March 2, 2026

World News

भारत पर असर: कूटनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा

ईरान संकट का असर भारत पर भी दिख रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इज़राइल की संसद ‘कनेस्सेट’ में ऐतिहासिक भाषण दिया और हमास हमलों की निंदा की। उन्हें “स्पीकर ऑफ कनेस्सेट मेडल” से सम्मानित किया गया। दूसरी ओर, भारत का बासमती चावल उद्योग संकट में है। ईरान को निर्यात रुकने से हरियाणा की मिलों में लाखों टन चावल अटका हुआ है, जिससे किसानों और व्यापारियों की आजीविका प्रभावित हो रही है। ईरान में फंसे भारतीय छात्र लगातार धमाकों और असुरक्षा की शिकायत कर रहे हैं। पंजाब सरकार ने विदेशों में नागरिकों की मदद के लिए 24×7 हेल्पलाइन शुरू की है। इसी बीच महाराष्ट्र के पालघर जिले में ओलियम गैस रिसाव से 2,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया, जिनमें 1,600 छात्र शामिल हैं।

World News

अमेरिका का युद्ध रुख: ‘यह अंतहीन युद्ध नहीं’

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हगसेथ ने कहा है कि ईरान के खिलाफ अभियान “सर्जिकल और निर्णायक” होगा, लेकिन यह अंतहीन युद्ध में नहीं बदलेगा। उनका कहना है कि लक्ष्य ईरान की मिसाइल और नौसैनिक क्षमता को नष्ट करना है। राष्ट्रपति ट्रंप जल्द ही ईरानी नागरिकों को संबोधित करेंगे और अमेरिका की “युद्ध समाप्त करने” की प्रतिबद्धता दोहराएंगे। हालांकि हालात बिगड़ते जा रहे हैं—कुवैत में अमेरिकी दूतावास पर ईरानी ड्रोन हमला हुआ और एक अमेरिकी F‑15 लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। तेल की कीमतें बढ़ गई हैं और शेयर बाज़ारों में गिरावट देखी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका ज़मीनी सैनिकों से बचना चाहता है, लेकिन क्षेत्रीय युद्ध का खतरा बना हुआ है।

World News

मध्य पूर्व में उथल-पुथल: खामेनेई की मौत से बढ़ा तनाव

ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की अमेरिका-इज़राइल हमले में मौत ने पूरे मध्य पूर्व को संकट में डाल दिया है। इज़राइल ने तेहरान पर नए हमले शुरू कर दिए हैं, वहीं कुवैत ने गलती से अमेरिकी लड़ाकू विमानों को मार गिराया। संयुक्त राष्ट्र ने सैकड़ों मौतों और घायलों की पुष्टि की है। विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना ईरान की मौजूदा शासन व्यवस्था के पतन की शुरुआत हो सकती है। ईरानी नागरिकों में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है—कुछ शोक में हैं तो कुछ आतिशबाज़ी कर जश्न मना रहे हैं। इस बीच हिज़्बुल्लाह ठिकानों पर भी हमले हुए हैं, जिससे संघर्ष ईरान से बाहर फैलने की आशंका बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को डर है कि यह संकट वैश्विक तेल आपूर्ति और बाज़ारों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।

Scroll to Top