गुरुग्राम : देशभर के ग्रामीण समुदाय की महिलाओं ने रीड इंडिया की लाइब्रेरी से पुस्तकें पढ़कर,कंप्यूटर व अन्य स्किल बेस ट्रेनिंग लेकर आज अपना मुकाम हासिल कर रहे है। जोकि आज इन सभी की पहचान बन चुका है और यही ग्रासरूट लीडर्स अब समुदाय की अन्य महिलाओं को इस कार्यक्रम से जोड़कर उन्हे हुनरमंद बनाने में भागीदार बन रही है। रीड इंडिया की ओर से सेक्टर 45 में बुधवार को देशभर से आए ग्रासरूट लीडर्स रीड इंडिया समिट 2026 में अपनी सफलता और समुदाय के विकास पर अपनी बात रख रहे थे।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए रीड इंडिया की सीईओ डॉ.गीता मल्होत्रा ने कहा कि समिट का उद्देश्य विकास संवाद में जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं की आवाज को उनके हुनर के साथ सामने लाना है। इसमें ग्रासरूट लीडर्स, विकास क्षेत्र के विशेषज्ञ, सीएसआर प्रतिनिधियों, नीति विशेषज्ञ और संस्थागत साझेदार ने एक साथ मिलकर समुदाय आधारित विकास मॉडलों पर चर्चा कर बताया कि महिलाओं को तकनीक से पूर्ण दक्षता आधारित प्रशिक्षण देकर उनको किस तरह से स्वावलंबी बनाया जाए, इस पर चर्चा की।

इसके लिए रीड इंडिया की ओर से पिछले 15 वर्षों से लाइब्रेरी व तकनीक आधारित नवीनतम समुदाय आधारित कार्यक्रम चलाकर महिलाओं की नेतृत्व क्षमता को बढ़ाने का काम कर रहे है। देश के 13 राज्यों में 65 सामुदायिक केंद्रों के माध्यम से सामुदायिक पुस्तकालय, कौशल विकास और नेतृत्व विकास कार्यक्रम चलाए जा रहे है, जिससे ग्रामीण समुदाय को आत्मनिर्भर बन रहा है,ताकि दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन लाया जा सकें। इसी से ही ग्रामीण समुदायों को शिक्षा, आजीविका और संस्थागत विकास के माध्यम से सशक्त बनाया जा सकेगा।
उन्होने बताया कि शुरुआती दौर में महिलाएं लाईब्रेरी तक भी नहीं आ रही थी,फिर धीरे —धीरे कंप्यूटर, स्किल बेस कार्यक्रम शुरू किए गए। इससे अब तक 55 हजार से अधिक महिलाओं ने रीड इंडिया सामुदायिक लाइब्रेरी से प्रशिक्षण लेकर समुदाय स्तर पर अपनी पहचान बना पाई है और आज वे गांव में ही रहकर पारंपरिक खेती के साथ नवीनतम तकनीक को भी इसमें अपना कर अपना जीवन बेहतर बना रही है।
पिछले कई वर्षों से देश के विभिन्न राज्यों में समुदायों के साथ मिलकर साक्षरता एवं शिक्षा, आईसीटी, प्रारंभिक बाल विकास, महिला सशक्तिकरण, युवा विकास, स्वास्थ्य एवं समग्र विकास जैसे सात प्रमुख क्षेत्रों में काम किया जा रहा है। वहीं संगठन का लक्ष्य समुदायों में नेतृत्व क्षमता विकसित करना और स्थानीय स्तर पर टिकाऊ विकास को बढ़ावा देना है।
इस समिट के माध्यम से जमीनी स्तर पर काम करने वाले ग्रासरूट लीडर्स को मंच प्रदान करना है,जहां वे अपने अनुभव, नेतृत्व की यात्रा और समुदाय में आए बदलाव की कहानियां साझा कर सकें।
रीड इंडिया का मिशन साक्षरता और शिक्षा को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। यह ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का कार्य करता है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप यह पहल राष्ट्रीय विकास को गति देती है। ज्ञान और कौशल के माध्यम से यह देश के समग्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

रीड इंडिया के फाउंडर ट्रस्टी जे.विक्रम बख्शी ने कहा कि सतत विकास केवल नीतिगत ढांचे से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समुदायों के भीतर से उभरने वाले नेतृत्व की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसलिए उसे समुदाय स्तर पर इन्ही महिलाओं के माध्यम से मजबूत करने की जरूरत है।
ऋषिहुड यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर ह्यूमन साइंसेज के निदेशक प्रो.संपदानंद मिश्रा ने कहा कि वर्तमान समय में हमें अपने मूल से जुड़कर संस्कारों को जानने की जरूरत है। तभी हम भारतीय संस्कृति एवं ज्ञान को हर घर तक पहुंचा सकतें है। रीड इंडिया के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों तक पारंपरिक सिस्टम को ले जाने की शुरुआत कर दी है, जिसके सकारात्मक परिणाम भी आज सभी के सामने है।
सतत विकास लक्ष्यों से जुड़ा समिट : आरआई की डायरेक्टर पार्टनरशिप स्मिता राय ने बताया कि रीड इंडिया समिट 2026 में रीड के कार्यों को संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के 5पी फ्रेमवर्क — लोग, ग्रह, समृद्धि, साझेदारी, शांति के साथ जोड़ा गया। इसके माध्यम से यह दिखाया गया कि समुदाय आधारित पहल किस तरह सतत और समावेशी विकास को आगे बढ़ाती हैं।
- समिट में ग्रासरूट लीडरशिप संवाद में देशभर के रीड केंद्रों से जुड़े ग्रासरूट लीडर्स और विकास कार्यकर्ताओं ने अपने—अपने अनुभव साझा किया।
- थीमैटिक पैनल चर्चा में सामुदायिक नेतृत्व, कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण, डिजिटल समावेशन और जमीनी नवाचार पर चर्चा की गई।
- सीएसआर और विशेषज्ञ संवाद: विकास विशेषज्ञ और सीएसआर प्रतिनिधियों ने समुदाय आधारित विकास के भविष्य पर विचार साझा किया।
रैंप वॉक के जरिए हस्तशिल्प उत्पादों का हुआ प्रदर्शन : रीड इंडिया से दक्षता ग्रहण कर रही महिला कारीगरों द्वारा बनाए गए हस्तशिल्प उत्पादों की विशेष रैंप वॉक आयोजित की गई। जिसमें महिलाओं ने अपने स्वंय के बनाए हस्तनिर्मित परिधानों को खुद ने ही रैंप वॉक पर प्रदर्शित किया। रैंप वॉक में हाथों से बने वस्त्रों को देख मौजूद सभी अतिथियों, प्रतिभागियों ने तारीफ की और सभी महिला दस्तकारों की सराहना भी की। इसका उद्देश्य महिलाओं की रचनात्मकता, कौशल और उद्यमिता को बढ़ावा देना है।
सबसे कम विकसित जिलों में नई शुरुआत : आकांक्षी जिला कार्यक्रम (Aspirational Districts Programme – ADP) जनवरी 2018 में नीति आयोग द्वारा शुरू किया गया। जिसमें लक्ष्य देश भर के 112 सबसे कम विकसित जिलों का शीघ्र और प्रभावी ढंग से कायाकल्प करना है। इनमें रीड इंडिया ने महाराष्ट के लातूर,बीड़,हरियाणा के नूंह मेवात एवं राजस्थान के बारां जिलों में आदिवासी समुदाय के लिए कार्य किया जा रहा है। इन जिलों में स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, वित्तीय समावेशन और बुनियादी ढांचे जैसे 5 मुख्य क्षेत्रों में प्रगति सुनिश्चित कर रहें है।
रिपोर्ट का विमोचन : समिट के दौरान सामुदायिक प्राथमिकता दृष्टिकोण के साथ जमीनी स्तर की पहल “Grassroots Initiative with Community First Approach” शीर्षक से एक विशेष रिपोर्ट जारी की गई। इसमें रीड इंडिया के समुदाय आधारित विकास मॉडल और उसके प्रभाव को दर्शाया गया है।
इस दौरान ट्रस्टी कल्पना दासगुप्ता सहित अन्य वक्ताओं ने ग्राम विकास में समुदाय आधारित विकास के मॉडल पर अपनी अपनी राय रखी।
ग्रासरुट लीडर्स को मिला सम्मान : देशभर में आए ग्रासरुट लीडर को समिट के दौरान सम्मान प्रदान किया गया। जिसमें सत्काल लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड नीति सक्सेना को दिया गया। वहीं स्वाति पीवाल, डा.उपासना यादव, अरुमुगम पिचाय को बेहतर लाइब्रेरी संचालन के लिए सत्काल अवार्ड दिया गया।
इन राज्यों से आए ग्रासरुट लीडर : रीड इंडिया समिट 2026 में उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी, रामपुर, लखनऊ, राजस्थान के बारां, गीजगढ़, महाराष्ट्र के औरंगाबाद,लातूर,बीढ,कोल्हापुर,पुणे,आंध्र प्रदेश के बैरादेपल्ली, हरियाणा के झज्जर, पलवल, नूंह, गुरुग्राम, कर्नाटक के बेंगलुरु, पश्चिमी बंगाल के शांति निकेतन,और नोएडा,दिल्ली सहित कई राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हुए। समिट के समापन पर डायरेक्टर पार्टनरशिप स्मिता राय ने सभी का आभार व्यक्त किया।









