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रिव्यू : ‘छपाक से पहचान ले गया’

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के. कुमार

  • फिल्म : ‘छपाक’।
  • कलाकार : दीपिका पादुकोण, विक्रांत मेसी, मधुरजीत सरगी, अंकित बिष्ट, देलजाद हिवाले, गोविंद सिंह संधू।
  • निर्देशक : मेघना गुलजार।
  • रेटिंग : 3

मानसिक रूप से विक्षिप्त या फिर एक तरफा प्यार में पड़े घटिया मानसिकता के विचारों के सिरफिरे युवकों से दूसरों की खुशी और सुंदरता बर्दाशत नहीं होती, नतीजतन वह चेहरे पर एसिड फैंकने या फिर उनको मार डालने वाली विभत्स घिनौनी घटनाओं को अंजाम देते हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं, सन् 2012 में रहने वाली लड़की लक्ष्मी अग्रवाल की, जिसके साथ हुई एसिड की सिरहन पैदा कर देने वाली दर्दनाक घटना को दर्शया है, निर्देशक मेघना गुलजार ने फिल्म ‘छपाक’ के माध्यम से और फिल्म में लक्ष्मी का किरदार निभाया है, अभिनेत्री दीपिका पादुकोण ने। मेघना गुलजार ने बाखूबी लक्ष्मी की कहानी को बड़े पर्दे पर दर्शाया है। वैसे भी महिलाओं पर अत्याचारों और उनके जीवन की त्रासदी को दिखाने वाली कहानियां आजकल बाॅलीवुड में बन रही हैं। ऐसे में फिल्म ‘छपाक’ एसिड अटैक के बाद अपनी जिंदगी से जूझ रही स्त्रियों के दर्द को दिखाने वाली विशेष फिल्म हैं।

असल में सन् 2012 में दिल्ली में रहने वाली लक्ष्मी अग्रवाल अग्रवाल पर एकतरफा प्यार में डूबे एक शख्स बशीर खानू उर्फ बब्बू ने लक्ष्मी के चेहरे पर दिन दहाड़े एसिड फिकवा दिया था। उसी लक्ष्मी की कहानी को फिल्म में दिखाया गया है, जिसमें ऐसिड के हमले की सर्वाइवर मालती (दीपिका पादुकोण) को दिखाया गया है, जो जिसमें आगे बढ़ने की चाह है, जो नौकरी की तालाश में है, और यही नहीं उसके परिवार की आर्थिक स्थित अच्छी नहीं है, लेकिन ज नौकरी के लिए जाती है, तो उसको ऐसिड हमले से हुए बदसूरत चेहरे की वजह से नौकरी नहीं मिलती है। मालती की कई सर्जरी होती है। बाद में मालती को एक पत्रकार खोजकर उसका साक्षात्कार करती है, तो उसके जीवन के कई पहलू सामने आते हैं और वह ऐसिड में शिकार हुई लड़कियों के लिए काम करने वाली एक एनजीओ के हेड अमोल (विक्रांत मेसी) से मिलवाती है, जिसके बाद वह वहां नौकरी करने लगती है, और मालती अन्य ऐसिड अटैक से त्रस्त लड़कियों से मिलती है। मालती को भी उन्हें देखकर अपनी कहानी याद आती है, खूबसूरत मालती कैसे सिंगर बनने का सपना देख रही होती है, मगर बशी खान उर्फ बबू द्वारा करवाए गए एसिड अटैक के बाद उसकी जिंदगी कितनी विभत्स हो जाती है।

 

जब मालती अवसाद में डूबी होती है, उसकी कई सर्जरी करवाने के बावजूद भी समाज के सामने उसमें आने की हिम्मत नहीं होती। ऐसे में उसके परिवार का साथ और एक वकील अर्चना (मधुरजीत सरघी) द्वारा मालती का उत्साहवर्द्धन कर उसको इंसान दिलाने प्रेरणा से वह उत्साहित होती है और जिसके साथ वह अर्चना के साथ मिलकर अपने न्याय और एसिड को बंद किए जाने के लिए याचिका दायर करती है। मीडिया का कई बार मालती को सामना करना पड़ता है, वह मीडिया के सवाल-जवाबों के स्वरूप कहती है कि उन्होंने मेरा चेहरा मुझसे छीना है पर मेरा मन और मुस्कार कोई मुझे नहीं छीन सकता।

फिल्म में जो चीज देखने लायक है वह दीपिका का प्राॅस्थेटिक मेकअप, जो बहुत रियलेस्टिक है। लेकिन कहीं-कहीं पर फिल्म थोड़ी स्लो हो जाती है, तो कुछ ऊबाउ से लगती है। लेकिन ऐसे में मालती के दर्द को दीपिका ने अपने चेहरे के माध्यम से अच्छे से निभाया है। कहीं-कहीं पर फिल्म कुद डाॅक्यूमेंटरी जैसी लगती है। संगीत की बात करें तो शंकर एहसान के संगीत में टाइटिल टैªक ‘छपाक से पहचान ले गया’ दिल को छूता है। उनके अभिनय ने मालती की कहानी को जीवंत कर दिया है। फिल्म कि कहानी में बहुत से दृश्य ऐसे हैं, जो दर्शकों को भावुक कर देंगें। वहीं अमोल के रूप में विक्रांत मेसी ने भी अपने अभिनय को दमदार रूप में निभाया है। वहीं मधुरजीत सरगी ने भी लाॅयर के रूप में अपने किरदार को जीवंत किया है।

अभी तक अनगिनत लोग एसिड सर्ववाइवर लक्ष्मी अग्रवाल कि कहानी अंजान थे, तो ऐसे में लक्ष्मी की दर्दनाक कहानी और उसके संघर्ष को देखने और जानने के लिए आपको फिल्म ‘छपाक’ जरूर देखनी चाहिए।

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