नवरात्री में कुट्टू के आटे के फायदे

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नवरात्रे शुरू हो गए हैं, 9 दिनों तक आस्था से परिपूर्ण नवरात्रे तन, मन और आत्मा को स्वच्छ करने का मौका होता है। इस दौरान गेहूं का आटा नहीं खाया जाता, कुट्टू का आटा खाया जाता है। कुट्टू का आटा अनाज नहीं बल्कि फल से बनता है जोकि अनाज के एक बेहतर विकल्प है।

  • पूरी और पकोड़े तलने की बजाए इससे बनी रोटी खाएं।

  • कुट्टू के आटे से इडली भी बन सकती है और समक के चावल से डोसा भी बनाया जा सकता है।

कुट्टू के आटे के फायदों के बारे में जानकारी देते हुए आईएमए के नैशनल प्रेसीडेंट एंव एचसीएफआई के प्रेसीडेंट पद्मश्री डॉ. के.के. अग्रवाल और आईएमए के जनरल सेक्रेटरी डाॅ आरएन टंडन ने बताया कि कुट्टू का आटा प्रोटीन से भरपूर होता है और जिन्हें गेहूं से एलर्जी हो उनके लिए बेहतरीन विकल्प है। इसमें मैग्नीशियम, विटामिन बी, आयरन, कैल्शियम, फोलेट, ज़िंक, कोपर, मैग्नीज़ और फासफोरस भरपूर मात्रा में होता है। इसमें फाईटोन्यूट्रियेंट रूटीन भी होता है जो कोलेस्ट्रोल और ब्लड प्रैशर को कम करता है। सेलियक रोग से पीड़ितों को भी इसे खाने की सलाह दी जाती है।

क्योंकि कुट्टू के आटे को चबाना आसान नहीं होता इस लिए इसे छह घंटे पहले भिगो कर रखा जाता है फिर इन्हें नर्म बनाने के लिए पकाया जाता है ताकि आसानी से पच सके। चूंकि इसमे ग्लूटन नहीं होता इसलिए इसे बांधने के लिए आलू का प्रयोग किया जाता है। यह ध्यान रखें कि इसकी पूरियां बनाने के लिए हाईड्रोजेनरेट तेल या वनस्पति का प्रयोग ना करें, क्यूंकि यह इसके मेडिकल तत्वों को ख़त्म कर देता है। इसे बनी पूरियां ज़्यादा कुरकुरी होती हैं। वैसे पूरी और पकोड़े तलने की बजाए इससे बनी रोटी खाएं। कुट्टू के आटे से इडली भी बन सकती है और समक के चावल से डोसा भी बनाया जा सकता है।

यह हैं इसके फायदे

  • कुट्टू 75 प्रतिशत जटिल कार्बोहाईड्रेट है और 25 प्रतिशत हाई क्वालिटी प्रोटीन, वज़न कम करने में यह बेहतरीन मदद करता है।

  • इसमें अल्फा लाइनोलेनिक एसिड होता है, जो एचडीएल कोलेस्ट्रोल को बढ़ाता है और एलडीएल को कम करता है।

  • यह अघुलनशील फायबर का अच्छा स्रोत है और गालब्लैडर में पत्थरी होने से बचाता है। अमेरीकन जरनल आॅफ गेस्ट्रोएनट्रोलाॅजी के मुताबिक 5 प्रतिशत ज़्यादा घुलनशील फायबर लेने से गाल ब्लैडर की पत्थरी होने का ख़तरा 10 प्रतिशत कम हो जाता है।

  • फाइबर से भरपूर और ग्लिसेमिक इंडेक्स कम होने से यह डायब्टीज़ वालों के लिए बेहतर विकल्प है। कुट्टू के आटे का ग्लिसेमिक इंडेक्स 47 होता है।

  • कुट्टू के आटे में मौजूद चाईरो-इनोसिटोल की पहचान डायब्टीज़ रोकने वाले तत्व के रूप में की गई है।

  • कुट्टू के आटे में मिलावट की जा सकती है और इसे विश्वसनीय स्रोत से ही खरीदना चाहिए। पिछले साल का बचा हुआ आटा भी प्रयोग नहीं करना चाहिए, इससे फूड पायज़निंग हो सकती है।
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