर पर, डॉ. संयम भारद्वाज, परीक्षा नियंत्रक, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) मुख्य अतिथि थे। उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों में पद्मश्री पुरस्कार विजेता, डॉ. के के अग्रवाल, अध्यक्ष, एचसीएफआई, डॉ. सुजीत कुमार सिंह, निदेशक और डॉ. सुनील गुप्ता, अतिरिक्त निदेशक, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) प्रमुख थे। यह कार्यक्रम 23 से 27 अक्टूबर 2018 को तालकटोरा इनडोर स्टेडियम, नई दिल्ली में होने वाले 25वें परफेक्ट हैल्थ मेला के अंतर्गत आयोजित किया गया था।

कार्यक्रम में बोलते हुए, डॉ. अग्रवाल ने कहा, ‘शुरुआत में, मैं उन सभी को बधाई देता हूं, जिन्होंने आज पुरस्कार प्राप्त किए हैं। औपचारिक शिक्षा प्रदान करने का केंद्र होने के अलावा, एक स्कूल बच्चे के समग्र विकास को भी प्रभावित करता है। इसलिए, इस दौरान पैदा होने वाली स्वस्थ आदतें बच्चों के जीवन भर बनी रहती हैं। बच्चे स्वाभाविक रूप से जिज्ञासु और उत्सुक शिक्षार्थी होते हैं। इस प्रकार वे स्वास्थ्य से संबंधित किसी भी गतिविधि से सीधे तौर पर प्रभावित होने के अलावा, अपने परिवार में परिवर्तन के भी वाहक होते हैं। एक शिक्षक के रूप में, शिक्षक और प्रधानाचार्य कच्ची उम्र में इन बच्चों में अच्छे स्वास्थ्य के बीज बोने में मदद कर सकते हैं और छात्रों को इस ज्ञान को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।‘

डॉ. सुजीत के. सिंह ने सभी लोगों को हृदय के स्वास्थ्य के महत्व और एंटीबायोटिक दवाओं के दुरुपयोग के बढ़ते मामलों पर जागरूक किया। सभी लोगां को डॉ. अग्रवाल ने हैंड्स-ऑनली सीपीआर में प्रशिक्षित किया। दिल का दौरा पड़ने पर, सीपीआर की मदद से मरीज की जिंदगी बचायी जा सकती है।

अपनी टिप्पणी में, डॉ. सुनील गुप्ता ने कहा, ‘एंटीबायोटिक दवाओं के दुरुपयोग के कारण, आज एंटीमाइक्रोबायल प्रतिरोध बढ़ रहा है। इस तथ्य पर जागरूकता पैदा करना जरूरी है कि एंटीबायोटिक्स कोई मिठाई या चॉकलेट नहीं हैं, बल्कि ये निर्धारित और विषाक्त दवाएं हैं जिन्हें स्वास्थ्य विशेषज्ञ के नुस्खे के अनुसार ही लिया जाना चाहिए। बच्चों को जिस तरह से पटाखे न चलाने के लिए समझाया गया है, वैसे ही प्रधानाचार्यों और शिक्षकों को चाहिए कि वे बच्चों को बिना जरूरत के एंटीबायोटिक दवाएं न लेने के बारे में भी समझाएं। बच्चे और गृहणियां इस परिवर्तन में सहायक हो सकती हैं।‘

पुरस्कार विजेताओं में सुश्री सोनिया लूथरा, प्रिंसिपल, एएसएन सीनियर सेकेंडरी स्कूल, मयूर विहार, डॉ. नीलू गोस्वामी, प्रिंसिपल, वीएसपीके इंटरनेशनल स्कूल, रोहिणी, सुश्री देबोलिना मुखर्जी, शिक्षक, वायु सेना स्कूल, सुब्रतो पाक्र, सुश्री सारिका अरोड़ा, प्रिंसिपल, रामजस स्कूल, आनंद पर्वत और सुश्री निधि, प्रिंसिपल, सीआरपीएफ, प्रशांत विहार शामिल थीं। उन्हें डॉ. अग्रवाल द्वारा हैंड्स-ऑनली सीपीआर तकनीक में भी प्रशिक्षित किया गया। सीपीआर एक ऐसी तकनीक है जो दिल के दौरे के दौरान जीवन बचाने में मदद कर सकती है।

सुश्री सारिका अरोड़ा ने कहा, ‘मैं यह पुरस्कार प्राप्त करके बेहद सम्मानित महसूस कर रही हूं। यह शिक्षकों के लिए न सिर्फ एक प्रोत्साहन है, बल्कि इससे बच्चों के जीवन में परिवर्तन लाने वाले एजेंट की भूमिका भी पुख्ता होती है।‘

परफेक्ट हैल्थ मेला में हृदय की सेहत, एंटीबायोटिक प्रतिरोध और सीपीआर महत्वपूर्ण पहलू होंगे। यह कार्यक्रम एचसीएफआई की एक प्रमुख परियोजना है और स्वास्थ्य के सभी पहलुओं को कवर करने वाले और सबसे ज्यादा देखे जाने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में से एक है, जिसमें हर साल एक लाख से अधिक लोग हिस्सा लेते हैं। इस वर्ष मेला की रजत जयंती मनायी जानी है और इस बार मेला में अनेक लोक लुभावन फीचर शामिल रहेंगे। 

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