हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई) ने एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस के खिलाफ अभियान शुरू किया

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अभियान का उद्देश्य एंटीबायोटिक्स के मनमाने उपयोग और इसके प्रेस्क्रिप्शन के बारे में जागरूकता बढ़ाना है

नई दिल्ली : हैल्थकेयर सेक्टर में राष्ट्रीय स्तर के एक गैर सरकारी संगठन, हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई) ने एनसीडीसी एवं डब्ल्यूएचओ के सहयोग से, 25वें एमटीएनएल परफेक्ट हैल्थ मेला के एक हिस्से के रूप में, एंटीबायोटिक प्रतिरोध के खिलाफ एक अभियान शुरू किया है। यह मेला 23 से 27 अक्टूबर, 2018 को तालकटोरा इनडोर स्टेडियम, नई दिल्ली में आयोजित किया जायेगा। परफेक्ट हेल्थ मेला स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता उत्पन्न करने के मिशन के साथ हर साल आयोजित किया जाता है। अपने 25वें संस्करण में, इस बार मेला में जीवन के सभी क्षेत्रों से 1,00,000 से अधिक व्यक्तियों की भागीदारी की उम्मीद है।

पद्मश्री पुरस्कार विजेता डॉ. के के अग्रवाल, अध्यक्ष, एचसीएफआई और डॉ. सुनील गुप्ता, एडिशनल डायरेक्टर एवं हेड, डिवीजन ऑफ माइक्रोबायोलॉजी, नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (एनसीडीसी) के अतिरिक्त स्वास्थ्य विभाग, दिल्ली सरकार, डीएसटी, एमटीएनएल, एमसीडी और एनडीएमसी के प्रतिनिधि भी इस अवसर पर मौजूद थे।

इस बारे में बोलते हुए, डॉ. के के अग्रवाल ने कहा, ‘हम, हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया में, सभी के लिए किफायती स्वास्थ्य देखभाल के बड़े लक्ष्य को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और परफेक्ट हैल्थ मेला इसका एक माध्यम है। एंटीबायोटिक प्रतिरोध की बढ़ती घटनाओं को ध्यान में रखते हुए, इस मुद्दे पर जागरूकता बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता है। एंटीबायोटिक्स दवाओं के अन्य वर्गों से बहुत अलग होते हैं। व्यक्ति जितना अधिक इनका उपयोग करता है, उतनी ही उनकी प्रभावकारिता कम होती जाती है। भारत जैसे देश के लिए, जहां एंटीबायोटिक दवाओं के अधिक से अधिक पर्चे लिखे जाते हैं और इनका दुरुपयोग प्रचलित है, प्रतिरोधी जीवाणु जल्दी ही मोर्चा जीत जाता है। इन दवाओं में से कई को डॉक्टर के पर्चे के बिना ही प्राप्त किया जा सकता है। दवाओं तक कम पहुंच और स्वच्छता की कमी से परेशानी और भी बढ़ जाती है। एंटीबायोटिक दवाओं को तक नहीं दिया जाना चाहिए, जब तक कि बहुत अधिक जरूरी न हो।’

प्रत्येक वर्ष, अनुमानित तौर पर 7,50,000 लोग एंटीमाइक्रोबायल-प्रतिरोधी (एएमआर) संक्रमण से मर जाते हैं, और जब तक वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय निर्णायक रूप से कार्य नहीं करता तब तक मौतें बढ़ती जायेंगी। अनुमान है कि 2050 तक, एएमआर जटिलताओं से सालाना 1 करोड़ लोग मर सकते हैं। इसलिए यह अभियान देश में एंटीबायोटिक्स के तर्कहीन उपयोग को रोकने के लिए इस बढ़ती चिंता को संबोधित करने और रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए शुरू किया गया है।

अपने संदेश में, डॉ. सुजीत के सिंह, निदेशक, एनसीडीसी ने कहा, ‘एंटीमाइक्रोबायल प्रतिरोध के बढ़ते मामलों के कारण पिछले 30 वर्षों में विशव में नए एंटीबायोटिक्स में कोई शोध नहीं हुआ है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, प्रतिरोध प्रजातियों के सबसे महत्वपूर्ण समूह में मल्टीड्रग प्रतिरोधी बैक्टीरिया शामिल है, जो अस्पतालों, नर्सिंग होम और उन रोगियों के बीच खतरा पैदा करता है जिनकी देखभाल में वेंटिलेटर और ब्लड कैथेटर जैसे उपकरणों की आवश्यकता होती है। ये एसिनेटोबैक्टर, स्यूडोमोनास और विभिन्न एंटरोबैक्टेरियासिया (क्लेब्सीला, ई कोलाई, सेरातिया और प्रोटीस समेत) हैं। वे रक्तचाप संक्रमण और निमोनिया जैसे गंभीर और अक्सर घातक संक्रमण कर सकते हैं।’

एंटीबायोटिक प्रतिरोध पर अपनी पहली वैश्विक रिपोर्ट में, डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी दी है कि एंटीबायोटिक युग के बाद- जिसमें सामान्य संक्रमण और मामूली चोटें एक एपोकेलिप्टिक फेंटेसी से दूर हो सकती हैं, लेकिन 21वीं शताब्दी के लिए यह एक बहुत ही वास्तविक संभावना है।

डॉ. सुनील गुप्ता ने कहा, ‘एक कल्चर सेंसिटिविटी परीक्षण इंगित कर सकता है कि किस मामले में एंटीबायोटिक प्रभावी है। यह जरूरी है कि एंटीबायोटिक की दूसरी खुराक केवल तभी दी जाए, जब कल्चर के रैपिड मैथड का नतीजा मिल चुका हो। जागरूकता उत्पन्न की जानी चाहिए कि वायरल संक्रमण और अधिकांश त्वचा की समस्याओं के लिए एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग की आवश्यकता नहीं है। एंटीबायोटिक दवाएं तब तक नहीं दी जानी चाहिए, जब तक कि कल्चर संक्रमण के प्रतिरोधी पैटर्न को न देखा जाये। हमें याद रखना चाहिए कि एंटीबायोटिक्स मिठाई या चॉकलेट नहीं हैं, बल्कि निर्धारित और विषाक्त दवाएं हैं जो दुरुपयोग होने पर नुकसान पहुंचा सकती हैं।’

डॉक्टरों के साथ-साथ रोगियों को एंटीबायोटिक दवाओं के न्यायसंगत उपयोग के बारे में पता होना चाहिए। ओवर-प्रेस्क्रिप्शन और खुद से दवा खरीदना, दोनों ही ट्रेंड को जांचने की आवश्यकता है। एंटीबायोटिक दवाओं के दुरुपयोग के सबसे बड़े कारणों में से एक डॉक्टर के परामर्श के बिना इन्हें काउंटर से खरीदना रहा है। एंटीबायोटिक दवाओं को निर्धारित करने से पहले, हमेशा पूछें- क्या यह आवश्यक है? सबसे प्रभावी एंटीबायोटिक क्या है? सबसे किफायती एंटीबायोटिक क्या है? सबसे प्रभावी खुराक क्या है? सबसे प्रभावी अवधि क्या है जिसके लिए एंटीबायोटिक दिया जाना चाहिए?

इस साल परफेक्ट हैल्थ मेला के लिए थीम है एफोर्डेबल हेल्थकेयर है। दोस्ताना हाथी डॉक्टर टस्कर, इस ईवेंट के लिए शुभंकर है। आगंतुकों और हितधारकों को समान रूप से इंटर-स्कूल और कॉलेज की घटनाओं और स्वास्थ्य शिविरों के अलावा विभिन्न आकर्षणों से भरपूर होगा। 

एचसीएफआई के कुछ सुझाव

* संक्रमण को रोकने पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए, खांसी या ठंड से पीड़ित किसी व्यक्ति से कम से कम 3-फीट दूर रहें।
हैंडवाशिंग तकनीकों का पालन करके जीवाणु संक्रमण से बचा जा सकता है।
अस्पताल और हैल्थकेयर सेटिंग में सावधान रहना चाहिए। क्लिनिक में
रोगियों, दरवाजे के हैंडल और बाथरूम सीटों से सावधान रहें। ये सभी संक्रमण के संभावित स्रोत हैं। उपयोग से पहले महिलाओं को टॉयलेट सीट को साफ कर लेना चाहिए, क्योंकि इसमें शुष्क संक्रमण हो सकता है। 
डॉक्टरों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि एंटीबायोटिक्स बोल्ड में लिखे गए हों या इन्हें अंडरलाइन कर दिया जाये। 
किसानों और खाद्य उद्योग को एंटीबायोटिक्स प्रतिरोध का प्रसार रोकने के लिए स्वस्थ जानवरों में बीमारी को रोकने के लिए नियमित रूप से एंटीबायोटिक्स का उपयोग करना बंद कर देना चाहिए। 
आपके द्वारा खरीदी गई दवा में हमेशा लाल लाइन की तलाश करें, क्योंकि लाल चेतावनी इंगित करती है कि यह एक एंटीबायोटिक है।

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