दिल्ली के सिग्नेचर ब्रिज का हुआ उद्घाटन, इंजीनियरिंग का है अद्भुत करिश्मा

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  • के. कुमार

  • 575 मीटर लंबे पुल पर पर्यटक और दर्शक सेल्फी लेने का आनंद उठा सकेंगें।

दिल्ली :
आखिरकार 11 साल बाद देश का सबसे ऊंचा पुल बनकर तैयार हो गया और आज उसका उद्घाटन भी। इंजीनिरिंग को अद्भुत करिश्मा है, सिग्नेचर ब्रिज। राजधानी के आउटर रिंग रोड का वजीराबाद से जोड़ने वाला भारत का पहला असिमेट्रिकल केबल वाला यह सिग्नेचर ब्रिज 5 नवंबर से दिल्ली वालों के लिए शुरू हो जाएगा। 

उद्घाटन अवसर पर पहुंचे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि दिल्ली लालकिला, कुतुबमीनार के साथ ही सिग्नेचर ब्रिज के लिए भी जानी जाएगी। वहीं डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा कि यह ब्रिज इंजीनियरिंग का अद्भुत करिश्मा है। अब हमारे पास भी एफिल टॉवर की तरफ अपना ब्रिज है। सिसोदिया ने कहा कि ब्रिज के ऊपर से दिल्ली का एक अलग नजारा देखने को मिलेगा। 50 लोगों की क्षमता वाले चार एलिवेटर की मदद से दर्शकों को ब्रिज के ऑप पर ले जाया जा सकेगा। 

सिग्नेचर ब्रिज का यह प्रोजेक्ट 1997 में मंजूरी मिलने के बाद 2004 में इस पर काम शुरू हुआ। धन की कमी के कारण ही इस पुल के निर्माण में इतना समय लगा। इस परियोजना की लागत 1,100 रुपए से बढ़कर 1,575 करोड़ रुपए हो गई। लेकिन अंततः अब 14 सालों बाद इसका उद्घाटन हुआ।

  • जानें क्या हैं सिग्नेचर ब्रिज की खासियतें

इस ब्रिज पर 154 मीटर की ऊंचाई पर एक ग्लास का बॉक्स बनाया जा रहा है, जिसकी ऊंचाई कुतुबमीनार से दोगुनी है।

ब्रिज पर 19 स्टे केवल्स हैं, जो वूमरेंग शेप में है।

575 मीटर लंबे इस पुल पर एक सेल्फी प्वाइंट भी बनाया गया है, जिससे यहां आने वाले पर्यटक यहां से खूबसूरत दिल्ली का आनंद ले सकेंगें।

ब्रिज के शुरू होने से दिल्ली के उत्तरी और उत्तरी-पूर्वी दिल्ली की जनता को यातायात सुविधा तो मिलेगी, लेकिन 45 मिनट का सफर 10 मिनट पर पूर हो जाएगा।

ब्रिज के बन जाने से कश्मीरी गेट पर भी ट्रेफिक से राहत मिलेगी। वहीं करनाल बाईपास से आने वाले ट्रेफिक भी डायवर्ट हो जाएगा।

खासकर दिल्ली से लोनी और गाजियाबाद जाने में समय कम लगेगा। 

यात्री जब इस रूट से निकलेंगें तो उनको चारों तरफ हरियाली और प्रकृति का खूबसूरत नजारा देखने को मिलेगा और ब्रिज की भव्यता को देखकर आश्चार्य भी।

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